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ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म, छोटे और मझोले उद्यम (#एमएसएमई )के लिए व्यापक प्रोत्साहन से बुनियादी अर्थव्यवस्था का सशक्तीकरण

azadi ka amrit mahotsav

 14 मई 2026, दिल्ली से पसूकाभास

एमएसएमई भारत की आर्थिक वृद्धि को निरंतर गति दे रहे हैं। उनका योगदान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 31 प्रतिशत से ज्यादा और निर्यात में 48.58 प्रतिशत है। देश भर में 32.8 करोड़ आबादी की आजीविका उन पर निर्भर है। सरकार ने ‘उद्यम’ और ‘उद्यम असिस्ट’ प्लेटफॉर्मों के जरिए गैरपंजीकृत उद्यमों का औपचारीकरण तेज किया है। इसके परिणामस्वरूप 7.9 करोड़ से ज्यादा उद्यम औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल हुए हैं। लक्षित नीतिगत उपायों से ऋण तक पहुंच में सुधार आ रहा है। इसके साथ ही विधिक सुरक्षा में मजबूती और व्यवसाय सुगमता में वृद्धि आ रही है। ‘जेम’, ‘ट्रेड्स’ और ‘समाधान’ जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों से बाजार तक पहुंच बेहतर करने और भुगतान में तेजी लाने में सहायता मिल रही है। ये उपाय मिल कर एमएसएमई तंत्र को मजबूत करने के साथ ही ग्रामीण और अर्द्धशहरी भारत में समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।

सस्र्थबूत करते एमएसएमई    एसएमई   

स्वदेशी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते एमएसएमई                                       

सूक्ष्म, छोटे और मझोले उद्यम (एमएसएमई) भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वे उद्यमिता को बढ़ावा देते और रोजगार पैदा करते हैं। वे विकेंद्रित औद्योगिक विकास में सहायक हैं। एमएसएमई ग्रामीण और अर्द्धशहरी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए खास तौर से महत्वपूर्ण हैं। सरकार ने इस सच को समझते हुए एमएसएमई क्षेत्र के लिए कई नीतिगत पहलकदमियां ली हैं। इन पहलकदमियों का मकसद वित्त तक पहुंच में सुधार लाना, औपचारीकरण को बढ़ावा देना, बाजार संयोजन को मजबूत करना और छोटे उद्यमों के डिजिटल समावेशन का संवर्द्धन है।

इन कदमों को स्थानीय उत्पादन प्रणालियों को मजबूत करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। ये पारंपरिक शिल्पों और ग्रामीण उद्योगों की भी मदद कर समावेशी और संतुलित आर्थिक विकास में सहायता करते हैं।

क्षेत्र का विहंगावलोकन

एमएसएमई का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 31.1 प्रतिशत और कुल निर्यात में 48.58 प्रतिशत योगदान है। मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र के उत्पादन में इसका हिस्सा 35.4 प्रतिशत है। एमएसएमई में मैनुफैक्चरिंग, सेवा और व्यापार गतिविधियों से जुड़े 7.47 करोड़ से ज्यादा उद्यम शामिल हैं। यह क्षेत्र लगभग 32.8 करोड़ आबादी को आजीविका मुहैया कराता है। यह रोजगार प्रदान करने वाला कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। एमएसएमई उद्यमों का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों से काम करता है। वे स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को सहायता और गैर-कृषि रोजगार को बढ़ावा देते हैं तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान करते हैं।

एमएसएमई के महत्व को ध्यान में रखते हुए इन्हें ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में मजबूत करना महत्वपूर्ण है। इससे समावेशी विकास को बढ़ावा देने, उत्पादकता सुधारने और छोटे उद्यमों को राष्ट्रीय और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने में मदद मिलती है। कई एमएसएमई गैरपंजीकृत और अनौपचारिक उद्यमों के रूप में काम करते हैं। उनका औपचारीकरण आवश्यक है ताकि वे ऋण और इस क्षेत्र को मिलने वाले अन्य लाभों को हासिल कर सकें। हाल के वर्षों में डिजिटल पंजीकरण प्लेटफॉर्मों के जरिए उनके औपचारीकरण में तेजी आई है। मार्च 2026 तक 7.9 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई और अनौपचारिक सूक्ष्म इकाइयां ‘उद्यम’ और ‘उद्यम असिस्ट’ प्लेटफॉर्मों के जरिए पंजीकृत की जा चुकी हैं। यह छोटे व्यवसायों के लिए संस्थागत समर्थन व्यवस्था की विस्तृत होती पहुंच को प्रतिबिंबित करता है।

