उत्तराखंड देश

उत्तराखंड को संरक्षित राज्य घोषित कर पहाड़ों को खोखला कर रहे विनाशकारी परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगायें प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री धामी

पहाड़ दिवस पर पूर्व छात्र संघ महासचिव सचिन  थपलियाल के नेतृत्व में सुरंगों से छलनी हो रहे उत्तराखंड बचाने के लिए दिया  युवाओं के साथ देहरादून में धरना

प्यारा उत्तराखंड डाट काम 

इस सप्ताह,11दिसम्बर 2023, विश्व पहाड़ दिवस के अवसर पर एकता विहार स्थित धरना स्थल पर पूर्व छात्र संघ महासचिव सचिन थपलियाल ने धरना दिया जिसमें आर्यन छात्र संगठन समेत कई संगठनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया ।।
*सबसे पहले ग्रेटर हिमालय मध्य हिमालय व शिवालिक श्रेणी के पहाड़ो को धन्यवाद प्रेषित किया गया जिन हिमालय के पहाड़ो ने सम्पूर्ण भारत को वेद पुराण के साथ साथ सुनहरा मौसम व स्वच्छ हवा दी ।*
धन्यवाद के बाद सभी ने एकजुटता के साथ हिमालय पर्वत के उत्तरी व मध्य  भाग में बन रही टनलों/ चारो धामों में चल रहे विनाशकारी प्रोजेक्टों को शीघ्र ही बंद करने की माँग करी ।। शिवालिक हिमालय का दक्षिणी तथा भौगोलिक रूप से युवा भाग है जो पश्चिम से पूरब तक फैला हुआ है। देहरादून शिवालिक श्रेणी में बसा हुआ शहर है जिसका दोहन सरकार कर रही है भूगर्भीय दृष्टि से ये देहरादून बायो रिज़र्व जोन का हिस्सा है यहां किसी भी तरीके से कार्बन उत्सर्जन व ग्रीनहाउस गैस वाले सभी कार्य बंद करें व देहरादून का सभी ट्रांसपोर्टेशन हायड्रोजन इलेक्ट्रॉनिक हो और यहां की पुरानी गरिमा वापस लौटे ।।

*मुख्य रूप से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से उत्तराखंड के लिए कई मांगे रखी गयी जिसमें मांग की गई कि उत्तराखंड को संरक्षित राज्य घोषित करें क्योंकि बड़े स्तर पर पहाड़ो को अंदर ही अंदर खोखला किया जा रहा है, उत्तराखंड राज्य मुख्य रूप से पहाड़ो के लिए बना था और वर्तमान में कुछ उधोगपतियों ने पूरे पहाड़ को आज टाइम बम के उपर ला दिया है जिससे पहाड़ो की जमीन धस रही है ।सभी आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री मोदी व  मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से तत्काल सभी विनाशकारी प्रोजेक्टस को रोकने  पुरजोर मांग की ।*

*”एक तीर एक कमान सारा पहाड़ एक समान” के नारों की गूंज से धरना स्थल गूंज उठा और समस्त पहाड़ी भाषी आबादी के लिए आरक्षण घोषित करने की मांग हुई ।।*

सचिन ने कहा कि पहाड़ वाइब्रेटिंग मोड पर है, नेता फ्लाइट मोड पर है औऱ जनता साइलेंट मोड पर है क्योंकि लैंडस्लाइड में पिछले 5 साल में 3000% वृद्धि हुई है ।।
जिसका कारण है Denuded नीति मतलब पेड़ो को काट काट के पहाड़ो को नंगा कर देना । गुजरात में एक मोरबी पुल गिरा उसे देशभर के टेलीविजन ने दिखाया पर पिछले 5 साल में 37 पुल उत्तराखंड में गिर चुके हैं, 27 पुल गिरने को तैयार खड़े हैं।

20 सालो में चंडीगढ़ क्षेत्र से 5 गुना ज्यादा वन क्षेत्र हमने उत्तराखंड में खो दिए हैं ।।

आपदा प्रबंधन विभाग ने 2018 में एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसके मुख्य बिंदु थे की उत्तराखंड में 50% हिस्से बेहद संवेदनशील हैं अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अब तक 6536 landslide zone चिह्नित किये जा चुके है औऱ 1093 गांव हॉट स्पॉट की जद में है जहाँ पर क्लाउड ब्लस्ट, भु धसाव की ज्यादा संभावना है। वर्ल्ड बैंक की मदद से यह सर्वे हुआ था।

सचिन ने सवाल किया कि पुष्कर धामी की सरकार जनता के खिलाफ क्यो जा रही है 23 सालो में उत्तराखंड को क्या मिला ,👇

पहाड़ो में एक नारा है कि *”जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी हैं”*
*राज्य में जमीनों की खुली छूट के चलते भू माफ़िया आज प्रदेश में हावी है, गैरसैंण की जगह देहरादून में सभी नौकरशाही बैठी है। उत्तराखंड को सख्त भू कानून के साथ साथ अनुच्छेद 371 मिलना चाहिए ।।पुष्कर सरकार के नीतियों द्वारा उल्टी गंगा बहाई जा रही है क्योंकि हमने मांग “भू कानून” थोपा “समान नागरिक संहिता”, हमने मांगा “1950 मूल निवास” दिया “2000 स्थायी निवास”, बेरोजगार संघ की मांग है सरकारी परीक्षाओं की सीबीआई जांच मिला “नकल विरोधी कानून” और हमने डिमांड की थी पहाड़ में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिला ऋषिकेश एम्स, हमने मांगे पहाड़ी सड़कों में यातायात के ज्यादा वाहन हो मिला चार धाम सड़क हमें लगता है पुष्कर देवभूमि के लिए पनौती है ।*

