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रहस्यमय दुर्घटना में मारे गए उत्तराखंड राज्य गठन आंदोलनकारी शूरवीर सिंह नेगी के अनाथ परिवार की सुध लें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी

 

माननीय मुख्यमंत्री धामी जी
बहुत दुखी मन से आप के लिए इस मध्यरात्रि में यह खुला पत्र लिख रहा हूं । राज्य गठन आंदोलनकारी शूरवीर सिंह नेगी की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत/निर्मम हत्या की खबर सुनने के बाद।
शूरवीर सिंह नेगी सुपुत्र स्वर्गीय ज्ञान सिंह नेगी, गांव रत्नाव तल्ला पत्रालय रत्नाव मल्ला, पट्टी उदयपुर टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड के निवासी थे। उनकी दर्दनाक मौत के बाद उनका पूरा परिवार अनाथ हो गया। आपसे निवेदन है कि आप उत्तराखंड राज्य गठन आंदोलनकारी शूरवीर सिंह नेगी के गरीब व अनाथ परिवार की यथासंभव सहायता करने के दायित्व का निर्वहन करेंगे।
उनके अनाथ परिवार में उनकी विधवा पत्नी, दो बेटे आशीष व गौरव तथा बिटिया अन्नू आदि इस हादसे से पूरी तरह से टूट गए हैं। बिटिया का विवाह कुछ महीने बाद ही करने की तैयारी में दिल्ली देहरादून में नौकरी करके एक एक पाई जुटाने में जुटे थे अधेड़ शूरवीर सिंह नेगी। बिटिया की डोली घर से उठने से पहले अभागा पिता शूरवीर इस दुनिया से विदा हो गया।
राज्य गठन के बाद 23सालों से उत्तराखंड की सरकारें तमाम दावे करते रहे कि उन्होंने आंदोलनकारियों का सम्मान किया और उनको उनके आर्थिक मदद दे रही हैं। परंतु सच्चाई यह है कि उत्तराखंड राज्य गठन के लिए समर्पित रहे आंदोलनकारी शूरवीर सिंह नेगी लगातार 23 साल से सभी सरकारों की दर पर गुहार लगाते रहे आंदोलनकारियों की शूरवीर सिंह नेगी। टिहरी के वर्तमान विधायक किशोर उपाध्याय व कई वर्षों से आंदोलनकारी कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष रहे धीरेंद्र प्रताप कई बार गुहार लगाते रहे। टिहरी सांसद सहित सभी मुख्यमंत्रियों के दर पर अपनी फरियाद सुनाते रहे परंतु सत्तामद में किसी ने भी न आंदोलनकारी की गुहार सुनी न सत्तामद में रखेंगे आंदोलनकारियों के अपमानित करने वाले मानकों पर ही नजर फेरी।
आज राज्य आंदोलन के साथी मनमोहन ने दूरभाष पर बताया कि राज्य गठन आंदोलनकारी शूरवीर सिंह नेगी नहीं रहे, तो मुझे विश्वास नहीं आया। परंतु जब उन्होंने उनके परिजनों से संपर्क करने के बाद उनकी मृतक देह की तस्वीरें भी प्रेषित की तो मुझे बहुत गहरा धक्का लगा।
कुछ देर पहले ही मैंने शूरवीर सिंह नेगी की शोकाकुल बेटी अन्नू से दूरभाष से बात कर उन्हें अपनी सांत्वना प्रकट की।भगवान दिवंगत शूरवीर सिंह नेगी की आत्मा को शांति दे। इस दुख की घड़ी में परिवार को दुख सहने की शक्ति दे।
पहले मैंने आज सांय उनके गांव प्रधान गब्बर सिंह नेगी से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की परंतु उनका फोन नहीं मिल पाया। इसके बाद मैंने शूरवीर सिंह नेगी की बिटिया को फोन किया। संक्षिप्त बात करने के बाद बिटिया ने अपना फोन अपने मौसा को सौंप दिया।
इसके बाद देहरादून रहने वाले उनके मौंसा,  (नेगी के साढू भाई) ने बताया कि 16 जनवरी 2023 की रात को जब शूरवीर देहरादून से दिल्ली पहुंचा तो वहां से बस अड्डे से वह किसी थ्री व्हीलर से जहांगीर पुरी में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास गया।
थ्री व्हीलर वाले ने रात को उनके गंतव्य स्थान की से दूर उतारा। वहां से वह किसी अन्य वाहन के साथ गया, उसके बाद शूरवीर नेगी का फोन बंद मिला। इसके बाद परिवार वालों ने उसकी चचेरे भाई आदि को संपर्क किया और उसकी ढूंढ खोज की। गांव से उसके साडू भाई के अनुसार जब उनके परिजन थाने में गुमशुदा की शिकायत दर्ज करने जा रहे थे तो पुलिस वालों ने तस्वीर दिखाई जिसे परिजनों ने पहचान लिया। उसके बाद उनके शव को चिकित्सालय में ले जाया गया तथा उसके बाद उनके परिजनों आदि ने उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। शूरवीर सिंह नेगी के दोनों बेटे दिल्ली में थे। उनका शोकाकुल परिवार इस स्थिति में नहीं है कि वह अपने बाप की मौत के गुनाहगारों को दंडित करा पाये व इसकी जांच के लिए पुलिस पर दबाव बना पाये। न ही उनका परिवार प्रदेश सरकार से सहायता की याचना ही करने में सक्षम है। परिवार को कमजोर देखकर पुलिस प्रशासन ने भी शूरवीर सिंह नेगी के हत्यारों को पकड़ने के लिए शायद ही कोई कदम उठाए हो।

इसी हफ्ते देहरादून में जब मैं, राजेंद्र शाह मनमोहन, अनिल पंत, रविंद्र चौहान आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के संदर्भ में मुख्यमंत्री धामी से मिलने के बाद हमें राजपुर रोड पर शूरवीर सिंह नेगी मिले।वे बहुत खुश हुये कि अब तो उनका आंदोलनकारी के रूप में चिन्हीकरण हो जाएगा। शूरवीर सिंह नेगी इसके लिए बेहद चिंतित रहते थे, इसलिए वे हर दिन फोन करके इस कार्य की प्रगति की जानकारी लेते रहते। परंतु दुर्भाग्य है उत्तराखंड का एक राज्य आंदोलनकारी सरकार की दर पर अपनी सुध लेने की फरियाद करते करते इस दुनिया से चल बसा।

उत्तराखंड राज्य के मुखिया के रूप में आपका दायित्व है कि जिस व्यक्ति ने राज्य गठन के लिए अपने जीवन लगा दिया हो उसके निधन पर उसके अनाथ परिवार की सुध लें। हम सब राज्य गठन आंदोलनकारी आप से यही अपेक्षा करते हैं।
इसी आशा और विश्वास के साथ यह पत्र आपको प्रेषित कर रहा हूं।
आपका
देव सिंह रावत
अध्यक्ष उत्तराखंड जनता संघर्ष मोर्चा

संयोजक उत्तराखंड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति दिल्ली।

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