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प्लास्टिक के चांवल व अण्डे की खबरों से जनता परेशान, कुम्भकर्णीे नींद में सोयी सरकार

अंतर पहचाने असली व प्लास्टिक के चावल
देहरादून (प्याउ)। इन दिनो इंटरनेटी दुनिया व  खबरों में प्लास्टिक के चांवल व अंड्डों की खबरों से आम जनता परेशान है। पिछले दिनों खबर में  हल्द्वानी में प्लास्टिक के चांवल का मामला उछला था। ऐसी ही खबरें देश के विभिन्न हिस्सों से भी सुनने में आ रहा है। इंटरनेटी दुनिया में तो इस पर निरंतर बहस ही चल रही है। लोग हैरान है कि लोग दो पैसे के चक्कर में आम जनता के स्वास्थ्य के साथ क्यों खिलवाड कर रहे है।
ऐसी ही खबरें दक्षिण के राज्य तेलांगना व आंध्र से भी आयी। वहां पर एक व्यक्ति ने इसकी शिकायत भी दर्ज करायी। परन्तु सरकारी विभाग कुम्भकर्णी नींद सौ रहा है। सरकारी तंत्र के पास इस शिकायतों की तुरंत जांच कराने का तंत्र तक नहीं है। वही पंचवर्षीय योजना की तरह कछुअे की गति से जांच की जा रही है। कब इसकी रिपोर्ट आयेगी, तब तक लोगों के स्वास्थ्य के साथ कितना खिलवाड हो जायेगा।  हालांकि आम लोगों को इस नकली प्लास्टिक के चांवल में अंतर करने में परेशानी महसूस होती है। जनहित में जारी इंटरनेटी दुनिया में लोगों को प्लास्टिक व आम चांवल में अंतर करने के कई तरीके बताये गये। इनमें पहला सरल तरीका यह है कि गर्म तवे में चांवल के कुछ दानों को रखें। असली चांवल कडक होगा और प्लास्टिक का चांवल जो होगा वह पिघल जायेगा। दूसरी पहचान है कि प्लास्टिक के चावल से खुशबू नहीं आएगी जबकि प्लास्टिक के चांवल को पकाने के बाद उससे प्लास्टिक की महक आयेगी। असली चांवल पक कर आसानी से दब जायेगा परन्तु प्लास्टिक का चांवल पकने के बाबजूद भी पक्का ही रहेगा। असली चांवल टूट जाता है पर प्लास्टिक का चांवल टूटता नहीं।
इन सब पहचान के बाबजूद आम ग्राहक ठगा जा सकता है। अंग्रेजी दैनिक टाइम्स आफ इंडिया के अनुसार 6 जून को तेलंगाना में मीरपेट के एक शख्स ने किराने की दुकान पर प्लास्टिक के चावल मिलने की शिकायत पुलिस से की थी. आपको याद दिला दें कि उससे दो दिन पहले हैदराबाद के सरूरनगर में एक कस्टमर ने बिरयानी पाइंट पर प्लास्टिक के चावल इस्तेमाल होने का दावा किया था।
शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सिविल सप्लाइज डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने मीरपेट की दुकान पर छापा मारा और चावल के सैंपल जब्त कर उसे जांच के लिए लैब भेज दिया। समाचार पत्र के अनुसार मीरपेट पुलिस ने बताया कि नंदनवनम कॉलोनी के निवासी अशोक ने शिकायत दर्ज कर बताया था कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें और उनके परिवार वालों को पेट के साथ-साथ हाथ और पैरों में दर्द की शिकायत रह रही है. उनके मुताबिक रात जब वे काम से वापस घर लौटे तो उन्होंने देखा कि खाने के लिए उनकी पत्नी ने जो चावल उन्हें परोसा है वह खाने लायक नहीं था और मसला हुआ सा लग रहा था।
