उत्तराखंड में मोदी की लहर में भाजपा ने जीती पांचों लोकसभा सीटें
अपने हक हकुकों के प्रति उदासीन उत्तराखंडियों को दिखाई बाबी पंवार ने आशा की किरण
देव सिंह रावत
“अबकी बार 400 पार व फिर बनेगी देश में मोदी सरकार” की हुंकार भरते हुए लोकसभा चुनाव 2024 की चुनावी दंगल में उतरी “स्वयं को संसार की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताने वाली” भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव सबक सिखाने वाला साबित हुआ।
मोदी के नेतृत्व में 10सालों से देश की सत्ता में आसीन भारतीय जनता पार्टी की आशाओं पर वज्रपात करते करती हुए देश की जनता ने जो जनादेश 19 अप्रैल से 1 जून 2024 में सात चरणों में हुई मतदान में दिया, उसकी मतगणना 4 जून को जब हुई तो 2019 की लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर 303 संसदीय सीटें जीतने वाली भाजपा 240 सीटें ही जीत कर अपने दम पर सामान्य बहुमत जुटा पाने में नाकाम रही। वहां अपने गठबंधन की साथियों के सहयोग से सामान्य बहुमत 272 से चंद सीटें अधिक यानी 293 सीट ही अर्जित कर पाई। परंतु गठबंधन की सरकार बनाने में भाजपा की सहयोगियों ने खास कर नीतीश कुमार वह चंद्रबाबू नायडू ने भाजपाई नेतृत्व के पसीने छुड़ा दिए हैं।
बिहार में सत्तारूढ जनता दल यूके प्रमुख नीतीश कुमार व आंध्र प्रदेश में सत्तासीन हुये तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने अपने-अपने प्रदेशों को विशेष राज्य का दर्जा अर्जित करने की साथ अनेक मलाईदार मंत्रालय के साथ अनेक शर्तें रख दी है।
इसे देख कर मुझे उत्तराखंड राज्य की दयनीय स्थिति देखकर गहरा आघात लग रहा है कि देश की विभिन्न क्षेत्रों जनता और नेता अपने प्रदेशों के हितों के लिए मतदान व राजनीतिक शक्ति का सदुपयोग करते हैं। परंतु उत्तराखंड की जनता व यहां का नेतृत्व अपने प्रदेश की हितों की साथ अपने स्वाभिमान व जनहितों की प्रति उदासीन रहकर केंद्रीय नेतृत्व की आगे शर्मनाक ढंग से आत्म समर्पण करते हैं। इससे प्रदेश की स्थिति दयनीय हो गई। अपितु प्रकृति द्वारा व संविधान द्वारा अर्जित विशेष राज्य के दर्जे से भी इसे वंचित किया गया। उत्तराखंड में जल व ऊर्जा के अपार भंडार होने की बावजूद यहां के नागरिकों को ना तो जल विद्युत में छूट मिल रही है तथा नहीं उसका न्यायोचित हिस्सा लाभांश प्रांत को ही मिल रहा है।
उत्तराखंड को जिस प्रकार से राज्य गठन से अब तक 24 सालों में भाजपा व कांग्रेस की सरकारों द्वारा निर्ममता से रौंदा गया, इससे उत्तराखंड की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है।
इसका नमूना उत्तराखंड में बड़ी संख्या में षड्यंत्र के तहत राज्य गठन की बाद घुसपैठियों की बाढ़ सी आ गई है। अपराधियों व भारत विरोधी घुसपैठियों का उत्तराखंड अभ्यारण बन गया है। जिससे यहां की शांति व विकास पर हल्द्वानी जैसा ग्रहण लग गया है। इन पर रोकथाम के लिए तथा उत्तराखंड की लोगों को रोजगार देने के लिए जनता निरंतर सरकार से मांग कर रही है कि प्रदेश की राजधानी गैरसैंण को घोषित किया जाए। प्रदेश में घुसपैठियों से बचाने के लिए मूल निवास 1950 व हिमालय राज्यों की तरफ भू कानून बनाने की पुरजोर मांग कर रहा है। इसके साथ प्रदेश में अपराधियों द्वारा किये जा रहे संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए निरंतर मांग कर रहे हैं। परंतु प्रदेश की धामी सरकार जिस प्रकार से अंकिता भंडारी प्रकरण पर उसके पीड़ित माता-पिता द्वारा जिस भाजपा नेता को गुनाहगार बताया जा रहा है, उसको दंडित करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी शर्मनाक ढंग से उसको महत्वपूर्ण पद पर प्रदेश में आसीन किये हुए हैं।
