प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र व नोकरशाह देहरादून की पंचतारा सुविधाओं के मोह व दुराग्रह से ग्रसित होकर उत्तराखण्ड राज्य गठन की जनांकांक्षाओं ,लोकशाही,चहुंमुखी विकास व देश की सुरक्षा के प्रतीक ‘गैरसैंण’को राजधानी घोषित न करके प्रदेश, देश व मोदी जी की मेहनत को रौंद रहे है
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया ज्ञापन
नई दिल्ली 11 नवंबर 2019 उत्तराखंड राज्य गठन स्थापना दिवस के अवसर पर उत्तराखंड सरकार द्वारा राजधानी गैरसैण की घोर उपेक्षा करने से आहत उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगाई उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण घोषित कराने की गुहार।
उत्तराखंड राज्य गठन आंदोलनकारी संगठनों की समय समिति के संयोजक देव सिंह रावत ने बताया कि 11 नवंबर को इस साल का ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय में सौंपा। ज्ञापन में उत्तराखंड की अब तक की तमाम सरकारों को कटघरे में रखते हुए वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सरकार पर भी उत्तराखंड की जन आकांक्षाओं व देश की सुरक्षा के प्रति उदासीन रहकर राजधानी गैरसैण न बनाने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से प्रदेश सरकार से अभिलंब जन आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राजधानी गैरसैण घोषित कराने की मांग की।
प्रधानमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
श्रीमान नरेन्द्र मोदी
प्रधानमंत्री भारत
नई दिल्ली-110001
विषय- उतराखण्ड राज्य स्थापना दिवस पर उतराखण्डी, प्रधानमंत्री मोदी से लगायी गुहार -अच्छे दिन लाने का वादा निभाओं, प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाओं
प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र व नोकरशाह देहरादून की पंचतारा सुविधाओं के मोह व दुराग्रह से ग्रसित होकर उत्तराखण्ड राज्य गठन की जनांकांक्षाओं ,लोकशाही,चहुंमुखी विकास व देश की सुरक्षा के प्रतीक ‘गैरसैंण’को राजधानी घोषित न करके प्रदेश, देश व मोदी जी की मेहनत को रौंद रहे है।
मान्यवर प्रधानमंत्री मोदी जी
जय हिंद! जय उत्तराखण्ड!
आज 9 नवम्बर को उतराखण्ड की राज्य स्थापना दिवस के ऐतिहासिक दिवस पर उतराखण्ड की सवा करोड़ जनता की तरफ से आपको हार्दिक शुभकामनाएं। आपको विदित ही है कि उतराखण्ड की देशभक्त जनता के दशकों के सतत् संघर्ष व बलिदान का सम्मान करते हुए 9 नवम्बर 2000 को तत्कालीन भाजपा नेतृत्व वाली राजग की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उत्तराखण्ड राज्य के गठन करने का ऐतिहासिक कार्य किया। परन्तु बहुत दुख की बात है कि राज्य गठन के 19 साल बीत जाने के बाबजूद प्रदेश की अब तक की तमाम सरकारों ने राज्य गठन की जनांकांक्षाओं (राजधानी गैरसैंण बनाने, मुजफ्फरनगर काण्ड-94 सहित उतराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन को अमानवीय दमन से रौंदने वाले हैवानों को सजा देने के लिए एक आयोग का गठन करने, हिमाचल सहित अन्य हिमालयी राज्यों की तरह उतराखण्ड में भी भू कानून लागू करने, मूल निवास लागू करने व समग्र विकासोनुमुख सुशासन देने ) को तत्काल साकार करने के बजाय राव व मुलायम की तरह निर्ममता से रौंदने का अलोकतांत्रिक, अमानवीय व उतराखण्ड विरोधी कृत्य किया।
