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दिल्ली नगर निगम के चुनाव में असंतुष्टों ने किया भाजपा, कांग्रेस व आप की नाक में दम

प्रशांत भूषण के बयान ने किया स्वराज पार्टी की आशाओं पर बज्रपात

नई दिल्ली(प्याउ)। 23 अप्रेल को होने वाले दिल्ली नगर निगम चुनाव के लिए टिकट वितरण करना भाजपा, कांग्रेस व आप के नेताओं के पसीने छूट गये। इसके बाबजूद टिकट वितरण से नाखुश असंतुष्टों ने भाजपा, कांग्रेस व आप के नेताओं की नाक में दम कर रखा है। टिकट वितरण करने वाले नेताओं की चारों तरफ हाय हाय ही सुनाई दे रही है। वहीं दिल्ली नगर निगम के चुनाव में पहली बार राजनीति की देहरी में कदम रखने वाली स्वराज पार्टी की आशाओं पर उसके वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण के बयान ने पानी फेर दिया है। प्रशांत के बयान से जहां जनता में भारी नाराजगी है वहीं दल के प्रत्याशी भी असहज महसूस कर रहे है।
भले ही 272 सदस्यीय पार्षद वाली तीन भागों में विभाजित दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी में टिकट वितरण के दौरान भड़के असंतोष से सबक लेकर भाजपा व कांग्रेस ने विद्रोह रोकने के लिए नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिनों में अपने प्रत्याशियों का ऐलान किया पर आप की तरह ही भाजपा व कांग्रेस असंतोष को रोकने में असफल रहे।
आप में जहां टिकट वितरण से नाराज दावेदारों ने आप कार्यालय पर कई प्रदर्शन किये वहीं एक महिला दावेदार सिमरन वेदी ने आप के सबसे दबंग नेता संजय सिंह को थप्पड़ मार कर अपने गुस्से का इजहार किया।
दिल्ली नगर निगम में सबसे बड़ी बगावत कांग्रेस में हुई। कांग्रेस के तीन बार विधायक रहे पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष अमरीश गौतम ने विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली। गौतम ने कांग्रेस में टिकट वितरण प्रक्रिया में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी को अपनी नाराजगी की मुख्य वजह बताया। पर  कांग्रेसी सुत्र बता रहे है कि अमरीश अपने पुत्र को टिकट न दिला पाने के चलते नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस के सबसे बडे दिग्गज व साफ छवि के नेता समझे जाने वाले लक्ष्मी नगर के पूर्व विधायक व 15 सालों तक दिल्ली सरकार के मंत्री रहे अशोक वालिया ने टिकट वितरण से नाखुश हो कर कांग्रेस से इस्तीफा देने की धमकी तक दे दी । डॉ. वालिया ने कहा कि जिस तरह से उनके विधानसभा सीट में उनको बताने के बाद उम्मीदवार बदल दिया गया, उससे वे आहत हैं। उनका कहना था कि ऐसे हालात में पार्टी का भगवान ही मालिक है। टिकट वितरण से आहत अशोक कुमार वालिया ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन और प्रभारी पीसी चाको को पत्र लिख कर भूल सुधार न होने पर पार्टी छोड़ने की चेतावनी दे दी थी। डा वालिया के समर्थन में दिल्ली के पूर्व मंत्री से लेकर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली व हारून यूसुफ सहित अनेक नेताओं का उनके घर तांता लगा रहा। जिससे उनका गुस्सा हल्का हुआ पर वे बेहद आहत है। पर लक्ष्मी नगर वार्ड से टिकट बदलने की डा वालिया की मांग लोगों के गले नहीं उतर रही है। पांडव नगर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शरद दीक्षित, घोंडली से वरिष्ठ निगम पार्षद इशरत जहां, बाबरपुर विधानसभा की जनता कॉलोनी से पार्टी से पार्षद जाकिर खान भी बेहद आहत है।
भाजपा में वर्तमान पार्षदों को टिकट न देने से दिल्ली नगर निगम में पहले ही स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। भले ही ये पार्षद अपना असंतोष खुले आम प्रकट न कर रहे हों पर अंदर अंदर से ये सबक सिखाने का मन बना चूके हैं। असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के वरिष्ठ नेता रामलाल और प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के निवास पर प्रदर्शन किया। वहीं सोनिया विहार से भाजपा की समर्पित व तेजतरार नेत्री ज्योति पंत को टिकट न दिये जाने से क्षेत्र के पार्टी कार्यकत्र्ताओं में भारी असंतोष है।
ऐसी स्थिति में भाजपा, कांग्रेस व आप पार्टी में फैले भारी असंतोष के बाद बड़ी संख्या में इन दलों के असंतुष्टों ने निर्दलीय चुनावी दंगल में उतर गये है। 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए नाम वापसी 8 अप्रैल तक होनी है। नाम वापासी के बाद पूरी तस्वीर साफ हो पायेगी कि इन दलों को खुले विद्रोह से जुझना पडेगा। पर यह साफ है कि दिल्ली की राजनीति में बर्चस्व व अस्तित्व की जंग लड़ रही भाजपा, कांग्रेस व आप तीनों दलों के अनुशासन को टिकट वितरण के बाद फेले असंतोष ने पूरी तरह से बेनकाब कर दिया। इन दलों में समर्पित कार्यकर्ता टिकट वितरण में लगे नेताओं पर दल के समर्पित कार्यकत्र्ताओं की उपेक्षा करने, पक्षपात करने व टिकटें बेचने का आरोप खुलेआम लगा रहे है।

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