देश

खूँखार  अपराधी अतीक के सफाये पर बिलाप करने वाले बेनकाब, देश से मांगे माफी

योगी सरकार की तर्ज पर अपराधियों के खिलाफ चले देशव्यापी अभियान

देवसिंह रावत
खूँखार   अपराधी अतीक अहमद व उसके  छोटे भाई खालिद अजीम अशरफ की 15 अप्रैल 2023 की रात 10.34 मिनट पर  प्रयागराज  के मेडिकल कालेज के चौराहे पर तीन अपराधियों ने गोली मार दी। जब भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों अपराधियों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिये गाडी से उतर कर पैदल ही कॉल्विन अस्पताल जा रहे थे, उसी समय खबरिया चैनलों  के पत्रकारों ने उनसे कुछ सवाल पूछे। इनका जवाब अतीक व उसका भाई दे रही रहे थे कि इसी बीच पत्रकारों के भेष में आये तीन हमलावरों ने अचानक गोलियों से दोनों भाईयों को छलनी कर दिया। सुरक्षाकर्मी जब तक संभलते तब तक दोनों अपराधी ढेर हो गये थे और तीनों हमलावरों ने आत्मसम्र्पण के लिये हाथ खडे कर दिये थे। पुलिस ने अतीक की हत्या के बाद आत्मसम्पर्ण करने वाले तीनों हमलावरों  अरूण मौर्य, सनी सिंह व लवलेश तिवारी को घटना स्थल से ही दबोच लिया था। तीनों हमलावरों को न्यायालय ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके न्यायालय ने दो दिन बाद पुलिस ने तीनों अपराधियों को 4 दिन की पुलिस हिरासत मे सौंप दिया। अतीक जैसा खुंखार अपराधी मारे जाने से देश की जनता ने जहां चैन की सांस ली। वहीं इस पर तीब्र प्रतिक्रिया प्रकट करते हुये देश की कई राजनैतिक दलों ने देश की जनता के समक्ष खुद को बेनकाब कर दिया। इस अपराधी की मौत पर जहां सपा, बसपा, औवसी, ममता व कांग्रेस आदि दलों ने अपना संकीर्ण नजरियां रख कर देश की जनता की नजरों में बेनकाब हो गये। ये राजनेता जहां न्यायपालिका की दुहाई देकर अतीक को शिकंजे में कसने वाली योगी सरकार के इस्तीफे की मांग करने लगे। जबकि जनता जानती है कि अतीक जैसे खुंखार अपराधी को देश प्रदेश का भाग्य विधाता बनाने की धृष्ठता करने की बेशर्म कृत्य करने वाले दल अब कानून व देश के संविधान की दुहाई दे रहे हैं। ऐसे अपराधी को कानून के शिकंजे से बचाने की धृष्ठता करने वाले दल व उनके आका भी अतीक के समान ही गुनाहगार ही है। ऐसे आस्तीन के सांपों को भी देश की व्यवस्था को अतीक के अपराधों का ही दण्ड देना चाहिये। क्योंकि अतीक को दुर्दात बना  कर बचाने में इन्हीं आस्तीन के सांपों का संरक्षण रहा। इन्हीं के संरक्षण के कारण सैकडो लोगों को लूटने व मारने का कृत्य अतीक व उसके गिरोह ने किया। ऐसे में अतीक की मौत के बाद   न्यायपालिका, संविधान व मानवता की दुहाई दे कर विधवा विलाप करने वाले  नेताओं को उस समय इन मूल्यों का भान नहीं रहा जब वे आम जनता को गोली व ताकत के बल कर लूट मार करने वाले ऐसे खुंखार अपराधी को देश प्रदेश का भाग्य विधाता विधायक व सांसद बनाने की बेशर्मी कर संरक्षण दे रहे थे। ऐसे दलों को संविधान व कानून की दुहाई देने के बजाय देश की जनता से ऐसे जघन्य अपराधियों को संरक्षण देने के लिये माफी मांगनी चाहिये। ऐसे अपराधी की हत्या में कौन सामिल है, किसके इशारे व मिली भगत से यह हत्या हुई। यह