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कोरोना योद्धाओं का अपमान क्यों

कोरोना महामारी काल में उतराखण्ड सहित देश के सैकड़ों शहरों में  भयाक्रांत व मजबूर लाखों जरूरतमंदों को भोजन इत्यादि वितरण करके मनोबल बनाए रखने वाली मानव उत्थान सेवा समिति के प्रमुख ध्वजवाहक सतपाल महाराज और उनके परिजन के कोरोना  पीड़ित होने पर मानवीय दृष्टिकोण के बजाय राजनैतिक द्वेष व दुराग्रह  पूर्ण आरोप लगाकर अपमानित किया जा रहा है ।

उत्तराखंड के कबीना मंत्री  सतपाल महाराज, उनकी धर्मपत्नी पूर्व मंत्री अमृता रावत व उनके परिजन सहित 22 लोगों पाये गये कोरोना से पीड़ित होने से शासन प्रशासन में मचा हड़कंप,

प्यारा उत्तराखंड डॉट कॉम

उत्तराखंड के कबीना मंत्री सतपाल महाराज, उनकी धर्मपत्नी अमृता रावत व परिजनो सहित 22 लोगों को कोरोना की बीमारी से पीड़ित पाये जाने से जहां देश-विदेश में लाखों लोग उनकी शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं उनके घोर विरोधी भी इस वैश्विक महामारी से  उनके शीघ्र स्वास्थ्य स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

 पर वही चंद ऐसे लोग भी हैं जो दुराग्रह व अमानवीय ढंग से कोरना महामारी से त्रस्त जरूरतमंद लोगों की सेवा में अपना पूरा परिवार सहित संस्था को समर्पित करने वाले मानव उत्थान सेवा समिति के प्रमुख ध्वजवाहक सतपाल महाराज  के खिलाफ इंटरनेट मंचों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

उत्तराखंड  सहित देश के के लोग  हैरान हैं कि जिनका पूरा परिवार सहित अनेक करीबी इस बीमारी से त्रस्त लोगों को उबारने के लिए समर्पित हो ऐसे कोरोना योद्धाओं को सम्मान करने की जगह उनसे अमानवीय व्यवहार करने वाले  दुराग्रही आखिर इतने पाषाण हृदय के कैसे हो सकते हैं?

इन लोगों को इतना भी नहीं दिखाई दे रहा है कि देश विदेश में कोरोना  महामारी से त्रस्त पीड़ितों और अन्य लोगों की सेवा में जुटे कोर्णाक योद्धाओं को लोग पुष्प वर्षा कर रहे हैं उनका सम्मान कर रहे हैं वहीं देवभूमि उत्तराखंड में जहां भारतीय संस्कृति मानवीय मूल्यों की उद्गम स्थली भी मानी जाती है वहां इस प्रकार की पास आएं हृदय वाले कौन हैं?

राजनीतिक विरोध  अपनी जगह है पर  विपत्ति काल में एक मानवीय संवेदना होती है एक माननीय परंपरा है कि एक दूसरे के सुख दुख को मेें दुराग्रह से ऊपर उठकर माननीय दृष्टिकोण अपनाते।

कल्पना कीजिए कि एक चिकित्सक एक स्वास्थ्य कर्मी,एक सफाई कर्मी ,एक सुरक्षाकर्मी व इस विपत्ति काल में पीड़ितों और जरूरतमंदों की सेवा आदि में लगी स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग जो अपने व अपने परिवार के स्वास्थ्य को दाव में लगाकर इस महामारी से जनता को उबारने  में लगे हैं ,अगर इस अभियान में कोई भी योद्धा संक्रमित हो जाते हैं तो उनके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार करने वाले मानवता को भी शर्मसार करते हैं। अंध विरोध  अंध समर्थन कहीं भी उचित नहीं है हां अगर सतपाल महाराज जानबूझकर कोई गलत काम करते,प्रदेश के हित अहित करते, देश के अहित करते, लोक मर्यादाओं का अहित करते व कोरोना  महामारी के समय सभाएं करते तो वे इस  के अपराधी होते ।परंतु उनके नेतृत्व में उनकी संस्था तो सेवा भाव से जरूरतमंदों को भोजन इत्यादि वितरण करने में लगे हुए थे।जैसे ही उनको धर्मपत्नी के कोरोना संक्रमण होने की पुष्टि हुई उन्होंने खुद को एकांतवास में रख दिया।तो वेे  कैसे गुनाहगार हो गए?