ऋण और वित्तीय समर्थन के उपाय

एमएसएमई के विकास के लिए किफायती ऋण का समय पर मिलना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। सरकार ने इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए ऋण और वित्तीय सहायता के अनेक उपाय किए हैं।

ऋण गारंटी योजना

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एमएसएमई मंत्रालय ऋण गारंटी योजना (सीजीएस) को सूक्ष्म और छोटे उद्यमों के लिए ऋण गारंटी कोष न्यास (सीजीटीएमएसई) के माध्यम से क्रियान्वित करता है। यह सरकार और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की साझा पहल है। इस योजना के अंतर्गत सूक्ष्म और छोटे उद्यमों को गिरवी और तीसरे पक्ष की गारंटी से मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना पहली पीढ़ी के और अब तक वंचित रहे उद्यमियों को संस्थागत वित्त प्राप्त करने में समर्थ बनाती है।

केंद्रीय बजट 2025-26 के अनुसार बैंकों के लिए सीजीएस के अंतर्गत गारंटी कवरेज की ऊपरी सीमा 5 करोड़ रुपए से बढ़ाते हुए 10 करोड़ रुपए कर दी गई है। ये संशोधित दिशा-निर्देश 1 अप्रैल 2025 को या इसके बाद मंजूर सभी गारंटियों पर लागू होंगे। इसके अलावा, ट्रांसजेंडर उद्यमियों के एमएसई के लिए एक विशेष प्रावधान किया गया है। ये उद्यम 1 मार्च 2025 से गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत छूट और 85 प्रतिशत तक वर्द्धित गारंटी कवरेज के हकदार होंगे।

आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष

आत्मनिर्भर भारत कोष को एमएसएमई को ‘फंड ऑफ़ फंड्स’ व्यवस्था के ज़रिए 50,000 करोड़ रुपये की पूँजी सहायता देने के लिए शुरू किया गया था। इस कोष में सरकार की ओर से 10,000 करोड़ रुपये और प्राइवेट इक्विटी तथा पूंजीकृत निवेश कोष के ज़रिए जुटाए जाने वाले 40,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह एक ‘मदर फंड–डॉटर फंड’ संरचना के तहत काम करता है, जिसका प्रबंधन एनएसआईसी वेंचर कैपिटल फंड लिमिटेड (राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम का उद्यम पूँजी कोष) द्वारा किया जाता है; यह ‘सेबी’ के साथ पंजीकृत ‘श्रेणी-II वैकल्पिक निवेश कोष है।

नवंबर 2025 तक, एसआरआई कोष ने 682 एमएसएमई को 15,442 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सहायता प्रदान की है। केंद्रीय बजट 2026-27 में आत्मनिर्भर भारत कोष के लिए अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमों को जोखिम पूंजी के साथ निरंतर सहायता प्रदान करना है।

आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (इसीएलजीएस)

इसीएलजीएस (2020) पात्र एमएसएमई और व्यावसायिक उद्यमों को उनकी परिचालन देनदारियों को पूरा करने में सहायता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न व्यवधानों के संदर्भ में उन्हें अपना व्यवसाय फिर से शुरू करने में मदद करना भी है। इस योजना को मार्च 2023 तक के लिए बढ़ा दिया        गया था।

जनवरी 2023 तक, इसीएलजीएस के तहत 3.61 लाख करोड़ रुपये की गारंटी जारी की गई, जिससे 1.19 करोड़ कर्जदारों को लाभ हुआ। भारतीय स्टेट बैंक की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना की वजह से लगभग 14.6 लाख एमएसएमई खातों को गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित होने से बचा लिया गया, जिनमें से 98.3% खाते सूक्ष्म और लघु उद्यम श्रेणी के थे। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि इसीएलजीएस की शुरुआत के बाद से लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के एमएसएमई ऋण खातों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