19 साल हो गये हैं परन्तु इन 19 सालों में प्रदेश की सरकारों ने राज्य गठन जनांदोलन की जनांकांक्षाओं को साकार करने के बजाय उसको निर्ममता से रौंदने का ही कृत्य किया। इसका सबसे जीवंत उदाहरण है राज्य गठन के समय सर्वसम्मति से जनता व आंदोलनकारियों द्वारा एक मत से प्रदेश की राजधानी गैरसैंण को बनाने में अब तक की सभी सरकारें असफल रही है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि लोकतंत्र में जनता की सर्वसम्मत मांग ‘ राजधानी गैरसैंण’ को बलात नजरांदाज करके बलात देहरादून में राजधानी थोपी गयी। जबकि हकीकत यह है
(1)-प्रदेश में एक मात्र, विधानसभा भवन गैरसैंण के भराड़ी सैण में बना हुआ है।
(2)- गैरसैंण विधानसभा भवन में विधानसभा का शीतकालीन सत्र 2017 में सम्पन्न हो चूका है। गैरसैंण में ही विधानसभा का ग्रीष्मकालीन सत्र भी सम्पन्न हो चूका है।
(3)-उत्तराखण्ड प्रदेश का बजट सत्र2018 भी गैरसैंण में किया गया। 2019 का स्थापना दिवस विधानसभा अध्यक्ष ने गैरसैंण में मनाया।
(4) राज्य गठन जनांदोलन से पहले ही राज्य गठन आंदोलनकारियों ने सर्व सम्मति से प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाने को एकमत थी।
(5)-उत्तराखण्ड राज्य व राजधानी गैरसैंण के लिए ही प्रदेश के सवा करोड़ जनता ने ऐतिहासिक जनांदोलन किया और शहादत दी।
(6)-राज्य गठन के बाद, राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग को लेकर बाबा मोहन उत्तराखण्डी ने दी शहादत
(7)-राज्य गठन से पहले ही पूर्व उप्र सरकार द्वारा गठित रमां शंकर कौशिक आयोग द्वारा उत्तराखण्ड की राजधानी के लिएआंदोलनारियों, जनता व विशेषज्ञों से गहन चिंतन मंथन व निरीक्षण कर गैरसैंण को जनांकांक्षाओं को साकार करने वाली राजधानी घोषित की।
(8) -राज्य गठन के बाद जनभावनाओं, दीक्षित आयोग व हिमालयी राज्यों की तरह गैरसैंण बनाने के बजाय देहरादून में राजधानी बनाने के षडयंत्र के तहत ‘राजधानी चयन के लिए दीक्षित आयोग’ बनाया। गैरसैंण उत्तराखण्ड प्रदेश के मध्य में स्थित है। इस आयोग ने जानबुझ कर करोड़ों रूपये बर्बाद कर दस साल तक इसे उलझाये रखा। परन्तु इस दीक्षित आयोग ने भी दो तिहाई से अधिक लोगों ने राजधानी के लिए गैरसैंण बनाने के लिए अपना मत दिया।
(9) हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में स्वयं हरिद्वार से विधायक वरिष्ठ भाजपा नेता मदन कोशिक (नेता प्रतिपक्ष) गैरसैंण में चले विधानसभा अधिवेशन में राजधानी गैरसैंण बनाने का विधेयक विधानसभा पटल पर गैरसैंण को प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाने की मांग कर चूकेे है। परन्तु अब भाजपा का शासन होने के बाबजूद प्रदेश की भाजपा सरकार इस पर शर्मनाक मौन साधे हुुए है।
(10) कर्णप्रयाग विधानसभा के उपचुनाव में जिसमें भाजपा के विधायक सुरेन्द्र नेगी विजयी हुए थे उस चुनाव मे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष अजय भट्ट ने भाजपा की तरफ से राजधानी गैरसैंण बनाने का आश्वास दिया था। जिसे सांसद बनने के बाद उन्होने लोकसभा में कहा था।
(11)-आजादी के संग्राम में ‘पेशावर क्रांति ’ के महानायक चंद्रसिंह गढवाली ने गैरसैंण क्षेत्र में ही इस पर्वतीय क्षेत्र का आदर्श शहर बसाने का संकल्प लिया।
(12) गैरसैण राजधानी बनाने के लिए बाबा मोहन उत्तराखण्डी व देवसिंह शहीद हो गये।इस मांग को लेकर निरंतर जनांदोलन चल रहा है।
(13) हिमालयी राज्यों की तरह हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड की राजधानी गैरसैंण पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है।
