पहाड़ों में ऊंचाई वाले जगह पर पाये जाते हे काफल का पेड़ की उचाई लगभग दस बारह मीटर ऊंचा होता हे काफल चेत के महीने से पकने सुरु हो जाते और वैसाख के महीने तक काफल मिलता हे जंगलो में लग भग हर पहाड़ी दोस्तों ने इस फल को खाया होगा
काफल उत्तराखंड का एक बहुत ही मन पसंद और काफी स्वदिस्ट फल हे यह फल खाने में बहुत ही अच्छा लगता हे काफल लगभग उत्तराखण्ड के काफी जगह में पाया जाता हे काफल सेहत के लिए काफी फायदे मंद होते हे इसको खाने से गर्मी नही लगती हे और पेट की कई बीमारियों को ख़त्म करता है और काफल को भगवान का फल भी मन गया है
काफल से बहुत सारी बीमारिया दूर होती हे इस लिए आप लोग भी काफल को खाये और बिमारियो से बचे
काफल बस इन्ही दो महीनो में पाया जाता हे उस समय काफी गर्मी होती हे गांवो में गेहू की फसल हुयी होती हे और लोग टाइम निकाल के जंगलो में काफल लेने के लिए जाते हे लोग बड़ी दूर दराज के गांव से काफल के लिए जंगलो में जाते हे बचपन में बहुत ही आनंद आता था सभी अपनी अपनी टोलिया के साथ काफल लेने जाते थे और कई लोग पूरी फेमली के साथ काफल को लेने जाते हे जंगलो में
और उस समय जंगलो में काफी सोर गुल एक अलग ही प्रकार की रौनक होती हे
और काफल को बीनने में काफी दिक्कत भी आती हे इनकी टहनियां काफी नाजुक और कच्ची रहती हे इनको बड़ी सावधानी से निकलना पड़ता हे
और उस समय जंगली जानवर भी इन फलो को खाने के लिए जंगलो में आते हे क्योंकि उस टाइम पर केवल यही फल होता हे
जंगली जानवरो में रीख़ बन्दर लंगूर आदि कई प्रकार के जंगली जानवर इस फल को खाने के लिए आते हे
उस समय पर स्कूल और कॉलेजो की छुटिया पड़ी होती हे जो हमारे पहाड़ी भाई बंदु दूर विदेशो में अपने परिवार के साथ रहते हे उस टाइम पर सभी लोग अपने अपने गांव की और चल देते हे जो मौसम हमारे पहाड़ो में उस समय होता हे शायद कही नही होता हे ठंडी हवा ठंडा पानी सभी प्रकार की सुविधा होती हे गांवो में कूलर पंखें या फ्रिज की आवश्यकता बहुत ही कम होती हे
आप लोग भी जरूर जाएं हमारी देव भूमि उत्तराखंड में इस मौसम में मजे लीजिये हमारे पहाड़ो की सुद हवा ठंडा पानी और काफल भी खाये
आशा करता हु आप लोगो को मेरी दो लाइन पसंद आयी होगी
लेखक सर्वेश्वर सिंह रावत
जय देव भूमि उत्तराखंड
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