उत्तराखंड

शिक्षक राज्य के विकास और विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अपना योगदान देंः मुख्यमंत्री श्री रावत

 मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस के वीडियो सम्मेलन से प्रदेश के 4000 शिक्षकों को किया संबोधित
निजी विद्यालयों से बेहतर स्थिति में होने के बाबजूद सरकारी विद्यालयों के प्रति लोगों में अविश्वास चिंता का विषय है

 
देहरादून(प्याउ)। उत्तराखण्ड सचिवालय से शिक्षक दिवस के दिन 5 सितम्बर को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वीडियों सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश भर से जुड़े लगभग 4000 शिक्षकों को सीधे संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वो सकारात्मक रूख अपनाते हुए राज्य के विकास और विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को स्वाध्याय के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि एक शिक्षक के एक घण्टे के स्वाध्याय का परिणाम औसतन 160 घण्टे का अध्यापन होता है। उन्होने कहा कि शिक्षा रूपी अक्षय पात्र का संचालन शिक्षकों की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने निजी विद्यालयों की अपेक्षा सरकारी विद्यालयों के प्रति अपेक्षाकृत कम रूझान पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होंने कहा उत्तराखंड में प्रति बच्चे पर जो व्यय होता है वह देश में सबसे ज्यादा है। उन्होने कहा कि क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में सर्वश्रेष्ठ अध्यापक होने के बाद भी सरकारी विद्यालयों के प्रति विश्वास में कमी है। सरकारी शिक्षकों की सेवा शर्ते, वेतन इत्यादि भी प्राइवेट स्कूलों से बेहतर होता है।
निजी विद्यालयों में जहां औसतन 25 बच्चों पर एक अध्यापक होता है, वहीं सरकारी स्कूलों में 12 बच्चों पर एक अध्यापक होता है। मुख्यमंत्री नेे राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों का आह्वान किया कि वे अपनी क्षमता एवं लगन से सरकारी विद्यालयों के प्रदर्शन को और बेहतर बनायें। उन्होने कहा कि राज्य में कुल मिलाकर 14985 प्राथमिक विद्यालय और 5088 उच्च प्राथमिक विद्यालय  हैं। इसके अतिरिक्त 2259 माध्यमिक विद्यालय  है।
प्राथमिक विद्यालयांें में 4 लाख 88 हजार 833 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जिनमें 2 लाख 22 हजार 792 बालक तथा 2 लाख 66 हजार 41 बालिकाएं हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य के प्राथमिक विद्यालयांें में बालिकाओं के बढ़ते प्रतिशत पर संतोष व्यक्त किया। लेकिन इस अवसर पर उन्होने राज्य में बालिकाओं के अपेक्षाकृत कम लिंगानुपात पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक समुदाय को इस दिशा में समाज को जागृत करने हेतु आगे आना होगा। उन्होने कई स्कूलों में एक भी विद्यार्थी न होने और कई स्कूलों में दस से भी कम विद्यार्थी होने पर चिन्ता व्यक्त करते हुए विद्यालयों की क्लबिंग का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों की क्लबिंग करके हम शिक्षकों तथा अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर सकते है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षक संगठनों से भी अपील की कि वे सरकार और समाज को अपना रचनात्मक सहयोग दें। सरकार सभी शिक्षक संगठनों का सम्मान करती है, और उनकी सभी मांगो एवं सुझावों हेतु संवेदनशील है। मुख्यमंत्री ने शिक्षक समुदाय के चुनाव, जनगणना जैसी विभिन्न लोक कल्याणकारी गतिविधियों में दिये जा रहे योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में ‘‘आधार योजना‘‘ और तकनीकि के विस्तार से इन अतिरिक्त कार्यों में कमी आयेगी। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को आगे आकर अपनी बात रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होने कहा कि शीघ्र ही वे  उलहवअ.पद के उत्तराखण्ड चैप्टर पर अपने सुझाव दे सकते हैं। साथ ही वे बउ-नं/दपब.पद  पर भी अपने सुझाव भेज सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी 13 जनपदों के शिक्षकों को सम्बोधित किया। इस वीडियो कान्फ्रेंसिंग में जनपद, ब्लाक और तहसील के 114 स्वान सेन्टर, 94 कामन सर्विस सेन्टर, 13 जिला डायट केन्द्र तथा 13 जिला एन0आई0सी0 केंद्र जुड़े हुए थे’। इस वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के शिक्षक भी सीधे जुड़े हुए थे। सचिवालय स्थित सम्मेलन कक्ष में मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय, अपर मुख्य सचिव डा0 रणवीर सिंह, शिक्षा सचिव चन्द्रशेखर भट्ट, सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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