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माॅं व भगवान का विकल्प है गाय: न्यायमूर्ति बी शिवशंकर राव

हैदराबाद(प्याउ)। 10 जून को हैदारबाद उच्च न्यायालय में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बी शिवशंकर ने कहा कि गाय,  माॅं व भगवान का विकल्प है। इस अवसर पर उन्होने देश के शासकों व गौ हत्या करने को उतारू लोगों की आंखे खोलने वाले महत्वपूर्ण बातें कही। न्यायमूर्ति राव ने देश के शासकों की आंखे खोलने वाली बातें पशु व्यवसायी रामावत हनुमा की जब्त की गयी 63 गायें उसे देने की याचिका की सुनवायी करते हुए कही। उस पर आरोप था कि वह 63 गायों को बकरी ईद के समय गौ मांस बेचने के लिए इन गायों को ले जा रहा था। जिसको देखते उसकी गायें जब्त करायी गयी। निचली अदालत में वह मामला हारने के बाद यह मामला उच्च न्यायालय में सुनवायी के लिए आया था। इस मामले में न्यायमूर्ति ने निम्न लिखित महत्वपूर्ण बातें कही।
-गाय को पवित्र राष्ट्रीय धरोहर है
– बकरीद के मौके पर मुस्लिम धर्म के लोगों को स्वस्थ्य गाय को काटने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
कई मुस्लिम शासकों ने गौ हत्या पर पाबंदी लगायी थी
-बाबर ने गौहत्या पर पाबंदी लगाई थी।
-बाबर ने अपने बेटे हूमायूं को भी गौ हत्या पर पाबंदी लगाने को कहा था।
-अकबर, जहांगीर और अहमद शाह ने भी गौहत्या पर पाबंदी रखी थी।
न्यायमूर्ति बी शिवशंकर ने उन पशु-डॉक्टरों को आंध्रप्रदेश गोहत्या एक्ट 1977 के अंतर्गत लाने की मांग भी की जो कि धोखे से सेहतमंद गाय को अनफिट करार देकर सर्टिफिकेट देकर कह देते हैं कि वे दूध नहीं दे सकती। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उन गायों को काटने की इजाजत है जो कि बूढ़ी हो चुकी हैं और दूध नहीं देती हों।
गौरतलब है कि अंग्रेजों ने देश को लूटने व भारतीयों की संस्कृति को रौंदने के लिए देश में गौ मांस का व्यापार किया था। परन्तु देश की आजादी के बाद लोगों को आशा थी कि देश की सरकारें गौ हत्या के कलंक से भारत को मुक्त कर देंगे। परन्तु देश के शासक औरंजेब व फिरंगी हुक्मरानों की तर्ज पर भारतीय संस्कृति पर गौ हत्या का कलंक लगाये रखे। इसके खिलाफ हजारों हजार लोगों ने शताब्दियों से अपना बलिदान दिया परन्तु क्या मजाल देश के हुक्मरानों के आंखों से भारत विरोधी प्रवृति का भूत उतरने का नाम नहीं ले रहा है। अब जबसे मोदी सरकार आयी जनता को आशा है कि इस कलंक से मुक्ति मिलेगी। परन्तु अभी तक देश में न तो कत्लखाने ही बंद हुए व नहीं गौ हत्या बंद करने का दो टूक फैसला लेने का साहस मोदी कर पाये। ऐसे में हैदारबाद उच्च न्यायालय के न्यायामूर्ति राव का यह दो टूक फैसला देश के लिए एक नजीर साबित हो सकता है।

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