एमएसएमई के लिए कानूनी और संस्थागत सहायता

वस्तुओं और सेवाओं के लिए भुगतान की समय पर प्राप्ति एमएसएमई की वित्तीय स्थिरता और परिचालन निरंतरता के लिए आवश्यक है। ये उद्यम अक्सर सीमित कार्यशील पूंजी के साथ काम करते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचा स्थापित किया है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 सूक्ष्म और लघु उद्यमों को विलंबित भुगतान के विरुद्ध वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है। इस अधिनियम के तहत, खरीदारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे वस्तुओं या सेवाओं की स्वीकृति के 45 दिनों के भीतर सूक्ष्म और लघु उद्यमों को भुगतान करें। यह भुगतान लिखित समझौते के अनुसार होना चाहिए, जो किसी भी स्थिति में 45 दिनों से अधिक नहीं हो सकता। भुगतान में देरी से उत्पन्न होने वाले विवादों के निपटारे के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 161 सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषदें (एमएसइएफसी) स्थापित की गई हैं।

समाधान‘ पोर्टल

एमएसएमई मंत्रालय ने अक्टूबर 2017 में ‘समाधान; पोर्टल (samadhaan.msme.gov.in) शुरू किया था। यह सूक्ष्म और लघु उद्यमों को विलंबित भुगतान के आवेदनों को ऑनलाइन भरने और उनकी निगरानी करने के लिए एक तकनीक-आधारित तंत्र प्रदान करता है। पोर्टल पर दर्ज मामलों को स्वतः ही संबंधित एमएसइएफसी (सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद) के पास अधिनिर्णय के लिए भेज दिया जाता है। इससे कार्यालयों के व्यक्तिगत चक्कर लगाने या बिचौलियों की सहायता लेने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

जून 2020 में, केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से बकाया भुगतानों पर नज़र रखने के लिए एक समर्पित सब-पोर्टल बनाया गया था। मई 2020 से दिसंबर 2022 तक केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा एमएसएमई को ₹1,65,034 करोड़ के बकाया भुगतान किए जा चुका था।

इस ढांचे को और मजबूत करते हुए, एमएसएमई मंत्रालय ने जून 2025 में एक ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) पोर्टल शुरू किया। यह पोर्टल विलंबित भुगतान के मामलों का शुरू से अंत तक डिजिटल समाधान प्रदान करता है। यह देश भर के सूक्ष्म और लघु उद्यमों के निवारण में लगने वाले समय और लागत को और भी कम करता है।

औपचारिकीकरण और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में समावेशन

भारत के सूक्ष्म उद्यमों का एक बड़ा हिस्सा औपचारिक आर्थिक व्यवस्था से बाहर संचालित होता है, जिनके पास न तो कोई आधिकारिक पंजीकरण होता है और न ही कोई दस्तावेजी वित्तीय लेखा जोखा। यह संरचनात्मक अनौपचारिकता उनकी संस्थागत ऋण, सरकारी योजनाओं और औपचारिक बाज़ारों तक पहुंच को सीमित करती है। इन उद्यमों को औपचारिक व्यवस्था के दायरे में लाने के लिए सरकार ने लक्षित कदम उठाए हैं।

उद्यम पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (यूएपी)

जनवरी 2023 में शुरू किया गया उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (यूएपी), औपचारिक पंजीकरण की कमी वाले अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली के दायरे में लाता है। यह ऐसे उद्यमों को पंजीकरण करने और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण के लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, जिससे संस्थागत ऋण तंत्र में उनका एकीकरण आसान हो जाता है। उद्यम पंजीकरण पोर्टल और ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ के माध्यम से, सरकार ने सूक्ष्म उद्यमों के औपचारिकीकरण की प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया है।

मार्च 2026 तक, दोनों प्लेटफॉर्म पर कुल 7.9 करोड़ से ज़्यादा उद्यम पंजीकृत थे, जिनमें से 4.72 करोड़ ‘उद्यम पोर्टल’ पर और 3.21 करोड़ ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर थे। यह एमएसएमई के ​​डिजिटलीकरण के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि है।

 

एमएसएमई के अंतर्गत व्यापारियों का समावेशन

जुलाई 2021 से, सरकार के संशोधित दिशानिर्देशों के माध्यम से खुदरा और थोक व्यापारियों को एमएसएमई के दायरे में शामिल किया गया है। इसने इन उद्यमों को उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण करने और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (पीएसएल) मानदंडों के तहत लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। इस उपाय ने एमएसएमई के कवरेज का विस्तार किया और व्यापारिक गतिविधियों को औपचारिक एमएसएमई एसोसिस्टम में एकीकृत करने की सुविधा प्रदान की है।

