उत्तराखंड देश

नजफगढ़ की दामिनी हो या मुजफ्फरनगर कांड के पीड़ित,भारत में आम जनमानस को न्याय क्यों नहीं मिलता?

आज देश की आम जनता इस बात से त्रस्त है और हैरान है कि भारत में आम जनमानस को न्याय क्यों नहीं मिलता? यह सवाल आज दिल्ली नजफगढ़ की दामिनी के गुनाहगारों को सजा न मिलने पर इंटरनेट पर संवाद मंच पर बड़ी तेजी से उठ रहा है ।लोग इस बात से हैरान हैं कि 9फरवरी 2012 को नजफगढ़ की दामिनी के साथ जघन्य कृत्य करने वाले गुनाहगारों को जिनको द्वारका कोर्ट व दिल्ली हाई कोर्ट 2014 फांसी की सजा सालों पहले दे चुकी है, उन गुनाहगारों को सजा देने में सर्वोच्च न्यायालय इतना लंबा समय क्यों लगा रहा है ।

इस मामले को देश की राजनीतिक पार्टियां महिला संगठन मजबूती से क्यों नहीं उठा रहे हैं। इसी समस्या पर अपने विचार प्रकट कर रहे हैं प्रखर आंदोलनकारी देव सिंह रावत। श्री रावत ने राम जन्मभूमि मामला मुजफ्फरनगर कांड के मामला आज तक देश में भारतीय न्याय व्यवस्था स्थापित न होने के कारण आम जनता को न्याय नहीं मिलता है यह न्याय प्रणाली पूरी तरह से अंग्रेजों की न्याय प्रणाली पर आधारित है अंग्रेजों ने भारत में शोषण दमन और भारत को गुलाम बनाए रखने के लिए जो व्यवस्था यहां लागू की थी वही जारी है। भारत में न भारतीय भाषाओं में न्याय मिल सकता है नहीं मानक शिक्षा ,रोजगार व शासन । शर्मनाक बात है कि अंग्रेजों को भारत छोड़े हुए 74 साल हो गए परंतु देश की पूरी व्यवस्था में आज उसी अंग्रेजी तंत्र की जकड़ में है। यहां गरीब,असहाय व आम आदमी को न्याय मिले इसके लिए व्यवस्था की कोई जवाबदेही नहीं है ।जब तक न्यायालयों में न्यायाधीशों की जवाबदेही व व्यवस्था की जवाबदेही स्थापित नहीं होगी, तब तक केवल न्याय के नाम पर धन पशुओं व प्रभावशाली लोगों के हाथ का खिलौना बन कर रह जाएगा और आम जनता नजफगढ़ की दामिनी की तरह न्याय की आशा में दर-दर भटकता रहेगा। इसलिए आमजन को न्याय देने के लिए जरूरी है भारत में भारतीय न्याय प्रणाली की, व्यवस्था की, तंत्र की और जवाबदेही और पारदर्शिता की।

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