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सर्वोच्च न्यायालय ने नहीं दिया 20 मार्च को मध्य प्रदेश की विधानसभा पटल पर बहुमत सिद्ध करने का आदेश

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद कमलनाथ सरकार का जाना तय 

सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य पर विद्रोही विधायकों पर लगना चाहिए था अगला चुनाव न लड़ने का अंकुश

 प्यारा उत्तराखंड डॉट कॉम

मध्य_प्रदेश प्रकरण पर विधान सभा पटल पर कल ही #बहुमत परीक्षण का #सर्वोच्च_न्यायालय का #आदेश स्वागत योग्य।
पर #जनादेश को धता बताकर #षड्यंत्र के तहत #विधायकी से चुनाव पूर्व
#इस्तीफा देने वालों पर लगे 10 साल चुनाव न लड़ने का प्रतिबंध।

परंतु #बागी #विधायकों की स्थिति पर सर्वोच्च न्यायालय को #नजरअंदाज नहीं करना चाहिए था।
कल कल होने वाली बहुमत के परीक्षण में कमलनाथ सरकार का बचना नामुमकिन है और भाजपा हर हाल में मध्य प्रदेश में सत्तासीन होने के अपने मिशन पर सफल हो जाएगी ।कोई चमत्कार ही अब कमलनाथ सरकार को बचा पाएगा।
वहीं मध्य प्रदेश के बाद भाजपा की नजर राजस्थान पर लगेगी देखना है भाजपा राजस्थान में छत की सरकार को सत्ता चित करने में कब तक सफल होगी परंतु यह निश्चित है कि भारतीय जनता पार्टी जनादेश का सम्मान करते हुए  विधानसभा की कि अगले चुनाव का इंतजार करने के बजाय हर प्रकार से विरोधी सरकार को अपदस्थ करके सत्तासीन होने के मिशन में ही जुटी हुई है जुटी हुई है।
उल्लेखनीय है कि कई दिनों से मध्य प्रदेश मैं 20 विधायकों द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा दिए जाने के बाद कमलनाथ की सरकार खतरे में पड़ गई थी और परंतु ना भारतीय जनता पार्टी विधानसभा में अविश्वास मत प्रस्ताव रखने के लिए तैयार थी वह नहीं कमलनाथ सरकार अपना बहुमत सिद्ध करना चाहती थी इसी बीच भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटकाते हुए सर्वोच्च न्यायालय से अल्पमत में आई कमलनाथ सरकार से बहुमत सिद्ध करने की गुहार लगाई ।लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय आज 19 मार्च के सायंकाल को अपना फैसला सुनाते हुए दो टूक  आदेश दिया कि कल शाम 5:00 बजे तक कमलनाथ सरकार के बहुमत का फैसला विधानसभा के पटल में होना चाहिए ।इस पूरे प्रकरण का वीडियोग्राफी की जाए। अगर बागी विधायक बहुमत सिद्ध में आना चाहे तो बागी विधायकों को भी सुरक्षा दी जाए।

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