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बलिदानियों को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए 13 दिन से शहीदी पार्क में चल रहा अनशन समाप्त

सरकार, राजनेतिक दलों व समाचार जगत द्वारा की गयी उपेक्षा की कडी भत्र्सना

 

सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमजारा व सुखदेवसिंह ढीढसा ने लिखित आश्वासन देने के बाद जूस पिला कर तुडाया अनशन

नई दिल्ली (प्याउ)। देश को आजाद कराने वाले भारत माता के महान सपुत्रों को राष्ट्रीय शहीद का दर्जा दिलाने के लिए 23 मार्च 2018 से शहीद भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव   की स्मृति स्थल’ शहीदी पार्क’ दिल्ली में चण्डीगढ से आये वरिष्ठ नागरिक  व पत्रकार तरसेम लाल शर्मा , चण्डीगढ के परस राम कल्याण व पंजाब के लुघियाना स्थित देव सराभा के सराभा गांव से आये बलदेव सिंह द्वारा अनिश्चित कालीन अनशन को 13वें दिन पंजाब के सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमजारा व सुखदेवसिंह ढीढसा द्वारा इस मांग को पुरजोर ढंग से उठाने के लिखित आश्वासन देने पर जूस पी कर समाप्त किया। इस अवसर पर दोनों सांसदों ने शहीदी पार्क में अनशन कर रहे अनशनकारियों व उनका साथ दे रहे आंदोलनकारियों को संबोधित किया।
इस अवसर पर  बलिदानियों को शहीद का दर्जा देने के लिए चल रहे अनशन के समर्थन में चण्डीगढ़ से राजेश शर्मा, राजेन्द्र शर्मा,  अधिवक्ता बृजेश शर्मा, अवतार सिंह,  मदन शर्मा व संजीव शर्मा, कानपुर के युवा रवि कुमार गुप्ता, उनकी पत्नी, दिल्ली की अग्रणी समाजसेविका/पहली महिला आटो चालिका सुनीता चैधरी दिन रात उनका समर्थन देने के लिए धरना स्थल पर उपस्थित थे। इसके साथ 4 अप्रेल को अनशनकारियों के समर्थन में फरूखाबाद से क्रांतिकारी परिवार से आये बोबी, अरविंद शुक्ला  व रीतेश शुक्ल ने में एक दिन का अनशन रखा हुआ था। अनशन के समापन पर भारतीय भाषा आंदोलन के अध्यक्ष देवसिंह रावत, डा सुरेश, हरपाल सिंह राणा, राजीव खोसला, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य, रामेश अग्रवाल, सुदर्शन टंडन, पत्रकार मनोज कुमार,महेंद्र गुप्ता, व्यवस्था परिवर्तन के डा रमाइंद्र भी उपस्थित थे।
इस प्रकरण पर भारतीय भाषा आंदोलन के अध्यक्ष देवसिंह रावत जो कई बार अनशनकारियों को समर्थन करने शहीदी पार्क पंहुचे ने इस ऐतिहासिक अनशन के देश व दिल्ली की सरकार के साथ राजनैतिक दलों के उदासीन रवैयों को शहीदों व देश के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वाला कृत्य बताया।
वहीं अनशनकारियों की उपेक्षा करने पर आहत देशभक्तों ने अनशनकारियों से अनशन समाप्त कर इस मामले में देशव्यापी संघर्ष करने का संकल्प लेने के बाद अनशनकारी अनशन तोड़ने के लिए तैयार हुए।
दिल्ली व पंजाब  सरकार, राजनैतिक दलों, समाचार जगत व सामाजिक संगठनों के घोर उपेक्षापूर्ण रवैये से अनशनकारी क्षुब्ध दिखे। भारतीय भाषा आंदोलन के अध्यक्ष देवसिंह रावत ने प्रधानमंत्री मोदी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, खबरिया चैनलोंध्समाचार जगत व सामाजिक संगठनों के देश के शहीदों के सम्मान के प्रति शर्मनाक उपेक्षा की कडी भत्र्सना करते हुए उनको देश के प्रति उनके दायित्व का स्मरण दिलाया।
