Almora उत्तराखंड

हरीश रावत की काली चाय के भंवर में फंसे अंध विरोधी

72 साल की उम्र में भी हरीश रावत के अपने गांव से जुडे रहने व राजधानी गैरसैंण सहित उतराखण्ड के जनहित के मुद्दों पर ेप्रखरता से आंदोलन करने की सराहना करने के बजाय अंध विरोध कहीं उचित नहीं
 
दलीय बंधुआ मजदूर किस प्रकार से  बिना सोचे समझे व किसी चीज की सत्यता को जाने बिना कैसे तिल का ताड़ बना कर कैसे अंध विरोध इंटरनेटी दुनिया में करते हैं, इसका ताजा उदाहरण है हरीश रावत द्वारा अपने गांव में दोपहरी को अपने छत पर धूप सेकते समय काली चाय पीने की सामान्य बात को दलीय बंधुआ मजदूरों ने ऐसा कुप्रचार करते हुए कहा कि देखा कैसे कांग्रेसी दिग्गज है जो दिन दोहपरी खुले आम शराब पीते हुए अपना खुद विडियों इंटरनेटी दुनिया को संदेश दे रहे है। ये समाज को भ्रष्ट कर देंगे। कल सांय तक हजारों लोगों ने इस विडियों को देखा। क्या उतराखण्ड, दिल्ली से लेकर विदेशों में हजारों उतराखण्डियों ने हाथों हाथ इस विडियों को देखा। लोग हरीश रावत को लानत दे रहे थे।  उतराखण्ड मूल के हरीश रावत देश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हैं । वे उत्तराखंड के देश में छाने वाले पंत,बहुगुणा, तिवारी जी, मुरली मनोहर जोशी जैसे शीर्ष नेताओं में है जिनका अखिल भारतीय स्तरीय स्वीकारोक्ति है।
मैं कल सायंकाल देश में पहली बार गरीबों के लिए निशुल्क व आधुनिक स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराने का ऐतिहासिक काम करने वाले देश की अग्रणी समाजसेवी उद्यमी गजेंद्र रावत जी के साथ लंबे समय के बाद मुलाकात कर, देश के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर रहा था। तभी यकायक मेरे उतराखण्डी समाजसेवी मित्र और भाजपा के होनहार युवा नेता डा विनोद बछेती का फोन आया । जैसे ही मैंने हाॅजी कहा तो डा बछेती ने  कहा कि रावत जी क्या हो गया ?हरीश रावत का एक वीडियो चल रहा है ?यह क्या हो गया । मैंने सोचा कि शायद उमेश शर्मा द्वारा कोई स्टिंग किया गया हुआ वीडियो चल रहा होगा या किसी और स्टिंगबाज ने कोई वीडियो  जारीकर दिया होगा । तो मैंने कहा कोई बात नहीं ऐसे नहीं चलता रहता है । इस पर डा बछेेती ने कहा कि यह वीडियो खुद रावत जी ने डाला हुआ है और इसकी सच्चाई क्या है ? उसके बाद मैं देश में मोदी राज में उनके कार्यो व उद्योग जगत में आयी मंदी की चर्चाओं पर बातचीत में व्यस्त हो गये। शायद छहः आठ माह बाद मैं, गजेन्द्र रावत जी से मिला। उनके दो बार संदेश आ गये थे कि लम्बे समय से आप मिले नहीं। कल मैने प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपने अपनी पदयात्रा के आंदोलन के बाद प्रेस क्लब जाने के बजाय सीधे गजेन्द्र रावत जी से मिलने उनके कार्यालय भीकाजी कामा प्लेस में गया।
इस मुलाकात के बाद मैं सायंकाल 7.00 बजे के करीब वहां से बस पकड कर अपने कार्यालय पर पहुंचा । बस में मैंने फेसबुक पर एक नजर डाली, तो मेरी फेसबुक के पेज  पर मेरे एक फेसबुक के मित्र ने हरीश रावत की एक तस्वीर को पोस्ट किया था जिसमें लिखा था महान कांग्रेसी नेता हरीश रावत । इस विडियों पर एक नजर डाला तो हरीश रावत के हाथ में एक गिलास था । तो मुझे समझने में देर नहीं लगी मजारा क्या है । मुझे हंसी आई कि हरीश रावत की काली चाय के भंवर में फंस गई उनके घोर विरोधी। देर रात मुझे अपने मित्र संजय नौडियाल का भी फोन आया। मैने कहा भई लोग काली चाय को दारू समझ कर प्रचार कर रहे है। आज सुबह राजधानी गैरसैंण के लिए देहरादून से गैरसैंण आंदोलन में सम्मलित होने जा रहे उतराखण्ड के तेजतरार नेता रघुवीर बिष्ट ने भी इस बात पर हैरानी प्रकट की कि दलीय बंधुआअ मजदूर कैसे तिल का ताड़ बना कर किसी की चरित्र हनन करने में तुले है।
