उत्तराखंड देश

सीबीआई की हनक दिखाने से नहीं अपितु जनांकांक्षायें साकार  करने से होती है लोकशाही मजबूत

मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को 28 साल बाद भी सजा न देने के प्रश्न उठाने पर गुनाहगारों को सजा देने के बजाय सरकार ने आंदोलनकारी संगठनों को दिखाई सीबीआई की हनक

देवसिंह रावत 

इस सप्ताह 2नवम्बर 2023 की दोपहरी को डाकिये ने सीबीआई द्वारा उतराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति के लिये  पंजीकृत डाक से भेजा गोपनीय सीबीआई की मुहर युक्त पत्र की प्राप्ति पर हस्ताक्षर कराया, तो मुझे अपनी आशंका सच होती दिखी। पत्र खोला तो आशंका सच साबित हुई कि सरकार ने अपनी हनक दिखाने के लिये यह सीबीआई वाला हथकंडा अपनाया। मैं हैरान था कि भारतीय संस्कृति के स्वयंभू ध्वजवाहक होने का दावा करने वाली भाजपा की मोदी सरकार के रणनीतिकारों को आखिर इतनी भी समझमें नहीं आती है कि ‘करम गति टारे नाहीं टरी….जो जस करई तस फल चाखा’। यहां रावण, कंस आदि महाबली भी महाकाल के दण्ड विधान को नहीं बदल पाये। इसके बाबजूद उतराखण्डियों को जो मुजफ्फरनगर काण्ड के गुनाहगारों को सजा दिलाने  में देश की व्यवस्था असफल रही ? इसका प्रश्न उठाने के बाद अगर देश के हुक्मरानों में जरा सी भी नैतिकता रहती तो वह अपनी भूल सुधारने का काम करते। जनता से माफी मांगते। जीवित बचे हुये इस काण्ड के गुनाहगारों को 29 साल बाद तो सजा देने की ईमानदारी से पहल करते।
सरकार में आसीन लोगों का इस मामले में गलत आंकलन है कि न्याय की फरियाद करने वाले लोगों को न्याय देने के बजाय सत्ता की हनक के प्रतीक सीबीआई का पत्र भेज कर मुंहबंद करने अपरोक्ष संकेत दिया।
मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को सजा की गुहार करने वालों को सीबीआई की हनक दिखाने सरकारी कदम की राज्य गठन आंदोलनकारी संगठनों, पत्रकारों, समाजसेवियों व प्रबुद्ध नागरिकों ने कडी भर्त्सना की। सभी ने एक स्वर में कहा कि विगत 28 सालों से उतराखण्डी 2 अक्टूबर  को संसद की चौखट पर काला दिवस मना कर जहां एक तरफ देश के हुक्मरानों को इस काण्ड के गुनाहगारों को सजा न दिये जाने के लिये धिक्कारते हुये  राष्ट्रपति ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाते हुए शहीदों व आंदोलनकारियों की स्मृति को सादर नमन करते है।  हर साल राष्ट्रपति भवन सचिवालय या गृहमंत्रालय या प्रांत के मुख्य सचिव को हमारी गुहार रूपि ज्ञापन प्रेषित करने का संदेश पत्र डाक से मिलता रहा। परन्तु पहली बार इस बार सरकार ने सीबीआई द्वारा ऐसा संदेशात्मक पत्र भेजा जो अप्रत्यक्ष रूप से संदेश कम सत्ता की हनक दिखाना ज्यादा प्रतीक होती है।
सत्तामद में चूर लोग न  विवेक से कार्य करते हुये मर्यादाओं का पालन करते हैं व नहीं इतिहास से सबक लेते हैं। इसी का नतीजा होता है सीबीआई जैसा पत्र भेजने का काम।
जैसे ही मुझे यह पत्र मिला। मैं अपने कार्यालय में पंहुच कर वहां से एक विडियों संदेश बनाया। जो प्यारा उतराखण्ड यू टयूब चैनल से प्रमुखता से प्रसारित कराया। यह संदेश फरियादियों को न्याय देने के बजाय सीबीआई का पत्र भेज कर अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता की हनक दिखाने वाले सत्तामदों के लिये था। यह खबर उतराखण्ड सहित देश की राजधानी में सक्रिय व जागरूक उतराखण्डियों तक पंहुची। सबने एक स्वर में सरकार के इस कदम की भर्त्सना की। उतराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति सहित सभी आंदोलनकारी संगठनों ने एक स्वर में सरकार की इस कदम की भर्त्सना की।सामान्य सूचना देने सा लगने वाला यह पत्र परोक्ष रूप से सत्ता की हनक दिखाने  के उदेश्य से भिजवाया गया।