यह मामला लोकसभा चुनाव में बड़ी पुरजोर से उठा। परंतु स्थिति इतनी शर्मनाक है कि प्रदेश की तमाम सीटों पर कमजोर भाजपा प्रत्याशी होने के बावजूद जनता ने भारी बहुमत से मोदी का समर्थन करते हुए उन्हें चुनाव में जीता दिया है।
जबकि प्रदेश की इन तमाम मांगों से प्रदेश भाजपा नेतृत्व सहित केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह से अवगत है। पर वह सत्ता मद में निरंतर नज़रंदाज़ कर के लोकशाही पर कुठाराघात कर रहे हैं। ऐसे में यह बात साफ हो जाती है कि जो समाज अपने हितों व सम्मान के प्रति उदासीन रहता है उसकी दुर्दशा के लिए राजनेताओं से अधिक वह खुद ही जिम्मेदार होता है।
इस चुनाव में उत्तराखंड की जनता ने न केवल उत्तराखंड में अपितु दिल्ली सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में मोदी प्रत्याशियों का भारी समर्थन करती हुई विजयी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
ऐसी निराशा से भरे वातावरण में आशा की किरण बने उत्तराखंड के नौजवान समाजसेवी बाबी पंवार जिन्होंने स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में टिहरी उत्तरकाशी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का प्रत्याशी बनकर भाजपा व कांग्रेस की नींद आराम कर दी थी। उन्होंने बेरोजगार आंदोलन की तर्ज़ में इस चुनाव में उत्तराखंड के तमाम राजनीतिक दलों व जनता को एक साथ संदेश दिया कि अगर मेहनत करें तो उत्तराखंड को बर्बादी की करत में धकेलना वाली भाजपा व कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों को सत्ता से उखाड़ फेंका जा सकता है। उन्होंने कम संसाधनों में जो टक्कर टिहरी उत्तरकाशी संसदीय सीट पर दी उससे प्रेरणा लेकर आने वाले समय में विधानसभा व लोकसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस को कड़ी तक कर दी जा सकती है। जब उत्तराखंड में तेलंगाना आंध्र प्रदेश झारखंड की तर्ज पर स्थानीय दल सत्ता में आसीन होंगें तब उत्तराखंड की जन आकांक्षाएं सरकार होगी व तभी देश के दिल्ली सहित विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में रहने वाले उत्तराखंडियों की पूछ भी उनकी उन स्थानों पर होगी।
लोकसभा चुनाव में गढ़वाल लोकसभा सीट से उक्रांद के प्रत्याशी आशुतोष नेगी का उल्लेख करना जरूरी है। उन्होंने ने भी अंकिता भण्डारी को न्याय दिलाने के लिए उल्लेखनीय भूमिका निभाई व सरकार के दमन भी बहादुरी से सहे।
लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तराखंड प्रदेश के चुनाव परिणाम पर एक नजर
टिहरी उत्तरकाशी संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी
माला राज्य लक्ष्मी शाह को 462 603 मत मिले। भाजपा प्रत्याशी ने अपने विरोधी कांग्रेस प्रत्याशी को
272 493 मतों से पराजित किया।
दूसरे नंबर पर कांग्रेसी प्रत्याशी जोत सिंह गुनसोला को 190 110 मत मिले। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी बॉबी पवार को 168 081 मत मिले।
इस सीट से राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी के प्रत्याशी नवनीत गोसाई को 10026 मत मिले।