(14) -प्रदेश गठन के बाद पंचतारा सुविधाओं भोगी नेताओं व नौकरशाहों ने गैरसैंण में राजधानी बनाकर शासन चलाने के बजाय जनांकाक्षाओं, शहीदों की शहादत,प्रदेश के चहुंमुखी विकास, देश की सुरक्षा को नजरांदाज करते हुए प्रदेश गठन की मूल अवधारणा का गला घोटने का काम करते हुए बलात देहरादून में ही कुण्डली मारे हुए है। इससे प्रदेश गठन की मांग के लिए जिन पर्वतीय व सीमान्त जनपदों ने दशकों लम्बा संघर्ष व शहादते दी वहां से शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा व शासन से उपेक्षित होने के कारण विनाशकारी पलायन हो गया।क्योंकि देहरादून में काबिज हुक्मरान के साथ सीमान्त जनपदों के शिक्षक, चिकित्सक, कर्मचारी तमाम देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में अपना तबादला करने में लगे है। इससे चीन सीमा से लगे इस सीमान्त प्रदेश की यह स्थिति देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गय
राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए सभी आंदोलनकारी ताकतें उक्रांद, भाजपा, कांग्रेस, भाकपा, माले,उपपा आदि आंदोलनकारी संगठन जो दलगत लक्ष्मण रेखाओं को दर किनारा करके गैरसैंण राजधानी बनाने के लिए एकजूट हो कर आंदोलन में भाग ले रहे है। इस आंदोलन को संसद की चैखट, से उत्तराखण्ड की सडकों पर उतारने के लिए आंदोलनकारी 25साल से आंदोलन कर रहे हैं।
विकास के संसाधनों की बंदरबांट करने वाले इन नेता व नौकरशाहों की लोकशाही के इन नबाबों को गैरसैंण का नाम सुनते ही नानी याद आ जाती है। ये भूल जाते है कि यह राज्य गठन ही जनता ने उत्तराखण्ड की संस्कृति, सम्मान व चहुमुखी विकास के लिए किया। नहीं तो लखनऊ तो देहरादून से बेहतर रहा। कम से कम लखनऊ रहते उत्तराखण्ड की मांग करने वाले जनपद मुख्यालयों में ही नहीं दूरस्थ गांवों के चिकित्सालय में चिकित्सक, विद्यालयों में षिक्षक, सरकारी कर्मचारी तैनात थे। अब तो देहरादून में प्रदेष को बर्बादी के गर्त में धकेलने वाले हुक्मरानों ने सब उजाड़ कर देहरादून व उसके आसपास के दो तीन जनपदों को ही उत्तराखण्ड समझ लिया है। देहरादून में भी इस मांग को लेकर 2017 से निरंतर परेड़ मैदान में राजधानी गैरसैंण अभियान आंदोलन छेडे हुए है।
आंदोलनकारी व समर्पित जनता निराश क्यों न हो जिस प्रकार से प्रदेष गठन के नाम पर देश के हुक्मरानों ने प्रदेष के षकुुनियों की सलाह पर प्रदेश का भूगोल को बदलने का शडयंत्र किया गया, राज्य की राजधानी गैरसैंण बनाने के बजाय बलात देहरादून ने का अलोकतांत्रिक कृत्य किया गया, प्रदेष को बंगलादेशी, अपराधियों व भू माफियाओं की ऐशगाह बनाने के लिए राज्य गठन की प्रदेश में हिमालयी राज्यों व हिमाचल की तरह भू कानून को लागू नहीं किया गया। मुजफ्फरनगर काण्ड आदि के गुनाहगारों को षर्मनाक संरक्षण देने व प्रदेश के हितों को विधानसभाई क्षेत्रों में जनसंख्या के आधारित परिसीमन कराकर रौंदने का जघन्य कृत्य यहां के तथाकथित विकास पुरूष व ईमानदार मुख्यमंत्रियों ने बेशर्मी से किया। प्रदेश में स्थाई व मूल निवास का जनाजा निकाल कर यहां अपराधियों, घुसपेटियों व भू माफियाओं का ऐशगाह बना दिया है।
सभी हिमालयी राज्यों की राजधानी की तरह जनभावनाओं व यहां की विकराल समस्याआं के निदान करने के लिए शहीदों के सपनों की राजधानी गैरसैंण को साकार किया जाय। प्रदेश की जनता चाहती है कि उत्तराखण्ड में बनाये जजाने वाला स्मार्ट सिटी को भी गैरसैंण में राजधानी बनाने में लगाया जाय। हिमालय की गौद में एक नया सुन्दर शहर गैरसैंण बसाया जाय।