इस खबर को सुनते ही देश के वरिष्ठ पत्रकार व खादी बोर्ड के पूर्व निदेशक बी आर चौहान ने तुरंत दूरभाष से इस प्रकरण की कडी निंदा करते हुये सरकार को अपना स्पष्ट व बहादूरी से प्रत्युतर देने के लिये मुझे धन्यवाद दिया।
इसकी सूचना मिलते ही उतराखण्ड राज्य गठन आंदोलन के वरिष्ठ व शीर्ष  आंदोलनकारी  नेता हरिपाल रावत भी यह खबर सुन कर स्तब्ध रह गये। उन्होने सरकार के इस कृत्य की कड़ी निंदा की। श्री रावत उतराखण्ड महासभा के अध्यक्ष हैं। इसकी खबर सुनते ही उतराखण्ड राज्य गठन आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर व देश के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश नौटियाल ने कहा कि ऐसा पत्र आज तक किसी सरकार ने नहीं भेजा। वेसे भी राष्ट्रपति को भेजे गये ज्ञापन में सीबीआई कहां से आ गयी।
इस प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया प्रकट करते हुये प्रेस क्लब आफ इंडिया की वर्तमान कार्यकारी के सदस्य व वरिष्ठ पत्रकार सुनील नेगी ने दो टूक शब्दों में इस सरकार द्वारा फरियादी को धमकाना जैसा ही है। आम जनता सीबीआई के नाम से सहम जाती है। उन्होने कहा कि यह अप्रत्यक्ष रूप से आंदोलनकारियों का मूंह बंद कराने जैसा कदम है। उतराखण्ड आंदोलनकारियों के साथ आम जनता को सरकार की इस धृष्टता का प्रमुखता से विरोध करना चाहिये। सरकार के इस कदम का प्रेस क्लब आफ इंडिया के सदस्य व उतराखण्ड राज्य गठन आंदोलन के समर्पित आंदोलनकारी रहे राजेन्द्र रतूडी ने भी निंदा की।
वहीं सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता व उतराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के संयोजक अवतार रावत तथा वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता खुशहाल सिंह बिष्ट ने भी इस पर हैरानी प्रकट करते हुये सरकार के इस कदम की कडी भर्त्सना की।
वहीं उतराखण्ड राज्य गठन आंदोलन के वरिष्ठ आंदोंलनकारी व उतराखण्ड राज्य लोक मंच के अध्यक्ष बृजमोहन उप्रेती ने भी सरकार के इस कदम की निंदा करते हुये कहा कि सरकार ऐसे कदम उठा कर आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति के संयोजक देवसिंह रावत को भी बडा नेता बना दिया। उन्होने सरकार पर कटाक्ष करते हुये कहा कि वर्तमान में सरकार अपने विरोधी नेताओं को सीबीआई व ईडी की हनक दिखा कर ही चूप करा रही है।
इस प्रकरण का राज्य गठन आंदोलन के वरिश्ठ आंदोलनकारी रवींद्र वर्तवाल,अनिल पंत, राज्य गठन आंदोलन के प्रखर आंदोलनकारी धौलाखंडी, शिवसिंह रावत,परमवीर सिंह रावत,विनोद पंत, गांधीवादी सर्वोदयी नेता डंगवाल, साहित्यकार गुमान सिंह रावत,रवींद्र सिंह चौहान सहित अनैक आंदोलनकारियों ने सरकार के इस नजरिये की भर्त्सना की। आंदोलनकारियों ने सरकार को साफ संदेश दिया कि सरकार इस मुगालते में न रहे कि सीबीआई का पत्र भेज कर राज्य गठन आंदोलनकारियों की जनहित की आवाज को सरकार दबाने में सफल होगी। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार के इस कदम से आंदोलनकारी और मजबूती से उतराखण्ड के हक हकूकों के लिये आवाज उठायेंगे। खासकर मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को सजा दिलाने, राजधानी गैरसैंण घोषित करने, भू कानून व मूल निवास कानून को जनभावनाओं के अनरूप बनाना, उतराखण्ड के युवाओं को प्रदेश की निजी व सरकारी सेवाओं में 90 प्रतिशत रोजगार देने सहित अन्य मांगों को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।
