32 साल बाद भी गुनाहगारों को सजा देने के बजाय सम्मानित/पद्दोन्नति करने के लिए उत्तराखण्ड केे सभी मुख्यमंत्रियों के साथ उप्र व केन्द्र
नई दिल्ली(प्याउ)। 32 साल बाद भी मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को सजा न दिये जाने से आक्रोशित उत्तराखण्डियों ने 2 अक्टूबर 2026 को भी काला दिवस मनाने का ऐलान करते हुए राष्ट्रपति महोदया को रौषयुक्त ज्ञापन अभेद किला में तब्दील हुए धरना स्थल जंतर मंतर में पुलिस प्रशासन को सौंपा। 1994 से हर साल 2 अक्टूबर को दिल्ली, उत्तराखण्ड सहित देश विदेश में रहने वाले डेढ़ करोड़ उत्तराखण्डियों ने मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये इस काण्ड के गुनाहगारों को दण्डित करने के बजाय सम्मानित ध्पद्दोन्नति किये जाने पर गहरा आक्रोश प्रकट किया। इस साल 2े अक्टूबर 2026 को काला दिवस धरने की राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर पुलिस द्वारा अनुमति न दिये जाने को आंदोलनकारियों ने लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इसकी कड़ी भर्त्सना करते हुए मजबूरी में समिति ने मुजफ्फरनगर काण्ड 94 की 32वीं बरसी के अवसर पर 01 अक्टूबर 2026 की सांयकाल, संसद की देहरी प्रेस क्लब आफ इडिया के सभागार में इस काण्ड के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस काण्ड के गुनाहगारों को सजा न दिये जाने पर देश व उतराखण्ड की अब तक की सरकारों को धिक्कारा। पुलिस प्रशासन द्वारा जंतर मंतर संसद की चौखट पर काला दिवस के आयोजन को स्वीकृति न देने के षडयंत्र को विफल करते हुए आंदोलनकारियों ने समिति के संयोजक देवसिंह रावत के नेतृत्व में 01अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरनगर काण्ड-94 की 32वीं बरसी पर संसद की देहरी पर स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया के सभागार में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। श्रद्धांजलि सभा के संयोजक देवसिंह रावत ने बताया कि 2 अक्टूबर को उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के प्रमुख संगठनों व तमाम सामाजिक संगठनो ने उत्तराखंड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति के बैनर तले संसद की देहरी, प्रेस क्लब आफ इंडिया पर आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा, उत्तराखण्ड लोकमंच, उत्तराखण्ड जनमोर्चा, उत्तराखण्ड महासभा, उत्तराखण्ड क्रांतिदल सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की उत्तराखण्ड एकता मंच सहित तमाम प्रमुख सामाजिक संगठनों ने भाग लेते हुए मुजफ्फरनगर काण्ड-94 सहित राज्य गठन जनांदोलन के सभी शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए ‘उत्तराखण्ड के शहीद अमर रहे, मुजफ्फरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दो, नरेन्द्र मोदी, धामी शर्म करो’ आदि लगाये। इस अवसर पर आंदोलनकारियों ने उत्तराखण्ड प्रदेश की अब तक की सरकारों को प्रदेश के आत्मसम्मान व जनांकांक्षाओं को रौंदने पर कड़ी भर्त्सना करते हुए उनको राव-मुलायम से बदतर बताया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश मंमगांई ने किया।
भाग लेने वाले प्रमुख लोगों में देवसिंह रावत, के अलावा उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के खुशहाल बिष्ट, उत्तराखण्ड महासभा के हरिपाल रावत व अनिल पंत, जनमोर्चा के बृजमोहन सेमवाल व उत्तराखण्ड राज्य लोकमंच के शिव प्रसाद बलूणी , भाजपा के वरिष्ठ नेता जगदीश मंमगांई, विजय सती, व डा हरपाल नेगी,
समाजसेवी महेश चंद्र,वरिष्ठ आंदोलनकारी सुरेश नौटियाल व पत्रकार कुशाल जीना, आप नेता चंकज पैनूली व प्रताप थलवाल, आंदोलनकारी श्याम प्रसाद खंतवाल, संयुक्त संघर्ष समिति के मनमोहन शाह, कोग्रेेसी नेता शशि मोहन कोटनाला, भाजपा नेता श्री कांत भाटिया, पत्रकार प्रिय रंजन, आंदोलनकारी किशोर रावत, श्याम प्रसांद खंतवाल व रवीन्द्र सिंह चौहान, भीम सिंह बिष्ट, एस एन जोशी,सुशील पुरोहित,पी एस नेगी, नरेद्र सिंह बिष्ट,हरेंन्द्र पुरी, व अमन बलूनी आदि सम्मलित रहे।