ये नेता भूल गये कि वे जनसेवक है और लोकशाही में नेता या नौकरशाह नहीं अपितु सबसे बडी होती है जनता व जनभावना। प्रदेष में गैरसैंण की सुध लेने का काम पिछली कांग्रेस सरकार ने की थी। इसका षुभारंभ तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया। पर गैरसैंण की दिशा में मील का काम किया बहुगुणा के बाद बने मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिन्होने मंत्रीमण्डल की बैठके, विधानसभा के सत्र आयोजित करके व विधानसभा भवन बना कर। नहीं तो इससे पहले 12 सालों तक किसी मुख्यमंत्री को इतनी सुध नहीं रही कि वे प्रदेश की लोकशाही, जनभावनाओं व विकास के प्रतीक राजधानी गैरसैंण की सुध तो ले। परन्तु गैरसैंण में विधानसभा भवन व विधानसभा सत्रों का आयोजन करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी चुनावी मोह में गैरसैंण राजधानी घोशित का ऐलान न कर पाये। जिसका दण्ड प्रदेष को न जाने कब तक भुगतना पडेगा। अन्य मुख्यमंत्री स्वामी, तिवारी, खण्डूडी, निषंक ने जनभावनाओं को ही रौदने का काम किया। उस तरफ झांकना तो रहा दूर इनके उत्तराखण्ड विरोधी कृत्यों के कारण गैरसैंण के लिए आमरण अनषन कर रहे बाबा मोहन उत्तराखण्डी को अपनी शहादत देनी पड़ी। परन्तु इन हुक्मरानों के कान में जूं तक नहीं रेंगी।
प्रधानमंत्री जी प्रदेश की तमाम सरकारों के उतराखण्ड विरोधी कृत्यों से निराश उतराखण्ड की जनता ने आपके अच्छे दिन लाने व जनहितों को साकार करने वाला सुशासन लाने के आश्वासन पर विश्वास करके 2014 के लोकसभा चुनाव व उसके बाद 2017 में हुए उतराखण्ड विधानसभा चुनाव में अभूतपूर्व बहुमत दिलानेे का काम किया। इन चुनावों में उतराखण्डियों ने आपके पक्ष में राष्ट्रव्यापी माहौल बनाने व अभूतपूर्व बहुमत से सत्तासीन कराने में उतराखण्ड की जनांकांक्षाओं को साकार करने की आश से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परन्तु प्रदेश की वर्तमान त्रिवेन्द्र सरकार सत्तासीन होने के लम्बे समय बाद भी जनांकांक्षाओं को साकार करने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। जनता निराश हो कर आपसे गुहार लगा रही है कि आप उतराखण्ड की जनभावनाओं को साकार करने के लिए निम्न लिखित जनांकांक्षाओं को साकार करने का महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए अपनी उतराखण्ड सरकार को दो टूक निर्देश देंगे। उतराखण्ड में अच्छे दिन तभी आ सकते है जब प्रदेश में
(क)- अविलम्ब उतराखण्ड की राजधानी गैरसैंण तुरंत घोषित करने
(ख)-मुजफ्फरनगर काण्ड-94 सहित उतराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन को अमानवीय दमन से रौंदने वाले हैवानों को सजा देने के लिए एक आयोग का गठन किया जाय।
(ग)- हिमाचल सहित अन्य हिमालयी राज्यों की तरह उतराखण्ड में भी भू कानून लागू किया।
(घ)-उतराखण्ड में मूल निवास 1960 से लागू किया जाय।
(ड)-बडे बांध, बाघ, शराब, घुसपेटियों, भ्रष्टाचारियों व अपराधियों पर अंकुश लगा कर उतराखण्ड का चहुमुखी विकास किया जाय।
(च)-राज्य गठन के बाद प्रदेश की जमीन, जंगल, जल व अन्य प्राकृतिक संसाधनों की बंदरबांट पर तत्काल अंकुश लगायी जाय।
मान्यवर प्रदेश के चहुुंमुखी विकास की आश से प्रदेश की जनता ने आपको केन्द्र व प्रदेश सरकार गठन के लिए अभूतपर्व जनादेश दिया है। आशा है आप प्रदेश की इस सबसे ज्वलंत समस्या व राष्ट्रीय सुरक्षा के सबसे महत्वपूण प्रश्न का त्वरित समाधान करने में अपने प्रभाव का प्रयोग करेंगे राजधानी गैरसैंण को घोषित करने का ऐतिहासिक काम करेंगे।
उत्तराखण्ड की सवा करोड़ जनता की तरफ से सधन्यवाद!
उतराखण्ड आदंोलनकारी संगठनों की समन्वय समिति
देवसिंह रावत