बॉबी पंवार ने कहा कि जितने भी सनातन संस्कार है वह गंगा जी की अविरल बहती धारा में ही किये जायें शास्त्रों में भी लिखा हुआ है कि जब गंगा निर्मल बहती हैं तभी उसमें किये गए कार्य सिद्धि माने जाते हैं कोई भी ऐसी धारा जो बंधी हुई हो उसमें हमारे धार्मिक संस्कार नही किये जाते।
इसलिय अंग्रजो के समय पे भी तीर्थ पुरोहितो ने गंगा तटो पर बांधो का विरोध किया

*सदियों से पहाड़ो में रहने वाले लोग बहुत भयंकर डर में है क्योंकि सरकारी आपदाओं के कारण मानवों के अस्थि पंजर नदी में बह रहे है।*

देश के शाशक/प्रशाशक ये माने की हिमालय भारत ही नहीं अपितु समूचे मानव समाज के लिए विशाल वन क्षेत्रों में वृक्षों की भरमार एवं नदियों तालों में algae होने के कारण ऑक्सीजन बैंक (Oxygen Bank) का कार्य करती है और शुद्ध प्राण वायु का उत्सर्जन करती है।;
हिमालय, इसी प्रकार से अपने ग्लेशियरों, जल संवर्धन करने वाले वनों, तालों के कारण वाटर बैंक (Water Bank) का भी कार्य करती है।
हिमालय के प्राकृतिक गुणों की भरमार से यह सौर विकरण का संकट पैदा करने वाली ग्रीन हाउस गैस के उन्मूलन के स्वतः कारगर उपाय बनती है और स्वयं में Ozone Layer Protection Factor (OLPF) का भी कार्य करती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी लेट न करते हुए उत्तराखंड राज्य गठन का शुभारम्भ दीर्घकालिक योजना ग्रीन पॉलिसी मॉडल तैयार करते हुए नेट ज़ीरो लागू करें व उस हेतु जिस प्रकार नेपाल के काठमांडू में International Centre for Mountain Development (ICIMOD) स्थित है उसकी तर्ज पर सर्पथम हिमालय संरक्षण के लिए अलग से डिपार्टमेंट का गठन किया जाए। राज्य गठन के समय आंदोलनकारियों ने तत्कालीन समय में भारत सरकार से तब अनुरोध किया था कि हिमालय के पर्वतीय अंचलों विशेषतः ग्रामीण परिवेश में गुजर बसर करने वाली अवाम चुंकि हिमालय संरक्षण व संवर्धन के प्रति सदैव सर्वाधिक संवेदनशील रहती आई है अतः हिमालय में रहने वाले लोगों की आर्थिक प्रगति व खुशहाली हेतु विशेष वित्तीय सहायता राशि “ग्रीन बोनस” (Green Bonus) की रुप रेखा निर्मित की जाए। उस हेतु उत्तराखंड हिमालय के निवासियों हेतु प्रत्येक वित्त वर्ष में ₹2,000 करोड़ की राशि तत्कालीन समय में अविलम्ब अवमुक्त की मांग उठाई गईं थी। व उसको ₹5,000 करोड़ प्रति वर्ष करने की मांग की गईं थी। जो कि आज की तिथि पर न्यूनतम ₹30,000 करोड़ से ₹36,000 करोड़ प्रति वर्ष उत्तराखंड हिमालय हेतु होनी चाहिए।

“राज्य नवनिर्माण अभियान” ने माना कि पर्वतीय भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य का आधारभूत ढांचा मैदानी इलाकों की अपेक्षा अधिक कठिन होता है, क्योंकि पहाड़ी राज्य की इकोलॉजी और इकोनामी दोनों ही प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहती है और आधारभूत ढांचे में कभी कभी ऐसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो जाती हैं, जिसमें वनों को, प्रकृति को और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. हमें विकास और प्रकृति के संरक्षण को एक दूसरे का पूरक बनाकर आधारभूत ढांचे के निर्माण पर ध्यान देना होगा. यह तभी संभव है जब हम “उपभोग नहीं बल्कि उपयोग“ के सिद्धांत का अनुसरण करेंगे ।। *सामुहिक जिम्मेदारी लेते हुए सभी ने संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ साथ विश्व की सभी संस्थाएं को चेतावनी दी और उत्तराखंड व उत्तराखंड के पहाड़ो पे विशेष ध्यान देने की अपील की ।*

धरने में उपस्थित यशवीर आर्य, विशाल चौहान, दीपेंद्र लाल, नवीन चौहान, संतोष राणा, सुनील रावत, अभिषेक, राजेन्द्र, अंकित खैरवाल, सुनील चौहान, अरविंद नेगी , ऋषभ रावत, रविन्द्र नेगी आदि उपस्थित थे ।

निवेदक
राज्य नवनिर्माण अभियान

सचिन थपलियाल
फॉर्मर महासचिव छात्रसंघ
डी.ए.वी. कॉलेज
एच.एन.बी गढ़वाल यूनिवर्सिटी

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