गौरतलब है कि मैं इस पखवाडे अपने गांव उतराखण्ड की एक सप्ताह की यात्रा के बाद विश्व के सबसे बडे राज्य की राजधानी लखनऊ व सृष्टि की सात पावन पुरियों में से अग्रणीय पुरी अयोध्या के दर्शन यात्रा करके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली वापस लोट रहा था कि अचानक मेरे शकरपुर दिल्ली कार्यालय क्षेत्र के डाकिये का दूरभाष आया कि आपका  पत्र आया है। तब मुझे स्मरण आया कि चंद दिन पहले मुझे एक फोन आया कि आपका पत्र वापस आ गया है? मैने पूछा कि आप कहां से बोल रहे हो, तो फोन कर्त्ता ने कहा कि सीबीआई से  बोल रहा हूॅं। एक पल के लिये मैने सोचा कि शायद कोई मित्र मेरे से मजाक कर रहा है। मेने कहा कि यह किस संदर्भ में है और इस पत्र मेरा पता क्या लिखा है? तब उन्होने कहा संदर्भ का मुझे ज्ञात नहीं परन्तु जैसे ही उन्होने उतराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति  के लिये यू -203 बताया तो मैने उनसे कहा कि आप विकास मार्ग षकर पुर चौथी मंजिल दिल्ली-92 भी लिख दो । मुझे विश्वास हो गया कि शायद यह 2 अक्टूबर 2023 को हमने जो काला दिवस जंतर मंतर पर मनाने के बाद ज्ञापन राश्टपति को दिया था। शायद सरकार ने अपनी हनक दिखाने के लिये यह पत्र विगत 28 साल की तरह प्रत्युतर न दे कर सीबीआई का पत्र गोलमोल भाषा वाला पत्र भिजवाया। यह पत्र भले ही मेरे नाम से नहीं भेजा गया। राष्ट्रपति को भेजे 2 अक्टूबर 2023 के काला दिवस वाले ज्ञापन पर करीब 3 दर्जन से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किये थे।
उतराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति के प्रमुख देवसिंह रावत, इस समिति के प्रमुख संगठन उतराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा खुशहाल सिंह बिष्ट, उतराखण्ड महासभा के अध्यक्ष हरिपाल रावत, भाजपा नेता विनोद बछेती,  उतराखण्ड जनमोर्चा के एस एन बसलियाल, उतराखण्ड राज्य लोकमंच के पंचम सिंह रावत मास्टर बलोदी, संयुक्त संघर्ष मिति के धीरेंद्र प्रताप व मनमोहन,  आदि के नाम न लिख कर बहुत ही चालाकी से इस ज्ञापन के पीछे हस्ताक्षर करने वाले दिनेश के नाम का उल्लेख करते हुये इस गोपनीय व पंजीकृत पत्र को दिनेश एवं अन्य के नाम से भेजा गया। इसमें संगठन का नाम लिखा होने के कारण मैने यह पत्र स्वीकार किया। क्योंकि इस उतराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति का संयोजक व प्रेषित किया गया पता मेरा ही है। इसके साथ 27 अक्टूबर 2023 को सीबीआई के नाम से आये दूरभाष 9711252382 फोन से मुझे ही फोन आने के कारण मेने यह पत्र स्वीकारा। असल में यह पत्र मुजफ्फरनगर काण्ड के गुनाहगारों को 28 साल बाद भी सजा न देने वाली व्यवस्था को धिक्कारने वाले राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन के जवाब में भी सरकार द्वारा अपनी हनक दिखाने के लिये भेजा गया। जिस मनसा से सरकार ने यह पत्र आंदोलनकारियों का मनौबल तोड़ने के उद्देश्य से भेजा गया था,उसको आंदोलनकारियों ने सिरे से नकार दिया।आंदोलनकारियों ने कहा कि उतराखण्डियों के साहस को मुलायम व राव का अमानवीय दमन भी नहीं तोड़ सका। बेहतर होता सरकार अपनी भूल सुधारते हुये गुनाहगारों को सजा देने के साथ राज्य गठन की जनांकांक्षायें साकार करने का काम करे तो तभी लोकशाही मजबूत होगी।

About the author

pyarauttarakhand5