गौरतलब है कि भारतीय भाषा आंदोलन ने 23 मार्च को ही शहीदी स्थल अमर शहीद भगतसिंह, राजगुरू व सुखदेव की स्मृति को नमन् करने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में जा कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन देकर देश की आजादी के लिए अपना बलिदान देने वाले माॅ भारती के महान सपूतों को शहीद का दर्जा देने की पुरजोर मांग की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री को दिये ज्ञापन में भारतीय भाषा आंदोलन ने देश की आजादी को अंग्रेजी की गुलामी से मुक्त करने की भी मांग की। श्री रावत के अनुसार देश के अमर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपनी शहादत दी। परन्तु अंग्रेजों के भारत से जाने के 71 साल बाद भी देश के हुक्मरानों ने विकास व ज्ञान विज्ञान के नाम पर अंग्रेजी थोपकर देश को अंग्रेजों की भाषा अंग्रेजी का गुलाम बनाया हुआ है। जबकि हकीकत यह है दुनिया में रूस, जर्मन, चीन, फ्रास, इटली, टर्की, इजराइल, कोरिया व जापान सहित सभी विकसित व स्वाभिमानी देश अपने अपने देश की भाषा में विकास का परचम पूरे विश्व में लहरा रहे है। परन्तु देश के हुक्मरानों ने शर्मनाक ढंग से देश को अंग्रेजों की भाषा अंग्रेजी का गुलाम बनाया हुआ है। भारतीय भाषाओं को शिक्षा, रोजगार, न्याय, सम्मान व शासन प्रशासन से दूर रखने का षडयंत्र किया गया है।
भारतीय भाषा आंदोलन के अध्यक्ष देवसिंह रावत ने कहा कि संसार के किसी भी स्वाभिमानी व विकसित देश अपने शहीदों का सम्मान करते है और अपनी ही भाषा में शिक्षा, रोजगार, न्याय, सम्मान व शासन प्रदान करते है। परन्तु भारत में शहीदों को आतंकी कहना और विदेशी भाषा का गुलाम बनाये रखने का शर्मनाक देशद्रोह सरकारें ही कर रही है।
23 मार्च से अनशनकारियों के समर्थन में क्रमिक अनशन करने वाले चण्डीगढ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ब्रजेश शर्मा, लुधियाना के निवासी कृष्ण कुमार, चण्डीगढ के अवतार सिंह कैडे, लुधियाना के एएफसीओ मनजीत सिंह व कानपुर के  रवि कुमार गुप्ता भी शहीदी पार्क में डटे हुए है।
वहीं 23 मार्च को शहीदी पार्क में देश के विख्यात आंदोलनकारी अण्णा हजारे, देश में शीर्ष नाट्य मंच के प्रमुख अरविंद गौड सहित अनैक आंदोलनकारियों ने शहीदों के सम्मान में अनशन करने वाले आंदोलनकारियों को अपना समर्थन दिया।
इस अवसर पर अनशनकारियों ने देशवासियों से इस आंदोलन को जनांदोलन बनाने में सहयोग देने का आवाहन किया। मोहाली के नया गांव के निवासी अनशनकारी तरसेम लाल शर्मा ने कहा कि देश को आजाद करवाने वाले भारत माता के महान सपूतों भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव,ऊधम सिंह, करतार सिंह सराभा, चंद्रशेखर आजाद सहित सभी बलिदानी क्रांतिकारियों को आज 71 साल बाद भी देश की सरकार इनको शहीद मानने के लिए तैयार नहीं है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि इन क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने शासन के रिकार्ड में आतंकबादी लिखा है। वहीं आज भी सरकार ढो रही है। जबकि अंग्रेजों के जाने के बाद सरकारों ने बलिदानियों को शहीद लिखने की जरूरत तक नहीं की।

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