इस लोक सभा सीट पर बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता नेमचंद को केवल 6908 मत मिले। स्वतंत्र प्रत्याशी सरदार खान पप्पू को 3275, भारतीय राष्ट्रीय एकता दल के बृजभूषण कारण वालों को 3570,विपिन असवाल -3216, पीपीआई के रामपाल सिंह-2362, सुदेश तोमर 2268, प्रेम दत्त सेमवाल 2164 व 7458 मत इनमें से किसी को नहीं(नोटा) के खाते में दिए गए।
उत्तराखंड में दूसरे लोकसभा क्षेत्र “अल्मोड़ा पिथौरागढ़” में भाजपा की प्रत्याशी अजय टम्टा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेसी प्रत्याशी प्रदीप टम्टा को 234 097 मतों से पराजित किया। अजय टम्टा को 429 67 मत पड़े जबकि प्रदीप टम्टा को 195 070 मत मिले। इस सीट पर बस सपा की नारायण राम को 10075 मत मिले। अन्य उम्मीदवारों में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की किरण आर्य 5778, अर्जुन प्रसाद 47 07, पीपीआई के डॉ प्रमोद कुमार 4457, बहुजन मुक्ति पार्टी के इंजीनियर ज्योति प्रसाद टम्टा को 2224 व इनमें से किसी को नहीं(नोटा) के खाते में 17 0 19 मत पड़े।
नैनीताल उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट 334 548 मतों से विजय हुए। अजय भट्ट को 772 671 मत मिले, वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी प्रकाश जोशी को 438 123 मत मिले। इस संसदीय क्षेत्र में बसपा के अख्तर अली को 234 55, अखिल भारतीय परिवार पार्टी की अखिलेश कुमार को 4902, हितेश पाठक को 4315, रमेश कुमार मैक्स 3300, पीपीआई की असर सिंह सैनी 2987, भारत भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी के जीवन चंद्र उप्रेती 2310, पोकरण की शिव सिंह 1855, सुरेंद्र सिंह 1673 व इनमें से किसी को नहीं(नोटा) फिर खाते में 10425 मत पड़े।
वहीं गढ़वाल संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी के अनिल बलूनी को 163 503 मतोंं से विजय मिली। इस सीट पर अनिल बलूनी को 432 159 मत मिले तथा कांग्रेसी प्रत्याशी गणेश को ध्यान को 268 656 मत मिले। इस सीट पर स्वतंत्र प्रत्याशी सोनू कुमार को 48 22, उत्तराखंड क्रांति दल के आशुतोष सिंह नेगी को 4561, बसपा की धीर सिंह 41 22, मुकेश प्रकाश 307 9, दीपेंद्र सिंह नेगी 1640, उर्वशी देवी 15 12, अर्जुन सिंह 1378, रेशमां पवार 1293, डॉ मुकेश पंत 1179, विनोद कुमार शर्मा 884, श्यामलाल 771 व इनमें से किसी को नहीं(नोटा) के खाते में 11375 मत पड़े।
उत्तराखंड में पांचवी संसदीय सीट हरिद्वार में भी भाजपा की प्रत्याशी त्रिवेंद्र रावत ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के प्रत्याशी वीरेंद्र रावत को 164 056 मतों से पराजित किया।
हरिद्वार संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी त्रिवेंद्र रावत को 653808 मत मिले। खानदेशी प्रत्याशी वीरेंद्र रावत को 48975 2 मत मिले।
यहां पर निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार को 911 88, बसप्पा प्रत्याशी जमीन अहमद 42 323, उत्तराखंड सामान्य पार्टी की बलवीर भंडारी को 2961, उत्तराखंड क्रांति दल की मोहन सिंह असवाल 2854, स्वतंत्र प्रत्याशी विजय कुमार 24 10, पवन कश्यप 2178, इंजीनियर करण सिंह सैनी 1974,अकरम हुसैन 1685, पीपीआई प्रत्याशी ललित कुमार 1410, भारतीय राष्ट्रीय एकता दल की प्रत्याशी सुरेश पाल को 1162, आशीष ध्यान को 1117, अवनीश कुमार 975
व इनमें से किसी को नहीं(नोटा) के खाते में 6826 मत अर्जित हुए।
