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जांबाज कुत्ते को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सम्मानित करने से उजागर हुआ रहस्य कि क्यो है अमेेरिका महाशक्ति और भारत असहाय !

अमेरिका में  कुत्ते से लेकर इंसान तक हर देशभक्त व प्रतिभाशाली का होता सम्मान पर भारत में देश भक्त व प्रतिभाओं का होता है अपमान

 

देवसिंह रावत

इसी सप्ताह संसार के सबसे खूंखार आतंकी व अमेरिका के खिलाफ खुली जंग लड़ने वाले  विश्व के सबसे खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट  के कुख्यात सरगना अबू बकर अल बगदादी का खात्मा करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप द्वारा, जिस प्रकार से  इस कुख्यात आतंकी को  घेरने  वाले  अमेरिकी  सेना के जाँबाज कुत्ते को भी राष्ट्रीय सम्मान समारोह में सम्मानित करते देखकर सुखद आश्चर्य होने के साथ मेरे मन में  दशकों से उठे प्रश्न का भी  सहज ही उत्तर मिल गया कि  क्यों अमेरिका महान है और भारत  क्यों  असहाय देश है ? अमेरिकी राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जांबाज कुत्ते का सम्मान किये जाने से साफ हो गया कि  अमेरिका में  राष्ट्र  के लिए समर्पित कुत्ते से लेकर इंसान सहित सभी प्रतिभाओं का सम्मान होता है । इसीलिए अमेरिका अपने कलंकित इतिहास के बाद भी आज संसार का महाबली व समृद्ध देश है।
वहीं भारत में  अपने राष्ट्र की भाषाओं,राष्ट्र के नाम,राष्ट्रहित में समर्पित व्यक्तियों/प्रतिभाओं,  भारत की गौरवशाली संस्कृति के लिए समर्पित सपूतों, संस्कृति के प्राण,गौ, गंगा, गीता, प्रतिभाओं,आस्था व समर्पित सपूतों का अपमान होता है। इतना ही नहीं भारत  को रौदने वाले आक्रांताओं, अत्याचारियों, भ्रष्टाचारियों व हैवानों ( जातिवादी, क्षेत्रवादी,लिंगभेदी, कातिलों व अन्यायियों )का भारत में सम्मान किया जाता है।
इसीलिए भारत अपने गौरवशाली समृद्ध संस्कृति, इतिहास, परंपराओं ,अकूत संसाधनों और ज्ञान के अकूत भंडार के साथ  प्रतिभाओं का अथाह सागर होने के बावजूद  कुशासकों व कुव्यवस्था द्वारा देश को जकड़े रहने के कारण संसार का सबसे आत्मघाती,असहाय, गरीब व दयनीय देश बना हुआ है।
हालत यह है कि अंग्रेजों की जाने की कि 73 साल बाद भी देश को उसकी भाषा, उसके नाम, संस्कृति ,इतिहास व आस्था से वंचित रखकर, शर्मनाक रूप से पूरे राष्ट्र को विदेशी आक्रांता अंग्रेजों की ही भाषा अंग्रेजी ,उनके द्वारा थोपे नाम इंडिया  से ही गुलाम बना रखा है।इससे देश के 138 करोड़ लोगों के  विकास व मानव अधिकारों का गला घोंटा हुआ है।इस देश में आज भी आक्रांताओं,हैवानों व लुटेरों को  बैशर्मी से महिमामंडित कर उनके स्मारक बने हैं और भी बनाए जा रहे। देश के नौनिहालों को इन्हीं भारतद्रोही विष का पान फिरंगी भाषा अंग्रेजी के द्वारा कराया जा रहा है। देश की सरकारें अपनी निहित स्वार्थ, अंध सत्तालोलुपता व दलीय स्वार्थ में डूबे रह कर देश को पतन के गर्त में धकेला हुआ हैे

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