मुझे आश्चर्य होता है कि जो विरोधी हरीश रावत की हंसी उड़ा रहे हैं, रातों-रात उनकी इस चाय की वीडियो को बिना सत्यता को जाने ही अंध विरोध कर उसे हजारों हजार तक पहुंचा रहे थे। इसे  वायरल कर रहे थे ।उन पर मुझे हंसी आती। इनको इतनी हिम्मत नहीं रही कि वे उतराखण्ड की जनाकांक्षाओं को  पतन के गर्त में धकेल रहे  त्रिवेन्द्र रावत की गैरसैंण पर ठण्ड का ऐसा विरोध नहीं किया। उन्होंने त्रिवेंद्र रावत का उत्तराखंड की परचून की दुकानों में शराब बीच में का इतना विरोध नहींे किया । उन्होंने कभी गैरसैंण में ठंड के कारण गैरसैंण का अधिवेशन को रद्द करने पर हाय तौबा नहीं मचाया। सबसे हैरानी की बात की है कि जो हरीश रावत हर दूसरे तीसरे महीने अपने गांव जाते हैं उत्तराखंड के शायद ही कोई ऐसा नेता होगा जो हर दूसरे तीसरे महीने अपने गांव जाता होगा। पलायन से उजड रहे ेउतराखण्ड को आबाद करने के लिए लोगों को अपने गांव में जुडे रहने की हरीश रावत की यह मुहिम सराहनीय व अनुकरणीय है। हरीश रावत सर्द मौसम में अपने गांव भी वहां से होते हुए उस गैरसैंण जा रहे है जिस गैरसेंण में जाने से  उनसे बहुत छोटी उम्र में त्रिवेंद्र रावत और प्रदेश के अन्य विधायक ठंड के मारे भयभीत है। वे । गैरसैंण में विधानसभा का शीतकालीन सत्र नहीं कर रहे इसलिए हरीश रावत अपने गांव होते हुए गैरसेंण गये, उनकी इस बात का समर्थन करने के बजाय उनका अंध विरोध करना।  वह भी चाय के गिलास हरीश रावत से लेकर।  आज तक में देश की तमाम जिन नेताओं से मिला है उनमें मैंने हरीश रावत को इतना सुलझा नेता देखा जो अपने बोल चाल  से लेकर पहनने से लेकर तमाम बातों में काफी सावधानी बरतें है। इसलिए उनसे यह आशा करना कि वह सार्वजनिक रूप से मद्यपान करेंगे यह नितांत नासमझी ही होगी।
हरीश रावत ने अपने कार्यकाल में गैरसैंण राजधानी की घोषणा नहीं की इस बात को लेकर मैंने उन्हें कई बार सत्ता में रहते हुए और उसके बाद भी विवाद हुआ। मेरी उनसे हमेशा ही मांग रहती थी कि राजधानी गैरसैण घोषित करो और मुजफ्फरनगर कांड के अभियुक्तों को सजा दे । इस बात का मैंने प्रचंड विरोध तक उनका किया । परंतु वह यही कहते चुनाव का समय ? शायद वह अपनी भूल को समझते हैं ।इसीलिए वह प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं में हैं जो गैरसैंण राजधानी  के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहे है। पार्टी को दरकिनार करते हुए मजबूती से अपने दम पर इस मुद्दे को उठा रहे हैं । इसलिए मैं उनकी सराहना करता हूं अपने कार्यकाल में उन्होंने भले ही घोषणा न की हो । लेकिन राजधानी बनाने के लिए विधानसभा भवन से लेकर, वहां के आसपास सड़कों की जाल से लेकर ,वहां की क्षेत्र की जमीनों पर खरीद पर प्रतिबंध लगाने का काम हरीश रावत ने किया । गैरसैंण  मुद्दे पर उनकी मंशा अब साफ हो गई और वह जनता में खुल के इस बात करते है। पर उनकी इस बात की सराहना करनी चाहिए।  भूल हर इंसान से होती है, अगर उस भूल को सुधारने का काम करता है तो उसको ढंग से स्वीकार करना होता है । अंध विरोध से ना देश का भला होता ना प्रदेश का भला होता है । ना समाज का भला होता है व नहीं उस व्यक्ति का भला होता है जो अन्ध विरोध करने वाले व्यक्ति का होता है । हरीश रावत में कई कमियां हो सकती है ।