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अमित शाह के किसानी दाव से होगा विपक्ष चारों खाने चित्त!

राकेश टिकैत सहित 13 किसान नेताओं से आज रात को मिलेंगे अमित शाह और करेंगे किसानों की समस्याओं का समाधान!

देव सिंह रावत

आज 8 दिसंबर को किसानों के आह्वान पर 22 और विपक्षी दलों के समर्थन से देश व्यापी भारत बंद का आयोजन किया गया।
वहीं दूसरी तरफ पूरे देश की नजरें 9 दिसंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में किसान नेताओं व भारत सरकार के बीच होने वाली बैठक पर लगी हुई है।

वहीं देश के प्रबुद्ध लोग इस बात से बेहद आहत है कि करना महामारी और तालाबंदी के दंश पटरी से उतर चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के बजाय विपक्षी दल भारत बंद जैसे सियासी दांव चलकर देश की अर्थव्यवस्था को गहरा धक्का दे रहे हैं।

लोग इस बात से भी आहत है किसान आंदोलन की आड़ में विपक्षी दल सियासी रोटियां सेकने में लगा हुआ है वही सरकार भी सियासी दलों के इस कदम से नाखुश है।

किसानों द्वारा दिल्ली की घेराबंदी के 12 दिन भाजपा व किसानों के नाम पर एकजुट 24 विपक्षी दलों के बीच भारत बंद के नाम पर शह और मात का खेल जारी रहा।

दिल्ली से सबसे चौंकाने वाली खबर यह आ रही है कि किसान नेता भारतीय किसान संगठन के वरिष्ठ नेता राकेश टिकैत,गुरु नाम सिंह, हनन मुलाकात, बलवीर सिंह, मनजीत सिंह, बूटा सिंह, हरेंद्र सिंह, दर्शन पाल, कुलवंत सिंह बौद्ध सिंह, किसान नेता रूद्र सिंह मनसा शिवकुमार जैसे दिग्गज किसान नेता आज शाम 7:00 बजे के बाद भारत के गृह मंत्री अमित शाह से वार्ता कर रहे हैं।

भले ही मीडिया में राकेश टिकैत सहित 13 किसान नेता गृहमंत्री से मिलने जाने पर दो टूक शब्दों में कह रहे हैं कि उनकी मांग रही है और गृहमंत्री से किसान हितों की ही बात करेंगे वही अपुष्ट सूत्रों से यह भी खबर आ रही है कि इस बैठक के बाद अगर किसानों की समस्या को स्वीकार करने का ऐलान व आश्वासन केंद्रीय गृह मंत्री किसान नेताओं को देते हैं तो किसान अपना आंदोलन भी स्थगित कर सकते हैं।
भारतीय किसान संघ का बंद को समर्थन नहीं था वही हरियाणा के कई किसान नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलकर उन्हें किसान हितों के नाम पर विपक्षी दलों की तथाकथित राजनीति खिलवाड़ के खिलाफ किसान आक्रोशित हैं ।यह देखा जा रहा है कि इस किसान आंदोलन में सियासी दलों की कूदने के बाद किसानों के संगठन में कहीं दो फाड़ ना हो जाए।
जहां किसान मोदी सरकार से हाल में पारित तीनों किसान कानूनों को वापस लेने व न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित अन्य मांगों को पूरा करने तक आंदोलन करने की हुंकार भर रहा है वही मोदी सरकार किसानों के हित की रक्षा के लिए तीनों कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार है तथा अन्य मांगों पर भी निदान करना चाहता है परंतु किसान अपना आंदोलन अपनी मांगे पूरी होने तक जारी रखने की ताल ठोक रहा है इसी को देखते हुए विपक्ष भी मोदी सरकार के विरोध में आए हुए इस अवसर को अपने हाथों से नहीं जाने देना चाहता है और वह मोदी सरकार पर निरंतर प्रहार कर रहा है इसी क्रम में जहां 22 विपक्षी दलों ने किसानों द्वारा आहुत 8दिसंबर देने का ऐलान किया ।वहीं शरद पवार के नेतृत्व में चार प्रमुख विपक्षी नेता कल नो दिसंबर को सायंकाल राष्ट्रपति से मिलकर कृषि कानूनों में किसानों के साथ हुई नाइंसाफी के बारे में फरियाद करेंगे वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर विपक्षी दलों पर किसानों को गुमराह करके देश में माहौल खराब करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं विपक्षी दल किसानों के साथ खड़े होने की अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह बताकर आंदोलन में पूरी तरह से कूद पड़ा है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी कह रहे हैं कि हम अन्य दाताओं के आंदोलन को समर्थन करते हैं।
यह देख कर लग रहा है
कि भारतीय जनता पार्टी व मोदी सरकार के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह विपक्ष को ऐसी पटकनी देने का रणनीति बना चुके हैं,जिससे विपक्ष चारों खाने चित हो जाए।
किसान नेताओं के साथ अमित शाह की की वार्ता कहीं इसी दिशा की तरफ एक निर्णायक दाव  तो नहीं है?
इस खबर की भनक लगते ही जहां किसानों में खलबली मच गई है वहां विपक्षी नेताओं की चेहरे की रौनक ओझल हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी पहले से ही योगेंद्र यादव सहित अनेक लोगों पर मोदी सरकार का अंध विरोध करने का आरोप लगा चुकी है और वह किसान आंदोलन की आड़ में अपना छुपा हुआ एजेंडा चलाने का भी आरोप लगाती रही अगर गृहमंत्री अमित शाह किशन नेताओं से मिलकर किसानों की समस्याओं का निदान करने का निर्णायक दांव चलकर विरोधियों को चारों खाने चित कर सकते हैं।
सरकार इस बात से बहुत हैरान है कि उसके बार-बार वार्ता करने के बाद भी किसान संगठन अपने आंदोलन को कम करने के बजाय तेज कर रहे हैं इसका उदाहरण आज भारत बंद के रूप में देखा गया सामान्यतः वार्ता के दौरान इस प्रकार की कोई गतिविधियां नहीं की जाती है जिससे वार्ता का माहौल बिगड़ परंतु किसान आंदोलन की आड़ में विपक्षी दलों की घुसपैठ से किसान आंदोलन जिस दिशा में जा रहा है उसका सही निपटने के लिए शायद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह कदम उठाना जरूरी समझा हो।
अमित शाह और किसान नेताओं के बीच वार्ता क्या रंग दिखाती है यह कल कृषि मंत्री से होने वाली किसान नेताओं की वार्ता के बाद साफ हो जाएगा।
परंतु आज अमित शाह और किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में 13 किसान नेताओं की मुलाकात से देश में चल रही किसान आंदोलन सियासत में भारी हड़कंप मच गया है।

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