उत्तराखंड देश

मुजफ्फरनगर काण्ड के गुनाहगारों को 25साल बाद सजा न दिये जाने से आहत उत्तराखण्डियों ने मनाया 2 अक्टूबर को संसद के द्वार पर काला दिवस मनाते हुए राष्ट्रपति को दिया आक्रोशपूर्ण ज्ञापन

1984 के सिख दंगो व गुजरात दंगों की जांच की तरह मुजफ्फर नगर काण्ड-94 की जांच के लिए बनाया जाय विशेष जांच आयोग

गुनाहगारों को सजा देने के बजाय शर्मनाक संरक्षण देने के लिए उत्तराखण्ड केे सभी मुख्यमंत्रियों के साथ उप्र व केन्द्र सरकार को दी लानत

नई दिल्ली,02 अक्टूबर 2019

25 साल बाद भी मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को सजा न दिये जाने से आक्रोशित उत्तराखण्डियों ने उतराखण्ड, दिल्ली सहित देश भर में 2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी जयंती के दिन काला दिवस के रूप में मनाया। मुख्य आयोजन उतराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति व 1UK सहित समस्त उतराखण्डी समाज के  बैनर तले देश की राजधानी दिल्ली में संसद की चैखट पर काला दिवस मना कर राष्ट्रपति को रोषयुक्त ज्ञापन दिया गया।
2अक्टूबर को इस मामले में हुए मुख्य आयोजन में सेकडों उतराखण्डियों ने संसद की चैखट पर शहीदों की आत्मा की शांति व शासकों को सदबुद्धि देने के लिए हवन भी किया गया। ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गयी है कि 1984 के सिख दंगों व गुजरात दंगों की तरह ही मुजफ्फरनगर काण्ड-94 के गुनाहगारों को सजा देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में एक विशेष जांच आयोग बनाया जाय।
राष्ट्रपति का ध्यान आकृष्ठ करते हुए इस रोष युक्त ज्ञापन में दो टूक शब्दों में कहा गया कि ‘उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन’ में गांधी जयंती 2 अक्टूबर 1994 को लाल किला रेली में भाग लेने आ रहे शांतिप्रिय हजारों उत्तराखण्डियों को, 1 अक्टूबर 1994 की रात्रि को, मुजफ्फरनगर स्थित रामपुर तिराहे पर अलोकतांत्रिक ढ़ग से बलात रोक कर जो अमानवीय जुल्म, व्यभिचार व कत्लेआम उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार व केन्द्र में सत्तासीन नरसिंह राव की कांग्रेसी सरकार के शह पर पुलिस प्रशासन ने किये, उससे न केवल भारतीय संस्कृति अपितु मानवता भी शर्मसार हुई। परन्तु सबसे खेद कि बात है कि जिस भारतीय गौरवशाली संस्कृति में नारी को जगत जननी का स्वरूप मानते हुए सदैव वंदनीय रही है, वहां पर नारी से व्यभिचार करने वाले सरकारी तंत्र में आसीन इस काण्ड के अपराधियों को दण्डित करने के बजाय शर्मनाक ढ़ग से संरक्षण दे कर पुरस्कृत किया गया।
सबसे हैरानी की बात है कि जिस मुजफ्फरनगर काण्ड-94 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मानवता पर कलंक बताते हुए इसे शासन द्वारा नागरिकों पर किये गये बर्बर नाजी अत्याचारों के समकक्ष रखते हुए इस काण्ड के लिए तत्कालीन मुजफ्फरनगर जनपद के जिलाधिकारी व पुलिस अधिकारियों को सीधे दोषी ठहराते हुए इनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का ऐतिहासिक फैसला दिया था। यही नहीं माननीय उच्च न्यायालय ने केन्द्र व राज्य सरकार को उत्तराखण्ड के विकास के प्रति उदासीन भैदभावपूर्ण दुरव्यवहार करने का दोषी मानते हुए दोनों सरकारों को यहां के विकास के लिए त्वरित कार्य करने का फैसला भी दिया था। जिस काण्ड पर देश की सर्वोच्च जांच ऐजेन्सी सीबीआई ने जिन अधिकारियों को दोषी ठहराया था, जिनको महिला आयोग से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दोषी मानता हो परन्तु दुर्भाग्य है कि इस देश में जहां सदैव ‘सत्यमेव जयते’ का उदघोष गुंजायमान रहता हो, वहां पर उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद अपराधियों व उनके आकाओं के हाथ इतने मजबूत रहे कि देश की न्याय व्यवस्था उनको दण्डित करने में आज 25साल बाद भी अक्षम रही है। भारतीय व्यवस्था के इसी बौनेपन से आक्रोशित देश-विदेश में रहने वाले सवा करोड़ उत्तराखंडी 1994 से निरंतर आज तक देश की व्यवस्था के शीर्षपदों पर आरूढ़ सत्तासीनों की सोई हुई आत्मा को जागृत करने के लिए एवं उनको उनके दायित्व बोध कराने के लिए 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन हर साल काला दिवस मना कर न्याय की
2 अक्टूबर को उत्तराखण्डी समाज व सभी आंदोलनकारी संगठनों के सबसे बड़ा कार्यक्रम संसद की चैखट पर काला दिवस के रूप में मनाया गया। इसका आयोजन सभी आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति व 1UK सहित समस्त उतराखण्डी समाज के बैनर तलेकिया। उत्तराखण्डी देश की व्यवस्था के साथ इस बात से आहत थे कि शहीदों के बलिदान व आंदोलनकारियों के संघर्षो से गठित उत्तराखण्ड राज्य की अब तक की कांग्रेस व भाजपा के साथ समर्थन देने वाले दलों की सरकारों ने इस काण्ड के दोषियों को सजा देने के बजाय शर्मनाक संरक्षण देने का काम किया। इसके लिए आंदोलनकारियों ने स्वामी, कोश्यारी, तिवारी, खण्डूडी, निशंक, बहुगुणा, रावत व त्रिवेन्द्र को भी उत्तराखण्डियों से किये गये इस विश्वासघात के लिए धिक्कारा । वहीं इस प्रकरण पर सपा, बसपा व कांग्रेस के अलावा इस प्रकरण पर संसद से सड़क पर घडियाली आंसू बहाने वाली भाजपा को भी इस प्रकरण के गुनाहगारों को संरक्षण देने के लिए धिक्कारा।
काला दिवस श्रद्धांजलि सभा के संयोजक देवसिंह रावत व दिनेश बिष्ट ने बताया कि 2 अक्टूबर को उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के प्रमुख संगठनों व तमाम सामाजिक संगठनो ने उत्तराखण्ड आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति व 1 UK के बैनर तले संसद की चैखट जंतर मंतर पर आयोजित इस काला दिवस में उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा, उत्तराखण्ड लोकमंच, उत्तराखण्ड जनमोर्चा, उत्तराखण्ड महासभा, उत्तराखण्ड क्रांतिदल व 1UK सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की तमाम प्रमुख सामाजिक संगठनों ने भाग लेते हुए मुजफ्फरनगर काण्ड-94 सहित राज्य गठन जनांदोलन के सभी शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए ‘उत्तराखण्ड के शहीद अमर रहे, मुजफ्फरनगर काण्ड के दोषियों को सजा दो, नरेन्द्र मोदी, त्रिवेन्द्र रावत शर्म करो’ व मुलायम सिंह को फांसी दो आदि गगनभेदी नारे लगाये। इस अवसर पर शहीदों की आत्मा की शांति के लिए पंण्डित जगमोहन सिंह रावत ने वैदिक मंत्रों से पूरे विधि विधान के साथ यज्ञ सम्पन्न किया।
इस अवसर पर आंदोलनकारियों ने उत्तराखण्ड प्रदेश की अब तक की सरकारों को प्रदेश के आत्मसम्मान व जनांकांक्षाओं को रौंदने पर कड़ी भत्र्सना करते हुए उनको राव-मुलायम से बदतर बताया। भाग लेने वाले प्रमुख लोगों में उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के देवसिंह रावत, उत्तराखण्ड महासभा के अनिल पंत, जनमोर्चा के रवीन्द्र बिष्ट, उतराखण्ड लोकमंच के बृजमोहन उप्रेती, उक्रांद के वरिष्ठ नेता प्रताप शाही, उतराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के प्रवक्ता वरिष्ठ पत्रकार अवतार नेगी,
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता संजय दरमोडा ,
चंदन नेगी, उत्तराखंड कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व सदस्य महेश चंद्रा,पूर्व दि पुलिस उपायुक्त सतीश शर्मा,विनोद नेगी,खुशहाल बिष्ट ,एस एन बसलियाल,