राष्ट्रपति महोदय को भी प्रेषित ज्ञापन में राष्ट्रपति से देश की व्यवस्था के रक्षकों द्वारा देश के संविधान व मानवता को रौंदने वाले इस जघन्य काण्ड के दोषियों को तत्काल सजा दे कर भारतीय संविधान, संस्कृति व न्याय की रक्षा करने का गुहार की लगाई गयी। वहीं श्रद्धांजलि सभा में आंदोलनकारियों ने एक स्वर में 1994 से अब तक की उप्र व केन्द्र सरकारों सहित सभी राजनैतिक दलों की इस प्रकरण के दोषियों को सजा न दिलाने के लिए कड़ी भर्त्सना की। वक्ताओं ने देश के सर्वोच्च न्यायालय सहित न्याय व्यवस्था को इन गुनाहगारों को सजा न देने के लिए कडघरे में खड़ा किया। सबसे अधिक उत्तराखण्डी इस बात से आहत थे कि शहीदों के बलिदान व आंदोलनकारियों के संघर्षो से गठित उत्तराखण्ड राज्य की अब तक की कांग्रेस व भाजपा के साथ समर्थन देने वाले दलों की सरकारों ने इस काण्ड के दोषियों को सजा देने के बजाय शर्मनाक संरक्षण देने का काम किया। इसके लिए आंदोलनकारियों ने स्वामी, कोश्यारी, तिवारी, खण्डूडी, निशंक, बहुगुणा, तीनों रावतों व धामी को भी उत्तराखण्डियों से किये गये इस विश्वासघात के लिए धिक्कारा । वहीं इस प्रकरण पर सपा, बसपा व कांग्रेस के अलावा इस प्रकरण पर संसद से सड़क पर घडियाली आंसू बहाने वाली भाजपा को भी इस प्रकरण के खलनायक को सम्मनित कर संरक्षण देने के लिए धिक्कारा। आंदोलनकारियों में इस बात से बेहद गुस्सा था कि जिस मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय व देश की सर्वोच्च जांच ऐजेन्सी सीबीआई द्वारा दोषी ठहराने के बाबजूद इस काण्ड के 32 साल बाद भी देश की व्यवस्था द्वारा इन गुनाहगारों को दण्डित करने के बजाय पद्दोन्नित करके पुरस्कृत किया गया। इसी के विरोध में आक्रोशित उत्तराखण्डी विगत 32 सालों से संसद की चौखट जंतर मंतर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए काला दिवस मना कर देश के हुक्मरानों का धिक्कारते हैं। इस अवसर पर तमाम वक्ताओं ने एक स्वर में इस काण्ड की कडी भर्त्सना करते कहा कि देश की एकता, अखण्डता व विकास के लिए समर्पित रहे ‘उत्त्राखण्ड राज्य गठन जनांदोलन’ में गांधी जयंती की पूर्व संध्या 1 अक्टूबर 1994 को, 2 अक्टूबर 1994 को आहुत लाल किला रेली में भाग लेने आ रहे शांतिप्रिय हजारों उत्तराखण्डियों को, मुजफ्फरनगर स्थित रामपुर तिराहे पर अलोकतांत्रिक ढ़ग से बलात रोक कर जो अमानवीय जुल्म, व्यभिचार व कत्लेआम उत्त्र प्रदेश की तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार व केन्द्र में सत्ताासीन नरसिंह राव की कांग्रेसी सरकार ने किये, उससे न केवल भारतीय संस्कृति अपितु मानवता भी शर्मसार हुई। परन्तु सबसे खेद कि बात है कि जिस भारतीय गौरवशाली संस्कृति में नारी को जगत जननी का स्वरूप मानते हुए सदैव वंदनीय रही है वहां पर उससे व्यभिचार करने वाले सरकारी तंत्र में आसीन इस काण्ड के अपराधियों को दण्डित करने के बजाय शर्मनाक ढ़ग से संरक्षण देते हुए पद्दोन्नति दे कर पुरस्कृत किया गया। सबसे हैरानी की बात है कि जिस मुजफ्फरनगर काण्ड-94 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मानवता पर कलंक बताते हुए इसे शासन द्वारा नागरिकों पर किये गये बर्बर नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखते हुए इस काण्ड के लिए तत्कालीन मुजफ्फनगर जनपद(उप्र) के जिलाधिकारी अनन्त कुमार सिंह व पुलिस अधिकारियों डीआईजी बुआ सिंह व नसीम इत्यादि को सीधे दोषी ठहराते हुए इनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का ऐतिहासिक फैसला दिया था। यही नहीं माननीय उच्च न्यायालय ने केन्द्र व राज्य सरकार को उत्तराखण्ड के विकास के प्रति उदासीन भैदभावपूर्ण दुरव्यवहार करने का दोषी मानते हुए दोनों सरकारों को यहां के विकास के लिए त्वरित कार्य करने का फैसला भी दिया था। जिस काण्ड पर देश की सर्वोच्च जांच ऐजेन्सी सीबीआई ने जिन अधिकारियों को दोषी ठहराया था, जिनको महिला आयोग से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दोषी मानता हो परन्तु दुर्भाग्य है कि इस देश में जहां सदैव ‘सत्यमेव जयते’ का उदघोष गुंजायमान रहता हो, वहां पर उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद अपराधियों व उनके आकाओं के हाथ इतने मजबूत रहे कि देश की न्याय व्यवस्था उनको दण्डित करने में आज 32 साल बाद भी अक्षम रही है। श्रद्धांजलि समारोह में सबसे पहले मुजफ्फरनगर काण्ड सहित राज्य गठन आदंोलन के सभी बलिदानियों को श्रद्धांजलि देते हुए हुतात्माओं के सम्मान में दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि सभा का शुभारंभ किया गया। काला दिवस कार्यक्रम का संचालन देवसिंह रावत ने किया।