जाचं हो रही है। इस अपराध के लिये भी गुनाहगारों को सजा मिलेगी। बेहतर होता कि इन अपराधियों को अपने कृत्यों की सजा न्यायालय के द्वारा मिलती। पर लगता है विधि का विधान कुछ और ही था। ंअब इसके पीछे कोई अन्य अपराधिक गिरोह है या अतीक से अपने गठबंधन को उजागर न हो इसके भय से उसका सफाया  कराने वाले सफेदपोश हैं या पाकिस्तान आदि विदेशी ताकतें। यह तो जांच के बाद उजागर होगा या यह राज, राज ही बना रहेगा। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। अतीक का बचा खुचा गिरोह का सफाया जल्द किया जाये।  इसी मामले में कुछ माह पहले प्रयागराज में अतीक गिरोह ने जिस प्रकार दिन दहाडे उमेश पाल की निर्मम हत्या की। उससे  पूरा देश स्तब्ध था। इसी हत्या की आड में जब अतीक जैसे अपराधियों को राजनैतिक संरक्षण देने वाले दलों ने प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा तो मुख्यमंत्री योगी ने इन राजनैतिक दलों को बेनकाब करते हुये इस काण्ड के गुनाहंगारों को मिट्टी में मिलाने की भीष्म प्रतिज्ञा ली । जिसको साकार होते देख कर ये आस्तीन के सांप विधवा विलाप करने लगे। 24 फरवरी को अतीक गिरोह द्वारा किये गये उमेश पाल  की निर्मम हत्या ने 44 साल से खडे अतीक के अपराधिक सम्राज्य की चूलें हिला दी। भले ही अतीक पर 100 से अधिक मामले चल रहे थे। परन्तु उसको कोई सजा नहीं हुई। यहीं नहीं उसकी इतनी दहशत थी कि 2012 में उसकी जमानत की याचिका पर जो उसने चुनाव लडने के लिये  इलाहबाद उच्च न्यायालय में दी थी, उसकी सुनवाई करने से 10 न्यायाधीशों ने खुद को अलग कर दिया। इसके बाद 11वें न्यायाधीश ने जमानत की सुनवाई करते हुये अतीक को जमानत दी। ऐसी दहशत में उसके खिलाफ आम आदमी कैसे लडने का साहस कर सकता। वह जेल में बंद रह कर भी अपनी अदालत व लूट खसोट का धंधा जेल में से ही चलाता। लोगों को बाहर से उठावा कर जेल में उसका गिरोह लाता और फिर उसकी पिटाई की जाती। इससे घबरा कर वह लूटमार का अपना धंधा निरंतर चला रहा था। परन्तु योगी सरकार की इस भीष्म पन्रतिज्ञा के आगे उसका पूरा अपराधिक सम्राज्य रेत की महल की तरह ढह गया। उसका एक बेटा इसी माह 13 अप्रैल को उसके साथी के साथ पुलिस मुठभेड में मारा गया। उसके दो बेटे जेल में बंद है। अन्य नाबालिक सुधार गृह में है। उसकी पत्नी भी भगोडा घोषित हो रखी है। उसके साथी निरंतर मारे जा रहे है। उसकी हजारों करोड की संपतियां सरकारी शिकंजे में जब्त कर दी गयी। उसका पूरा सम्राज्य ढह गया। उसी के शब्दों में माफियागिरी तो कबकी खत्म हो गयी अब तो रगडा जा रहा है।
पर जहां तक बात न्यायपालिका का है। न्यायपालिका गठन ही देश में आम जनता को न्याय दिलाने के लिये किया गया। परन्तु राजनैतिक दलों में काबिज आस्तीन के सांपों व उनके प्यादे बने नौकरशाहो के गठजोड से न्यायपालिका समय पर ऐसे अपराधियों को दण्डित करने के अपने दायित्व का निर्वहन नहीं पाती। इसके कारण आम जनता बेहद परेशान व भयभीत  है। न्यायपालिका में न्याय के लिये वर्षों लम्बी व खर्चीली व्यवस्था के कारण आम जनता न्याय के लिये  न्यायपालिका के दर पर गुहार भी लगाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते है। जो अपना सबकुछ दाव पर लगाा कर अपराधियों को दण्डित कराने के लिये न्यायपालिका की जंग लडते हैं। उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय से ‘छावला नजफगढ दिल्ली की दामनी मामले में हत्या के आरोपियों को मुक्त करने वाले फैसले से से आम जनता स्तब्ध रह जाती है। इसके बाद अपराधियों के हौसले बुलंद हो जाते है। आखिर जांच अदालत व उच्च न्यायालय द्वारा जघन्य हत्या-सामुहिक  बलात्कार के काण्ड में भी न्यायपालिका का ऐसा फैसला देश की आम जनता की आशाओं पर बज्रपात ही करताा है। आखिर जनता को समझ में नहीं आता है कि न्यायपालिका में जबाबदेही क्यों नहीं? न्यायपालिका की सहानुभूमि अपराधियों के प्रति क्यों पीडितो के प्रति क्यों नहीं? यह पहला मामला नहीं है। ऐसे मामले अनैक हैं। मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के मुख्य गुनाहगारों को दण्डित करने के बजाय जब देश की व्यवस्था सम्मानित करने लगे तो आम जनता ऐसों पर कैसे विश्वास करेगी? आखिर देश की न्याय व्यवस्था में जबाबदेही व आम जनता के प्रति उतरदायी क्यों नहीं है?
वहीं अतीक अहमद  और अशरफ की सरेआम हत्या किये जाने पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुये इनके द्वारा 2005 में कत्ल किये गये तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने कहा कि दोनों कातिलों को अपने कर्मो्र का फल मिला है। श्रीमती पूजा पाल ने कहा कि  अतीक अहमद की जो कार्यप्रणाली थी और जो कृृत्य थे, उसे वेसा ही फल मिलता है। यदि आप अच्छा करोगे तो पूरी दुनिया आपके पीछे लग जाये लेकिन ईश्वर आपका बचाव करता है। हर क्षण वह आपके लिये रक्षा में तैयार रहता है। लेकिन जब आप गलत करते हैं तो भगवान साथ छोड देता है। गौरतलब है कि 2005 में अतीक अहमद के गुण्डों ने 5 किमी दोडा कर राजू पाल की गोलियों से छलनी कर निर्मम हत्या कर दी थी। उस दिन पूजा से उसकी शादी हुये केवल 9 दिन ही हुये थे। भले ही अपने विधायक की निर्मम हत्या कराने वाले अपराधी के जघन्य पापों को बसपो भूल गयी हो पर राजू पाल की विधवा  अपने पति की हत्यारें को कानून के शिकंजे में जकडने के लिये इस विश्वास के साथ अकेले ही डटी रही कि भगवान एक दिन न्याय जरूर करता है। यह भी एक संयोग है कि अतीक का हत्यारा अरूण मौर्य का जन्म भी उसी सन 2005 में होता है।  जब अतीक के द्वारा तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की निर्मम हत्या की थी। अतीक व राजूपाल की दुश्मनी का मुख्य कारण प्रयागराज की पश्चिम विधानसभा सीट है। जिस पर अतीक लगातार 4 बार विधायक जीता था। पर 2004 में वह फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद बना तो उसने विधानसभा  की सदस्यता  से इस्तीफा दिया। इस सीट पर जब  चुनाव हुये तो तो अतीक ने अपने भाई अशरफ को यहां से चुनावी दंगल में उतारा, जिसे बसपा के प्रत्याशी राजू पाल ने हरा दिया। इसी हार को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न मान कर अतीक अहमद ने बसपा के विधायक राजू पाल को मौत के घाट उतार दिया। यही काण्ड अतीक की बर्बादी का कारण बना। हालांकि इस विधानसभा में हुये चुनाव में सपा ने राजू पाल की धर्मपत्नी पूजा पाल को उतारा। राजूपाल सपा से विधायक रही। अतीक भी सपा से सांसद रहे। परन्तु दोनों में 36 का आंकडा बना रहा। राजनैतिक दलों की स्थिति हमेशा कितनी दयनीय रही। बसपा ने अपने विधायक राजू पाल के हत्या में लिप्त अपराधी की पत्नी के अपने दल में सम्मलित कर दिया।