हर्षवर्धन खंडूरी, 1 Ukके दिनेश बिष्ट, प्रीतम सिंह जेठा,महेंद्र रावत, जगत बिष्ट, अजय बिष्ट, मोहन जोशी, महेन्द्र रावत, उषा नेगी, सचितानन्द  भट्ट,किशोर रावत, जगमोहन रावत, विनोद नेगी पत्रकार व्योमेश जुगरान, दाताराम चमोली,उत्तराखंड एकता मंच के डॉक्टर विनोद बछेती व दिगमोहन नेगी,गढ़वाल सभा के अजय बिष्ट, गंभीर सिंह नेगी , प्रभाकर पोखरियाल, दीप प्रकाश भट्ट उत्तराखंड समाज शालीमार बाग के रामप्रसाद भदूला , साहित्यकार पूर्ण चंद्र कांडपाल व घिल्डियाल ,आंदोलनकारी उमेश रावत व सचिदानंद भट्ट, जगदीश प्रसाद कुकरेती, उतराखंड  एकता मंच के शशि मोहन कोटनाला ,सुरेंद्र हाल्सी, बचन सिंह धनौला ,पत्रकार अमर चंद, संगीतकार राजेंद्र चौहान,ज्योति डंगवाल,वीरेंद्र सिंह गैडा, राजीव काला, चंदन गुसाईं, लक्ष्मण कडाकोटी,बबीता नेगी,महावीर,शशि भूषण खंडूरी, निशांत रौथान, पदम सिंह बिष्ट,आनंद जोशी, हरीश असवाल,गुडगांव से पुष्कर बिष्ट अध्यक्ष उत्तराखंड सांस्कृतिक एकता मंच स्टेट हरियाणा सुनील रावत संगठन सचिव, दर्शन सिंह रावत दिनेश ध्यानी, जगदीश कुकरेती,जगमोहन सिंह रावत, गिरधारी रावत,राजपाल पंवार, संजय नौडियाल, राकेश नेगी,श्याम प्रसाद खंतवाल, सुखदेव गुसांईं,माया रावत, चंद्रमोहन केमिनी,दयाल सिंह बिष्ट,आशा बरारा, करुणा भट्ट, रविंद्र सिंह चौहान,कमल किशोर नौटियाल प्रेमा धोनी, पत्रकार कुशाल जीना व नीलम जीना, खेल जगत में भारत का नाम रोशन करने वाली उतराखण्डी बिटिया गरिमा जोशी, पूरण जोशी,अंकिता चौहान, गजपाल रावत,कुसुम भट्ट, दलवीर सिंह रावत, हीरो बिष्ट ,उषा नेगी, देव सिंह फोनिया,सरिता देवी,,किशोर रावत,द्वारिका प्रसाद चमोली, चारु तिवारी,प्रसिद्ध लोकगायक शिवदत्त पन्त,जीत सिंह मेहरा, गुड्डी मेहरा,पत्रकार सतेन्द्र रावत, मदन भंडारी, गिरीश चंद्र भट्ट, कुंदन सिंह,दीप सिलोडी,  बलवीर सिंह नेगी, डॉक्टर बिहारीलाल  जालंधरी,रमन मंडवाल,सचिन बहुगुणा मनोज आर्य, पृथ्वी रावत, नारायण सिंह गुसाईं ,अजय रावत,  भगवती प्रसाद जुयाल,उदय ममगाई राठी, पंकज शाह ,सूरज रावत, विकास शाह,  रमेश चंद्र ,दिनेश नौटियाल ,नवीन जोशी, आप नेता हरीश अवस्थी, मोहन सिंह रावत  भानु तिवारी, दीपक धौंडियाल, विश्व हिंदू परिषद के नेता महेंद्र रावत,धीरेंद्र गुसाईं  भुवन गोस्वामी, बलवीर सिंह कन्वाल,सुनील कुमार सिंह ,मीरा रतूड़ी, प्रताप थलवाल, पंकज पैन्यूली, राज्य लोक मंच के महरौली से बलूनी जी, गायक प्रकाश कहाला व  समाजसेवी हरदा, सामाजिक संगठन उतराखण्ड मित्र मंडल आदि रहे।

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