एमएसएमई वर्गीकरण परिवर्तन के दौरान सहायता

विकास को बाधित होने से बचाने के लिए, सरकार तीन साल तक गैर-कर लाभों को जारी रखने की अनुमति देती है। यह उन मामलों में लागू होता है जहाँ कोई एमएसएमई, वर्गीकरण की एक उच्च श्रेणी में पहुँच जाता है। इस उपाय से छोटे उद्यमों के लिए अपने कामकाज का विस्तार करने में आने वाली एक बड़ी बाधा दूर हो जाती है।

डिजिटलीकरण और बाज़ार पहुँच की पहलकदमियां

एमएसएमई की प्रतिस्पर्धिता के लिए डिजिटल एकीकरण अब तेज़ी से एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। यह उद्यमों को सरकारी खरीद बाज़ारों तक पहुँचने, भुगतान जल्दी प्राप्त करने, अनुपालन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और अपने ग्राहक आधार का विस्तार करने में सक्षम बनाता है। सरकार ने एमएसएमई को उनके परिचालन जीवनचक्र के हर चरण पर सहायता प्रदान करने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार किया है।

एमएसएमई के लिए डिजिटल इंडिया सहायता

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत, सरकार ने डिजिटल अवसंरचना को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसका उद्देश्य मांग के आधार पर शासन और सेवाएं प्रदान करना, तथा नागरिकों और उद्यमों के डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देना भी है। एमएसएमई के लिए, डिजिटल सक्षमता का अर्थ है बेहतर बाज़ार पहुंच, बेहतर वित्तीय समावेशन और अनुपालन में अधिक सुगमता।

प्रमुख एमएसएमई डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

एमएसएमई के ​​औपचारिकरण, वित्तपोषण, बाज़ार संपर्क और विवाद समाधान में सहायता के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का एक व्यापक तंत्र विकसित किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • उद्यम पोर्टल: ऑनलाइन एमएसएमई  पंजीकरण और उद्यम पंजीकरण संख्या  जारी करने के लिए;
  • गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम): सार्वजनिक खरीद के लिए और एमएसएमई को सीधे सरकारी खरीदारों को उत्पाद बेचने में सक्षम बनाने के लिए;
  • ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरइडीएस): कई वित्तदाताओं के माध्यम से इनवॉइस वित्तपोषण की सुविधा प्रदान करने के लिए;
  • एमएसएमई चैंपियंस पोर्टल: शिकायत निवारण और मार्गदर्शन और सहयोग के लिए;
  • एमएसएमई संबंध: एमएसएमई से की जाने वाली सार्वजनिक खरीद की निगरानी के लिए;
  • पीएमइजीपी पोर्टल: पीएमइजीपी-समर्थित परियोजनाओं के आवेदन, अनुमोदन और निगरानी के लिए;
  • पीएम विश्वकर्मा पोर्टल: पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के पंजीकरण और सहायता के लिए; और
  • ऑनलाइन डिस्प्यूट रेसोलुशन पोर्टल: विवादों के डिजिटल समाधान के लिए।

उद्यमिता और आजीविका प्रोत्साहन योजनाएं

प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)

पीएमईजीपी, एमएसएमई मंत्रालय की एक प्रमुख क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के माध्यम से लागू किया जाता है। राज्य स्तर पर, यह केवीआईसी कार्यालयों, राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्डों (केवीआईबी) और जिला उद्योग केंद्रों के माध्यम से संचालित होती है। इस योजना का उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में सहायता करके स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए ‘मार्जिन मनी’ सब्सिडी के पात्र परियोजना की अधिकतम लागत 50 लाख रुपये और सेवा/व्यवसाय क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये है। मार्जिन मनी सब्सिडी सरकार द्वारा दी जाने वाली एक वित्तीय सहायता है, जो नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण पर ‘बैक-एंडेड’ सब्सिडी (ऋण चुकाने के दौरान मिलने वाली छूट) के रूप में प्रदान की जाती है।

इस योजना के तहत, लाभार्थी की श्रेणी और स्थान के आधार पर सब्सिडी अलग-अलग होती है। विशेष श्रेणियों के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में सब्सिडी परियोजना लागत का 35% है। शहरी क्षेत्रों में यह 25% है।

विशेष श्रेणी में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिलाएं, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग व्यक्ति और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, पहाड़ी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के आवेदक शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 तक, पीएमइजीपी ने 5.8 लाख से अधिक परियोजनाओं की स्थापना में सहायता की है। इसके तहत 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इसी अवधि के दौरान, 4 लाख से अधिक इकाइयों को 13,450 करोड़ रुपये से अधिक की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई है। इससे लगभग 36.3 लाख लोगों के लिए रोज़गार पैदा होने का अनुमान है।