उल्लेखनीय है कि 30मई को ही सतपाल महाराज की धर्मपत्नी और प्रदेश की पूर्व मंत्री अमृता रावत की जांच रिपोर्ट में करुणा से पीड़ित पाए जाने के बाद सतपाल महाराज सहित 41 लोगों को एकांतवास  गया था ।इसके साथ सभी 41 लोगों की जांच की गई थी जिसकी रिपोर्ट 31मई आई  जिसमें सतपाल महाराज सहित 22 लोगों को करना महामारी से पीड़ित बताया गया ।इस खबर के आने के बाद पूरे उत्तराखंड में ही नहीं देश विदेश में हड़कंप मच गया। इसी सप्ताह मंत्रिमंडल की बैठक में सतपाल महाराज भी सम्मिलित थे ।

इससे पहले 30  सतपाल महाराज की धर्मपत्नी  अमृता रावत  की कोरोना जांच  रिपोर्ट में  उन्हें पीड़ित बताया गया था ।

जैसे ही उत्तराखंड  शासन को 30 मई को पूर्व मंत्री अमृता रावत के कोरोना पीड़ित होने की भनक लगी शासन प्रशासन में हड़कंप मच गया । पूर्व  मंत्री अमृता रावत के पति सतपाल महाराज जो विश्व विख्यात संत होने के साथ प्रदेश सरकार में कबीना मंत्री भी हैं ।देश-विदेश में उनके लाखों भक्त हैं ।ऐसे में अमृता रावत को कोरोना पीड़ित होने से कितने लोग संक्रमित हो हो गए होंगे इसी की आशंका से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है ।
आनन-फानन में पूर्व मंत्री के निवास सर्कुलर रोड को एकांतवास घोषित किया गया।
प्रदेश के कबीना मंत्री सतपाल महाराज सहित 41 लोगों को एकांतवास पर रखा गया ।प्रशासन इस बात से भी परेशान हैं की 29 मई को ही सतपाल महाराज प्रदेश के मंत्रिमंडल की बैठक में सम्मलित हुए थे ।इससे प्रदेश के कितने बड़े स्तर पर संक्रमण होने की आशंका से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
सूत्रों के अनुसार महाराज  के मंत्रालय का सारा कामकाज  सरकारी कार्यालय से संचालित किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार 24 मई को जब अमृता रावत को अस्वस्थता की आशंका हुई तो उन्होंने इसकी जांच कराई। उस जांच में अमृता रावत कोरना से पीड़ित नहीं बताया गया ।उसके बाद शनिवार को जब निजी जांच लैब से उनकी जांच रिपोर्ट कोरोना पीड़ित की आई,तो इसकी सूचना शासन प्रशासन को दी गई और उन्हें तुरंत एकांतवास पर रखा गया।
उसके बाद स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में पूर्व मंत्री का उपचार किया जा रहा है वह सतपाल महाराज सहित 41 अन्य संपर्क में आए लोगों को एकांतवास में रखा गया है।
इसकी खबर फैलते ही देश-विदेश में सतपाल महाराज की मानव
उत्थान सेवा समिति से जुड़े लाखों अनुयायियों ने  माता अमृता रावत की शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना प्रराथनाा कर रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि पूरे भारत में कोरोना महामारी संकट के दौरान भी मानव धर्म उत्थान सेवा समिति के हजारों स्वयंसेवकों ने गरीब, मजबूर,उपेक्षित व जरूरतमंद लोगों को भोजन इत्यादि सामग्री का देश के सैकड़ों शहरों में वितरण किया।
सतपाल महाराज जहां धर्मगुरु है वहीं वे   देश के एक वरिष्ठ राजनेता भी है।  उत्तराखंड राज्य गठन आंदोलन के बड़े ध्वजवाहक रहे महाराज पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रहे महाराज। उत्तराखंड राज्य गठन के  लिये पहली बार लाल किले के प्राचीर से भारत सरकार की  वचन रुपि घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री देवगौड़ा से कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उत्तराखंड राज्य गठन के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ।
हालांकि उत्तराखंड राज्य का विधिवत गठन अटल बिहारी वाजपेई के शासनकाल में हुआ। मुजफ्फरनगर कांड के पीड़ितों को अपने नारसन से लेकर हरिद्वार प्रेम नगर आश्रम में आश्रय देने का उन्होंने  कार्य किया व
प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाने के
प्रमुख ध्वजवाहकों में एक रहे।उनके मजबूत कद काठी को देखकर प्रदेश की सभी नेता प्रायः उनसे आशंकित रहते हैं। इन्ही की जुगलबंदी के कारण राजनीतिक दलों के आका उत्तराखंड राज्य को विश्व का सर्वश्रेष्ठ सुंदर राज्य बनाने की कल्पना को धरातल पर साकार करने के लिए राजनीति में पदार्पण करने वाले सतपाल महाराज को प्रदेश का नेतृत्व नहीं सौंप पाए।
गढ़वाल लोकसभा के सांसद रहे प्रदेश के वर्तमान कबीना मंत्री सतपाल महाराज विधानसभा क्षेत्र चौबटाखाल  है।
इसी विधानसभा क्षेत्र से उनकी धर्मपत्नी अमृता रावत  जीतकर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रही ।
हंस जी महाराज व माता राजराजेश्वरी देवी के नाम से  विश्व विख्यात धर्मगुरु के चार बेटों में सबसे बड़े पुत्र सतपाल महाराज  ही  धर्म गुरू होने के साथ राजनीति में  भी दखल रखते हैं।

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