देश व्यापार

केंद्र सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के सभी बीजकों के निपटान के लिए ट्रेड्स को किया अनिवार्य

azadi ka amrit mahotsav

त्‍वरित भुगतान, सशक्त सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम


30 जून 2026 की अधिसूचना के माध्यम से केंद्रीय बजट 2026–27 की घोषणा को किया गया लागू; लाखों एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं को शीघ्र, संपार्श्विक-मुक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का मार्ग हुआ प्रशस्त

 10 जुलाई 2026, दिल्ली  से  प सू का भा स

ट्रेड्स के माध्यम से अनिवार्य निपटान : सभी कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसई) एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं एवं सेवाओं के सभी बीजकों का निपटान भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अधिकृत ट्रेड्स प्लेटफॉर्मों के माध्यम से करेंगे।

पारदर्शिता एवं जवाबदेही : केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (सीपीएसई) भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ट्रेड्स के माध्यम से प्रेषित एवं निपटाए गए एमएसएमई बीजकों का विवरण सार्वजनिक करेंगे तथा अपने वार्षिक लेखापरीक्षण के दौरान ट्रेड्स पर पंजीकरण एवं अनुपालन के लिए वैधानिक लेखापरीक्षक का प्रमाण-पत्र प्राप्त करेंगे।

कॉरपोरेट भारत के लिए एक मानदंड : यह व्यवस्था केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) को देशभर के बड़े कॉरपोरेट खरीदारों के लिए समयबद्ध भुगतान अनुशासन के एक आदर्श के रूप में स्थापित करती है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के भुगतान में होने वाली लंबी देरी की समस्या को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने सभी कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) के लिए अपने एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं के साथ होने वाले लेन-देन के निपटान हेतु ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (ट्रेड्स) का अनिवार्य उपयोग अधिसूचित किया है। 30 जून 2026 को जारी यह अधिसूचना केंद्रीय बजट 2026–27 की एक महत्त्वपूर्ण घोषणा को प्रभावी बनाती है।

एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उद्यम पंजीकरण पोर्टल तथा उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत 8.70 करोड़ से अधिक उद्यम 38 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं। इसके बावजूद भुगतान में देरी इस क्षेत्र की सबसे गंभीर और लगातार बनी रहने वाली चुनौतियों में से एक है, जिससे कार्यशील पूंजी अवरुद्ध होती है और विकास की गति प्रभावित होती है। एमएसएमई से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) द्वारा की जाने वाली सभी खरीदों के निपटान के लिए ट्रेड्स को अनिवार्य बनाए जाने से अब सार्वजनिक क्षेत्र की खरीद व्यवस्था छोटे आपूर्तिकर्ताओं के हित में सक्रिय रूप से कार्य करेगी। सीपीएसई द्वारा की गई खरीद ट्रेड्स पर दर्ज होगी और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों द्वारा बीजक वित्तपोषण के माध्यम से एमएसएमई को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

एमएसएमई के लिए इसका क्या अर्थ है

सीपीएसई के प्रत्येक बीजक के ट्रेड्स के माध्यम से संसाधित होने पर एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं के पास नियत तिथि से काफी पहले अनुमोदित बीजकों को नकदी में परिवर्तित करने का विकल्प होगा। ट्रेड्स के माध्यम से उपलब्ध वित्तपोषण संपार्श्विक-मुक्त तथा विक्रेता के प्रति बिना प्रत्यावर्तन (विदाउट रिकोर्स) के आधार पर होता है। इसमें बैंक तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (एनबीएफसी) प्रतिस्पर्धी रूप से बीजकों के डिस्काउंटिंग के लिए बोली लगाती हैं, जिससे एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर कम समय में कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो जाती है।

ट्रेड्स के बारे में

ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (ट्रेड्स) भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित एक इलेक्ट्रॉनिक मंच है, जो वर्ष 2017 से परिचालन में है। यह कॉरपोरेट खरीदारों, सरकारी विभागों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से एमएसएमई को प्राप्त होने वाली व्यापारिक देय राशियों के वित्तपोषण एवं डिस्काउंटिंग की सुविधा अनेक वित्तपोषकों द्वारा प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से उपलब्ध कराता है। वर्तमान में पाँच ट्रेड्स प्लेटफॉर्म संचालित हैं : आरएक्सआईएल, एम1एक्सचेंज, इनवॉइसमार्ट, सी2ट्रेड्स तथा डीटीएक्स। यह मंच निरंतर सुदृढ़ हुआ है। इसके माध्यम से बीजक डिस्काउंटिंग का मूल्य वित्त वर्ष 2021–22 के ₹40,000 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025–26 में ₹3.47 लाख करोड़ तक पहुँच गया है।

ट्रेड्स की सुधार यात्रा

यह अधिसूचना 30 जून 2026 को जारी की गई थी। इसकी विस्तृत जानकारी भारत के राजपत्र में https://egazette.gov.in पर उपलब्ध है।

***

 

About the author

pyarauttarakhand5