पीएम विश्वकर्मा योजना

पीएम विश्वकर्मा योजना (2023) उन कारीगरों और शिल्पकारों को शुरू से आखिर तक पूरी मदद देती है, जो अपने हाथों और औजारों से काम करते हैं। यह योजना 18 पारंपरिक व्यापार क्षेत्रों में सहायता का एक व्यापक पैकेज प्रदान करती है। इसमें पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और आईडी कार्ड के माध्यम से औपचारिक पहचान देना शामिल है। यह योजना 5-7 दिनों के बुनियादी प्रशिक्षण और 15 दिन या उससे अधिक के उन्नत प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल उन्नयन का अवसर भी देती है। योजना के तहत 500 रुपये प्रति दिन का वजीफा (स्टाइपेंड) भी दिया जाता है। इसके अलावा, लाभार्थियों को ई-वाउचर के माध्यम से 15,000 रुपये तक का टूलकिट प्रोत्साहन और बाजार लिंकेज सहायता भी प्राप्त होती है।

इसके अंतर्गत 3 लाख रुपये तक का बिना किसी गारंटी के उद्यम विकास ऋण दो किस्तों में प्रदान किया जाता है: पहली किस्त 1 लाख रुपये की और दूसरी 2 लाख रुपये की। इनकी अवधि क्रमशः 18 महीने और 30 महीने होती है। ये ऋण 5% की रियायती ब्याज दर पर दिए जाते हैं, जिसमें सरकार 8% की ब्याज छूट प्रदान करती है।

मार्च 2026 तक, पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 30 लाख से अधिक कारीगरों ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 26.7 लाख से अधिक लाभार्थियों ने अपने कौशल का सत्यापन पूरा कर लिया है, जबकि 23.7 लाख से अधिक लाभार्थी बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि यह योजना कौशल उन्नयन पर कितना ज़ोर देती है।  इसके अतिरिक्त, लगभग 5,050 करोड़ रुपये मूल्य के करीब 5.9 लाख ऋण स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही, टूलकिट प्रोत्साहन और उद्यम विकास में सहायता के लिए 25.8 लाख से अधिक ई-वाउचर जारी किए गए हैं।

 

एक मज़बूत एमएसएमई इकोसिस्टम की ओर

एमएसएमई को मज़बूत बनाने के लिए सरकार का नज़रिया, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में, एक व्यापक रणनीति को दिखाता है। यह ऋण, अनुपालन, औपचारिकीकरण और बाजार पहुंच से जुड़ी संरचनात्मक बाधाओं को दूर करता है। केंद्रीय बजट 2026-27 के तहत 10,000 करोड़ रुपये के ‘एसएमइ ग्रोथ फंड’ और ‘एसआरआई फंड’ के अतिरिक्त आवंटन ने इक्विटी सहायता को और अधिक मजबूती प्रदान की है। साथ ही, अब सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए ‘ट्रेड्स’ (टीआरइडीएस) को अनिवार्य कर दिया गया है। ये उपाय विकसित होती क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ कर रहे हैं।

आगे चलकर, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, वित्तीय संस्थानों और ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली एजेंसियों के बीच लगातार तालमेल बना रहना बहुत ज़रूरी होगा। इससे यह पक्का होगा कि इन योजनाओं का फ़ायदा सबसे निचले स्तर के उद्यमियों, कारीगरों, ग्रामीण व्यापारियों और पहली पीढ़ी के छोटे-मोटे कारोबारियों तक पहुँचे। ये सभी हितधारक भारत के आत्मनिर्भर आर्थिक विकास की बुनियाद का निर्माण करते हैं।

संदर्भ

वित्त मंत्रालय

https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=1898880&reg=3&lang=2

एमएसएमई

https://dashboard.msme.gov.in/?utm

https://www.cgtmse.in/Home/VS/3

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2099687&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2209712&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238984&reg=6&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1943193&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=172056&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1881703&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2153722&reg=3&lang=2

https://msme.gov.in/1-prime-ministers-employment-generation-programme-pmegp

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1795121&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1959098&reg=3&lang=2

डीडी न्यूज़

https://ddnews.gov.in/en/union-budget-2026-27-puts-msmes-at-the-core-of-indias-global-growth-strategy/

पीआईबी शोध

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