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“देश के 63 पुलिस थानों में गाडी नहीं व 285 थानों के पास नहीं है वारलेस व मोबाइल “- संसद में गृहराज्य मंत्री के इस जवाब से स्तब्ध है देश

प्यारा उतराखण्ड डाट काम
देश एक तरफ चीन व पाकिस्तान जैसे दुश्मनों के षडयंत्र से सीमाओं पर जुझ रहा है। वहीं दूसरी तरफ चीन व पाकिस्तान के देश में छुप्पे गुर्गो, देश विरोधी तत्वों, अपराधियों व भारत के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने वालेे अलगाववादी समुह देेश को हर पल आरजकता के गर्त में धकेलने में लगे है। ऐसे में आशा कि जाती है कि देश की सरकार देश की सीमा के साथ देश के आंतरिक सुरक्षा के प्रति बेहद सजग होगी। इसके साथ देश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये नियुक्त पुलिस बल तमाम आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी। जिससे वे बिना समय गंवाये देशद्रोहियों व अपराधियों के षडयंत्र को विफल कर उन पर अंकुश लगाने में कारगर होंगे। परन्तु देश उस समय स्तब्ध रह गया जब  14 मार्च 2023 को केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक प्रश्न के बारे में लिखित जवाब देते हुये बताया कि   देश में कुल 17 हजार 535 पुलिस स्टेशन है।  इनमें से  63 पुलिस स्टेशन ऐसे हैं जहां कोई गाड़ी नहीं है। 285 पुलिस स्टेशन ऐसे हैं, जहां कोई वायरलेस सेट या मोबाइल फोन नहीं है।  628 पुलिस स्टेशन ऐसे हैं जहां टेलीफोन कनेक्शन नहीं है। देश की सरकार के इस जवाब पर देश की जनता को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि आखिर देश की सरकार देश में कानून व्यवस्था कायम रखने व आम नागरिकों को अपराधिक तत्वों से बचाने के लिये इतनी लापरवाह क्यों है? जब पुलिस थानों में बेहद जरूरी वाहन, वारलेस व मोबाइल तक नहीं होगा तो वह कैसे देश व नागरिंकों की सुरक्षा करेेगी? सरकार एक तरफ देश की आजादी का 75 वीं जयंती मनाने के लिये करोड़ों रूपये पानी की तरह विज्ञापनों व समारोहों पर पानी की तरह बहा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि देश में कानून व्यवस्था व नागरिकों की रक्षा के लिये बेहद जरूरी पुलिस थानों में वाहन व वारलेस सेट-मोबाइलों तक को उपलब्ध कराने में इतना बिलंब व संवेदनहीनता क्यों ?बेहतर होता कि केंद्र सरकार इस भूल की जानकारी होते ही संबंधित  राज्य सरकार के साथ मिल कर संसद में इसका उतर देने से पहले त्वरित समाधान कर देना चाहिये था। सरकार द्वारा संसद में दिये गये इस  देश के आम नागरिकों का मनोबल तोड़ने व अपराधियों का दुशाहस बढाने वाला उतर देने से पहले ऐसी समस्याओं का आपातकाल की भांति त्वरित समाधान कर देना चाहिये।

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