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उतराखण्ड की राजधानी गैरसैंण बनाने हेतु व शीतकालीन_सत्र #गैरसैंण_विधानसभा में #संचालित ना करने वाले #मुख्यमंत्री_त्रिवेंद्र के खिलाफ #प्रधानमंत्री मोदी को दिया ज्ञापन

#उत्तराखंड का #शीतकालीन_सत्र #गैरसैंण_विधानसभा में #संचालित ना करने की #हठधर्मिता करने वाले उत्तराखंड के #मुख्यमंत्री_त्रिवेंद्र_रावत के #अलोकतांत्रिक कृत्य के खिलाफ #प्रधानमंत्री_नरेंद्र_मोदी को आँदोलनकारियों ने दिया 4 दिसंबर को #ज्ञापन

सेवा में
श्रीमान नरेन्द्र मोदी 04 दिसम्बर 2019
प्रधानमंत्री भारत
नई दिल्ली-110001

विषय- प्रधानमंत्री मोदी जी उतराखण्डियों से अच्छे दिन लाने का वादा निभाओं,उतराखण्ड की राजधानी गैरसैंण बनाओं!

उत्तराखण्ड राज्य गठन की  जनांकांक्षाओं,लोकशाही,चहंुमुखी विकास व देश की सुरक्षा के प्रतीक ‘गैरसैंण’को अविलम्ब उत्तराखण्ड की राजधानी बनायी जाय

उतराखण्ड की जनांकांक्षाओं व आपके वादे को रौंदने वाले उतराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट पर लगायें अंकुश

मान्यवर प्रधानमंत्री मोदी जी
जय हिंद! जय उत्तराखण्ड!
आज 4 दिसम्बर 2019 को उतराखण्ड की राज्य की विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ। परन्तु उतराखण्ड की सवा करोड़ जनता (जिसने कांग्रेस द्वारा छले जाने से आहत होकर आपके अच्छे दिन लाने के वादे पर विश्वास करके 2014,2017 व 2019 के चुनाव में भाजपा को उतराखण्ड सहित पूरे देश में भारी बहुमत से सत्तासीन करने में योगदान दिया था,) आज उतराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत व प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अजय भट्ट द्वारा जनभावनाओं का घोर अपमान करके प्रदेश गठन के बाद निर्मित एक मात्र विधानसभा भवन गैरसैंण में शीतकालीन सत्र न कराकर देहरादून में ही बलात विधानसभा सत्र का आयोजन कर रहे है। जबकि प्रदेश की जनता व राज्य गठन के आंदोलनकारियों की एक सूत्री मांग है कि प्रदेश का हर सत्र करोड़ों रूपये की लागत से बने एशिया का पर्वतीय क्षेत्र में सबसे सुन्दर बने विधानसभा भवन में ही संचालित हो। 13 जिलों के उतराखण्ड में से 9 जिलों का वातावरण गैरसैंण की तरह ही है। परन्तु पंचतारा सुविधाओं में डूबे प्रदेश के नौकरशाहों की तरह ही प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत अपने पूर्व मुख्यमंत्रियों का अंधानुशरण करके दुराग्रहएनिहित स्वार्थ व सत्तामद में चूर हो कर प्रदेश की जनांकांक्षाओं की राजधानी गैरसैंण को नापसंद करते है। इसी लिए वे उतराखण्ड राज्य गठन की जनांकांक्षाओं का प्रतीक राजधानी गैरसैंण में ठण्ड का बहाना बना कर देहरादून में शीतकालीन सत्र आयोजित कर रहे है।
आपको विदित ही है कि 9 नवम्बर 2000 में राजग की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा गठित उत्तराखण्ड राज्य के गठित 19 सालों में प्रदेश की सरकारों ने राज्य गठन जनांदोलन की जनांकांक्षाओं को साकार करने के बजाय उसको निर्ममता से रौंदने का ही कृत्य किया। सबसे शर्मनाक बात यह है कि लोकतंत्र में जनता की सर्वसम्मत मांग ‘ राजधानी गैरसैंण’ को बलात नजरांदाज करके बलात देहरादून में राजधानी थोपी गयी। जबकि हकीकत यह है
(1)-प्रदेश में एक मात्र, विधानसभा भवन गैरसैंण के भराड़ी सैण में बना हुआ है।
(2)- गैरसैंण विधानसभा भवन में विधानसभा का शीतकालीन सत्र 2017 में सम्पन्न हो चूका है। गैरसैंण में ही विधानसभा का ग्रीष्मकालीन सत्र भी सम्पन्न हो चूका है।
(3) हरीश रावत सरकार के समय गैरसैंण में आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में तत्कालीन भाजपा के नेता प्रतिपक्ष मदन कोशिक (हरिद्वार के विधायक व वर्तमान सरकार में कबीना मंत्री)ने सदन में गैरसैंण को प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाने का विधेयक भी पेश किया।
(4) प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी कर्णप्रयाग विधानसभा चुनाव में ऐलान किया था कि अगर भाजपा विजयी होगी तो गैरसैंण में राजधानी बनायी जायेगी।
(5) 2019 में राज्य स्थापना दिवस के दिन 9 नवम्बर को प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष अग्रवाल (रिषिकेश के विधायक)ने गैरसैंण विधानसभा में ही विधानसभा सचिवालय में मनाया राज्य स्थापना दिवस। (6)-उत्तराखण्ड प्रदेश का बजट सत्र 2018 भी गैरसैंण में किया गया। (7) राज्य गठन जनांदोलन से पहले ही राज्य गठन आंदोलनकारियों ने सर्व सम्मति से प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाने को एकमत थी। (8)-उत्तराखण्ड राज्य व राजधानी गैरसैंण के लिए ही प्रदेश के सवा करोड़ जनता ने ऐतिहासिक जनांदोलन किया और शहादत दी। (9)-राज्य गठन के बाद, राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग को लेकर बाबा मोहन उत्तराखण्डी ने दी शहादत
(10)-राज्य गठन से पहले ही पूर्व उप्र सरकार द्वारा गठित रमां शंकर कौशिक आयोग द्वारा उत्तराखण्ड की राजधानी के लिएआंदोलनारियों, जनता व विशेषज्ञों से गहन चिंतन मंथन व निरीक्षण कर गैरसैंण को जनांकांक्षाओं को साकार करने वाली राजधानी घोषित की।
(11) -राज्य गठन के बाद जनभावनाओं, दीक्षित आयोग व हिमालयी राज्यों की तरह गैरसैंण बनाने के बजाय देहरादून में राजधानी बनाने के षडयंत्र के तहत ‘राजधानी चयन के लिए दीक्षित आयोग’ बनाया। इस आयोग ने जानबुझ कर करोड़ों रूपये बर्बाद कर दस साल तक इसे उलझाये रखा। परन्तु इस दीक्षित आयोग ने भी दो तिहाई से अधिक लोगों ने राजधानी के लिए गैरसैंण बनाने के लिए अपना मत दिया। (12)-आजादी के संग्राम में ‘पेशावर क्रांति ’ के महानायक चंद्रसिंह गढवाली ने गैरसैंण क्षेत्र में ही इस पर्वतीय क्षेत्र का आदर्श शहर बसाने का संकल्प लिया। (13) गैरसैंण उत्तराखण्ड प्रदेश के मध्य में स्थित है। (11) हिमालयी राज्यों की तरह हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड की राजधानी गैरसैंण पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है।

उतराखण्ड आदंोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति
देवसिंह रावत

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