अतीक की हैवानियत के किस्से प्रयागराज से लेकर प्रदेश के कई हिस्सों में सुनाई दे रहे है। परन्तु अपने स्वार्थो में राजनेता व नौकरशाह इतने अंधे हो गये थे किउन्होने इस अपराधी पर अंकुश लगाने के बजाय उसे प्रदेश देश का भाग्य विधाता ही बना दिया। अगर उप्र के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इतनी ईमानदारी से प्रदेश से माफिया मुक्त करने के अभियान के प्रति समर्पित नहीं रहते तो आज भी उप्र में सरकारें चाहे कितनी बदलती रहे परन्त्ु जमीन पर इन्हीं माफियाओं के राज से आम जनता त्रस्त रहती। अतीक की हैवानियत का जीता जागता उदाहरण रही प्रयागराज की सूरजकली, जिसने अतीक  के हमलों व दमन के बाबजूद उससे निरंतर टकराती रही। अपराधी अतीक की नजर प्रयागराज स्थित झलावा से निरातुल में सूरजकली के पति बृजमोहन कुशवाहा की 12 बीघा जमीन पर लगी। इसी जमीन को हडपने के लिये अतीक ने सूरजकली के पति बृजमोहन कुशवाहा का 1989में सफाया करा दिया। इसके बाद भी जब सूरजकली नहीं मानी तो अतीक ने उस पर व उसके बेटे पर प्राणाघात हमला कराया। अतीक ने उसे भले ही निरंतर धमकिया व हमले किये परन्तु सूरजकली नहीं झुकी। उसने अतीक के खिलाफ अपनी जंग जारी रखी। इस बीच अतीक ने उसके भाई को भी बिजली का करंट लगा कर तडफाया। सूरजकली को आशा है कि अब अतीक के खात्मे के बाद उसको अपना हक मिलेगा।
इस मामले में देश के वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद महेश जेठमलानी की प्रतिक्रिया देश के जनमानस को इस प्रकरण में बेहद तर्कसंगत के साथ रोजनेताओं व अपराधियों के गठजोड को बेनकाब करने वाला लगा। महेश जेठमलानी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अतीक जैसे माफिया डान अपराधिक गतिविधियों के बाद भी इसलिये फलते फूलते है , क्योेंकि वे राजनैतिक दलों को पैंसा व बाहुबल देते है।इसके बले में उन्होने सुरक्षा व संरक्षण मिलता है। अतीक 2004 से 2018 तक समाजवादी पार्टी का सदस्य था। वह 2008 में गिरफ्तार  होने के बादद जमानत पर छूट गया। तब मायावती मुख्यमंत्री थी। जब सपा सत्ता में आई तो उसकी आपराधिक गतिविधियां चरम पर थी।
उन्होने तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों पर आरोप लगाया कि वे माफिया डाॅन का पोषिात करती है और उसका इस्तेमाल करती है। महाराष्ट्र में दाऊद और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच सांठगांठ जगजाहिर है। 2015 में महाराष्ट्र में सत्तारूढ भाजपा-शिवसेना सरकार ने दाऊद के सम्राज्य को ढाह दिया था। अतीक की गिरफतारी कर उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा गठबंधन सरकार का सराहनीय कार्य किया।

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