दुनिया

अमेरिका व विश्व शांति के लिए अफगानिस्तान की तरह सीरिया से भी हटे अमेरिका

इस्लामी आतंक का सफाया करने के बजाय सीरिया पर हमला करने से नहीं होगा अमेरिका व विश्व का भला

देवसिंह रावत

दुनिया से इस्लामी आतंक का सफाया करने के नाम पर अमेरिका में सत्तासीन हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डाॅनाल्ड ट्रंप ने जिस प्रकार  रसायनिक हथियारों के दुरप्रयोग का आरोप सीरिया पर लगाते हुए उस पर हमला किया। उससे अमेरिकी ही नहीं पूरा विश्व स्तब्ध हो कर, इसे ट्रंप का पूर्ववर्ती अमेरिकी सरकार की तरह ही इराक पर बलात हमला करने की भूल मान रहे हैं। अमेरिका के आम नागरिक ही नहीं विश्व के सामरिक विशेषज्ञों का एक मत है कि अमेरिका को अपने देश व विश्व के हित को देख कर अफगानिस्तान की तरह सीरिया से भी दूर हट जाना चाहिए।
हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रपति चुनाव के समय ट्रंप ने कहा था कि वह सीरिया में रूस के साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त मोर्चा बनाने के पक्षधर हैं। परन्तु लगता है कि ट्रंप सत्तासीन होने के कई महीने बाद भी इस्लामी आतंकियों का सफाया करने में मिली नाकामयाबी को छूपाने के लिए सीरिया को बलि का बकरा बना कर उसको रसायनिक हथियारों का दुरप्रयोग का आरोपी बता कर हमला कर रहे हैं। सीरिया के होम्स प्रांत के गर्वनर ने दावा किया है कि अमेरिकी हमले के कारण 7 लोग मारे गए हैं, जिनमें 4 बच्चे भी शामिल हैं।
उधर सीरिया पर किये गये अमेरिकी हमले के बाद विश्व की दूसरी महाशक्ति रूस व अमेरिका आमने सामने टकराव के लिए खडे है। अमेरिकी हमले से आक्रोशित रूसी प्रधानमंत्री दिमित्री मिदवेदेव ने अमेरिका को चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा किए गए इस हमले के कारण मॉस्को और वॉशिंगटन के बीच सैन्य टकराव केवल एक इंच दूर रह गया है।रूसी प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने यह दिखाया है कि इस्लामिक स्टेट जैसे दुश्मन के खिलाफ मिलकर लड़ने की जगह वह कानूनी तौर पर वैध सीरिया की असद सरकार से जंग लड़ने में ज्यादा दिलचस्पी रखता है।

अमेरिका सीरिया पर मिसाइल हमले से नाखुश रूस ने अमेरिका के साथ अपना हॉटलाइन संपर्क भी काट दिया है। इस हॉटलाइन का इस्तेमाल करके ही रूस और अमेरिका सीरिया में सीधी भिड़ंत से बचने के लिए अपनी-अपनी सैन्य कार्रवाई के बारे में एक-दूसरे को सूचित करते रहे हैं।
खबरों के अनुसार  अमेरिकी धमकी से निपटने के लिए रूस ने क्रूज मिसाइल्स से लैस अपने लड़ाकू जहाजों को काला सागर से लाकर सीरिया के बंदरगाह पर तैनात करने का आदेश जारी किया है। इसके अलावा पुतिन ने सीरिया में पहले से ही बड़ी संख्या में तैनात सतह से हवा में मार करने वाली  ै-400 और ै-300 मिसाइलों की नई खेप को भी तैनात करने का निर्देश दिया है। इसके साथ इन मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को रूसी फौज और असद की सीरियन सेना की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा। साफ है कि रूस सीरिया में अपनी सैन्य क्षमताएं और मजबूत करने में जुट गया है।
वहीं सीरिया पर अपने हमले को जायज ठहराने के बाद अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका आगे भी इस तरह की कार्रवाई करने को तैयार है। अमेरिका ने खुली चेतावनी दी है कि रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल होता है, तो अमेरिका इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
खबर है कि अमेरिका इस बात की जांच कर रहा है कि क्या मंगलवार को असद सरकार द्वारा निर्दोष नागरिकों पर किए गए रसायनिक हमले में रूस ने भी उसकी मदद की ? इसी सप्ताह इदलिब प्रांत में हुए रसायनिक हथियारों के हमले में 100 के करीब लोग मारे गए।
इस प्रकार सीरिया पर अमेरिका के हमले से फिर विश्व की शांति पर ग्रहण लग गया है। वहीं अमेरिका में लोग सीरिया में नाहक ही अमेरिका द्वारा किये गये हमले से नाखुश हैं। लोग इस हमले को इराक पर किये गये अमेरिकी हमले की तरह आत्मघाती मान रहे है।
वहीं विश्व की अमन शांति के रखवालों का मत है कि सीरिया पर हमला करके अमेरिका ने एक प्रकार से सीरिया के खिलाफ जंग लड़ रहे विद्रोहियों  (जिनमें इस्लामी आतंकी बड़ी संख्या में सम्मलित है) को ही मजबूत किया। सीरिया सरकार इन विद्रोहियों से लड़ रही है। सीरिया सरकार पर अमेरिका का हमला अमेरिका समर्थक विद्रोहियों के साथ इस्लामी आतंकी गुट को भी मजबूती मिलेगी। जनता को आशा थी कि ट्रंप खुद इराक हमले को जायज नहीं ठहराते है। उन्हें पूर्ववर्ती सरकारों की भूल से सबक लेकर सीरिया की लड़ाई में विद्रोहियों को मजबूत करने व सीरिया में आसीन असद सरकार को पदच्युत करने की पूर्ववर्ती अमेरिकी सरकार की आत्मघाती नीतियों को त्याग कर इस्लामी आतंकियों के सफाये पर ही पूरा ध्यान देना चाहिए।

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