वे भी हमारी तरह इंसान ।परंतु प्रदेश के वे सबसे सुलझी हुए एकमात्र राजनेता है जो प्रदेश के हक हकूकों के बारे में आवाज उठा कर जनता को जागृत करते। उस मुद्दे को जीवन बनाते हैं । ऐसे मामले में एक समर्पित नागरिक के तौर पर सही चीज का साथ देना और गलत का विरोध करने से अपने नागरिक धर्म का पालन करने की जगह अंध विरोध करना किसी अर्थ में उचित नहीं है। अगर भूल सुधार कर सही राह चलने वाले व्यक्ति को जनता समर्थन नहीं देती है तो वह व्यक्ति भी सही कार्य करना छोड कर अन्य की तरह तिकडम करने में जुट जाता है।
मैं इस बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता । एक पत्रकार के रूप में व उतराखण्ड की जनांाकाक्षाओं के आंदोलन के एक सिपाई के कारण मेरी प्रायः उत्तराखंड के तमाम नेताओं से मुलाकातें होती रहती है। इसी क्रम में हरीश रावत से भी अनैक मुलाकात हुई। इससे ही मुझे इस का भान था कि हरीश रावत काली चाय पीते हैं और एक नहीं दर्जनों बार मैंने उनको काली चाय पीते देखा है।  जब पहली बार मैंने देखा हरीश रावत को काली चाय पीते और पिलाते । उस समय जब मुझे भी काली चाय परोसी गयी थी। (उस समय मैं चाय पीता था ) कई वर्ष पहले की बात है तब  मैंने रावत जी से कहा रावत जी यह आपने दूध बचाने का अभियान कब से छेड़ा हुआ है?  हरीश रावत हंसे और उनके करीबी सलाहकार हरपाल रावत ने मुझे काली चाय के बारे में बताया कि इसके क्या क्या गुण होता है इसके साथ यह भी बताया गया कि विदेश में लोकशाही काली पीते हैं दूध वाली चाय भी अधिकांश नहीं पीते।
वैसे इस प्रसंग से मुझे अपने मित्र अवतार नेगी, अनिल पंत, जीना, मोहन जोशी, राजेंद्र रतूड़ी सहित कई मित्रों की याद आती है कि जब वे  मुझे नींबू चाय पीते हुए यह ठिठोली करते हैं कि देखो हम फेसबुक में यह फोटो चला देंगे । लोग समझ जाएंगे कि देव सिंह रावत जी अब शराब पीने लगे । मैं हंसते हुए कहता हॅू कि  मुझे दुनिया के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है और ना मुझे उनसे वोट लेना है ना नोट लेना । मैं किसी जनमत का आकांक्षी भी नहीं हॅू। मैं जो हूं मैं वही हूं मैं कई वर्षों से चाय नहीं पीता हूं हां कभी कभार नींबू चाय। स्वास्थ्य लाभ के लिए यह हरी चाय अवश्य लेता हूं।
मेरे विचारों व खबरों से मेरे कई मित्र प्राय यह कहते रहते हैं आप संघ के हो, कोई कहता है आप वामपंथी हो? कोई कहता है आप कांग्रेसी हो? कोई कुछ । मैंने कहा मैं किसी का नहीं हूॅ। मैं किसी का पक्षधर नहीं हॅू। मैं पक्षधर हूॅ धर्म का, मैं सत्य के साथ हूं ,मैं न्याय के साथ हॅॅू। मैं किसी का पक्षधर और किसी का अंध विरोधी भी नहीं हूं । जो सत्य है । असत्य, अन्याय व जनहित के खिलाफ का मै सदा विरोधी हॅू। सत, न्याय व जनहित का मैं समर्थक हॅू। इसके लिए मैं अपना पराया, मित्र या शत्रु व लाभ हानि के तराजू में नहीं तोलता। यह मेरी आदत में शुमार । इसी कारण लोग जो अज्ञानता, स्वार्थ और दलीय बंधनों में बंधे रहते हैंे वे मुझे  अपने विरोधी की पक्षधर बता कर आरोपित करते हैं ।मैं उनकी बात पर हंस देता हॅू। यही सीख मुझे मेरे श्रीकृष्ण ने मुझे सिखाई है। यही मेरा जीवन दर्शन है।
मेरे तमाम साथी भी मेरी इसी प्रवृति के कारण दिल से मेरे विरोधी है ।पर प्रभु श्रीकृष्ण की अपार कृपा मान कर इसे स्वीकार करता हूं।

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