प्रदेश के चांवल व्यापारी इन खबरों को सिरे से नकार रहे हैं परन्तु लोगों को आशंका है। यह केवल आंध्र, तेलांगना या उत्तराखण्ड का मामला नहीं है। उत्तराखण्ड जैसे देश के सीमान्त व दूरस्थ राज्यों में पहले ही मुनाफाखोरी के लिए असामाजिक तत्व घटिया से घटिया सामान लोगों को परोसते है। वहां पर सरकारी तंत्र वस्तुओं की गुणवता की जांच करने के अपने दायित्व को कहीं दूर दूर तक निभाने के लिए तैयार नहीं है।  ऐसी खबरें पूरे देश से आ रही है। सरकार को चाहिए कि इस प्रकार की शिकायत के निराकरण के लिए एक त्वरित जांच तंत्र स्थापित किया जाय। इस प्रकार की गतिविधियों में कोई लगे हैं तो उन पर अंकुश लगाया जाय। ऐसी आशंका है कि चीन से इस प्रकार की सामाग्री लालची लोगों के द्वारा देश में गुपचुप से किया जा रहा है। इन दुनिया में प्लास्टिक चांवल का मामला  सबसे पहले चीन में प्रकाश में आया, उसके बाद ताइवान व भारत में भी यह मामला उछला। इसके पीछे चीन का ही षडयंत्र माना जा रहा है। चीन दो टके के लिए दुनिया के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहा है। पूरे विश्व व्यापार को अपने शिकंजे में लेकर चीन इस प्रकार की घटिया हरकते करने से कभी बाज नहीं आता है। जरूरत है विश्व स्तर पर चीन की ऐसी मानव विरोधी हरकतों पर अंकुश लगाने की।
सुत्रों के अनुसार चीन दस प्रकार के नकली खाद्य पदार्थो का उत्पादन कर दुनिया से स्वास्थ्य से खिलवाड कर रहा है। प्लास्टिक के चांवल, प्लास्टिक के अंडे, सीमेंट भरे अखरोट, हरी मटर, सूअर का मांस गौमांस के रूप में बेचना, बच्चों के पौष्टिक, नकली टेबल नमक, किचड को काली मिर्च बता कर बेचना, नकली आलू के मीठे नूडल्स, नकली जीसेंग, नकली शहद, बकरी का मांस में लौमडी व चुहे का मांस मिलाकर, स्वास्थ्य के लिए खतरनाक सोया दही, बतख के खून, पर इसमें सूअर व भैस का खून मिला कर बेचना, स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पतला होने की दवाई से पाले गये सूअर का पतला मांस व पतला पार्क इत्यादि बेच कर चीन दुनिया के स्वास्थ्य से खिलवाड करने में लगा है। चीन की तरह भारत जैसे भ्रष्ट देशों में सरकारी तंत्र की निगरानी ही इस भ्रष्टाचार को खौपनाक बना रही है। खासकर भारत में सरकार व शासन किसी को भी देश की आम जनता के स्वास्थ्य से हो रहे खिलवाड़ से कोई लेना देना नहीं है। जब तक कोई बडी त्रासदी घटित नहीं होती इनकी कान में जूं तक नहीं रेंगेगी।
भारत में सबसे खौपनाक है कि अगर कोई जागरूक संगठन या व्यक्ति ऐसे तत्वों को जो चीन की इन घटिया सामान को मात्र दो टके के लालच में बेच रहे है उनकी धरपकड भी करे या गैरकानून कार्य में लगे व्यक्तियों को रोके तो यहां का लचर तंत्र व शासन उल्टा उस जागरूक व्यक्ति पर ही कानून अपने हाथ में लेने का मामला बना देगी। अगर प्रशासन को इनकी शिकायत करे तो यह तंत्र उसका मामला रफा दफा करके उसको पाक साफ होने के प्रमाणपत्र के साथ शिकायत कर्ता को ही प्रताडित करते है।

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