उत्तर प्रदेश उत्तराखंड देश

बैकुण्ठ सिधारे, डा आरसी निर्मोही

 

 

29 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के #निगमबोध_घाट में हुआ #अंतिम_संस्कार

देश की वरिष्ठ समाजसेवी, चिकित्सक, लेखक व संत डॉक्टर आर सी निर्मोही का निधन आज 29 जनवरी तड़के 3:00 बजे के करीब सपना सफदरजंग अस्पताल में हो गया। उनका अंतिम संस्कार 29 जनवरी को 12:30 बजे निगमबोध घाट में किया जाएगा ।उनके निधन की सूचना उनके दामाद हरीश चंद्र जोशी ने सुबह प्यारा उत्तराखंड के संपादक देव सिंह रावत को दिया ।
डॉक्टर निर्मोही दंपति कुछ महीनों से अस्वस्थ होने के कारण पौड़ी से अपने बेटी के पास दिल्ली आए थे और अपना उपचार कर रहे थे।

डॉक्टर निर्मोही के अन्तिम संस्कार में उनके परिजन, रिश्तेदार व मित्रों अलावा विदेश व्यापार के वरिष्ठ अधिकारियों महेश चंद्रा,प्यारा उत्तराखंड के सम्पादक देव सिंह रावत, ,उक्रांद नेता प्रताप शाही, पत्रकार डा बिहारी लाल जलंधरी, गढ़वाल_हितैषिनी_सभा के महासचिव पवन कुमार मैठानी, योगाचार्य दयाल सिंह बेलवाल,रमेश उपाध्याय आदि सम्मलित रहे।
दिल्ली की प्रतिष्ठित #गढ़वाल_हितैषिनी_सभा सहित अनेक सामाजिक व धार्मिक संगठनों से जुड़े डॉक्टर निर्मोही के निधन पर अनेक सामाजिक संगठनों और राजनीतिक व धर्म परायण में अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉक्टर निर्मोही जी के शोकाकुल परिवार में उनकी धर्मपत्नी प्रेमा देवी गौनियाल व उनकी विवाहित तीन पुत्रियों ( आशा, सविता व गीता)का पूरा परिवार है।
अपनी जन्मभूमि उतराखण्ड से गहरा लगाव रखने वाले डॉक्टर संपन्न होने के बावजूद जीवन के अंतिम दशकों में अपनी जन्म भूमि की सेवा करते हुए वही निवास करते थे।

15 मई 1938 में पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल क्षेत्र में प्रसिद्ध वैद्य डॉक्टर गौनियाल जी के घर में जन्मे डॉ रामचंद्र गौनियाल आयुर्वेद चिकित्सक की शिक्षा हरिद्वार से ग्रहण करने के बाद दिल्ली के अंबेडकरनगर दक्षिणपुरी में बहुत कई दशकों तक की वह नर सेवा को ही नारायण सेवा समझते थे ।गरीब दुखिया लाचार लोगों को बहुत ही सस्ते दर से चिकित्सा उपलब्ध कराकर कराते थे इसलिए हर दिन सुबह शाम उनके चिकित्सा स्थल पर लंबी कतारें देखी जाती थी ।भारतीय संस्कृति की ध्वजवाहक डॉक्टर निर्मोही आदरणीय समाजसेवी भी लेखक चिंतक और बहुत सहृदय और नेक इंसान थे तीन पुत्रियों के पिता डॉ निर्मोही की धर्मपत्नी प्रेमा देवी भी बहुत धर्म परायण महिला हैं और वह महिलाओं को निरंतर जागरूक करके कीर्तन मंडली से लेकर अनेक जन जागरूकता कार्यक्रम चलाती हैं ।देश के विभिन्न हिस्सों में डॉक्टर निर्मोही जी ने मंदिरों का निर्माण किया और जीवन की अंतिम बेला पर हुई पिछले कई दशकों से अपने जन्म स्थली सिल्ली सौंपखाल बीरोंखाल पौड़ी गढ़वाल में पवित्र दीवा दर्शन धाम का सृजन कर वहां न केवल जन सेवा करते थे अभी तो दीन दुखियों को मुफ्त में इलाज भी करते थे वे लोगों को जन समस्याओं के लिए व्यापक जागरण करते थे हनुमान जी के परम भक्त डॉक्टर निर्मोही को समाजसेवा से लेखक और लेखन में अनेक संस्थाओं ने सम्मानित किया जिस जिसमें प्यारा उत्तराखंड समाचार ,देवभूमि समाचार स्वतंत्र लेखक मंच ,भारतीय दलित साहित्य मंच से लेकर आने सामाजिक संगठनों ने उनको सम्मानित किया ।वह हर साल तीर्थाटन के लिए देश के विभिन्न तीर्थों का सपत्नी दर्शन यात्रा करते थे।
उत्तराखंड आंदोलन से लेकर भारतीय भाषा आंदोलन सहित सभी सामाजिक सरोकारों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले डॉक्टर निर्मोही के निधन पर प्यारा उत्तराखंड परिवार की तरफ से हार्दिक श्रद्धांजलि व शोकाकुल परिवार को हार्दिक संवेदना व्यक्त की ।

चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, क्लोज़अप

About the author

pyarauttarakhand5