Dehradun उत्तराखंड

14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया मृत्युंजय मिश्रा

देहरादून (प्याउ)। 3 दिसम्बर को गिरफ्तार किये गये उत्तराखंड आयुर्वेद विविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डा. मृत्युंजय मिश्रा को  उनके कार्यकाल के दौरान हुए करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार के मामले में 4 दिसम्बर को देहरादून की विशेष सतर्कता कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में सुद्धोवाला जेल भेज दिया गया। वहीं विशेष सतर्कता पुलिस दल को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के बेंकों में उनके परिजनों के नाम के खातों में मोटी रकमें जमा होने की भनक लगी है।
गौरतलब है कि आखिरकार उतराखण्ड की त्रिवेन्द्र सरकार ने राज्य गठन की अब तक की तमाम सरकारों को नचाने व चंद सालों में ही अध्यापक से कुल सचिव व अपर स्थानिक आयुक्त के पद पर अचम्भित पद्दोन्नति लेने वाले उतराखण्ड के विवादों में छाये रहने वाले अधिकारी मृत्युंजय  मिश्रा को 3 दिसम्बर की सांयकाल देहरादून के ईसी रोड स्थित काफी शाॅप से गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद उसके आवास आदि परिसरों में छानबीन की  गयी। पुलिस ने मिश्रा व अन्य के खिलाफ 17 नवंबर को ही गुपचुप तरीके से भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षडयंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 व 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।  इसी मामले में प्रशासन से गिरफ्तारी की इजाजत मिलने पर मृत्युंजय मिश्रा की गिरफ्तारी की गयी।  पर लोग आशंकित है कि उमेश शर्मा की तरह कहीं मृत्युंजय शर्मा की गिरफ्तारी बे असर साबित न हो। मृत्युंजय मिश्रा भी कहीं ंकुछ ही दिनों में जेल से बाहर आ जायेगा! देखना यह है कि प्रशासन के आरोप न्यायालय में कहां तक साकार होते हैं? परन्तु मृत्युंजय मिश्रा की गिरफ्तारी से उमेश शर्मा भी जरूर आशंकित होगा कि कहीं सरकार मृत्युंजय मिश्रा को उसके खिलाफ हथियार न बना दे। यही नहीं मृत्युंजय को संरक्षण देने वाले नेताओं में भी मचा हडकंप।

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