जल आपूर्ति और स्वच्छता राज्य के विषय हैं। राज्यों के प्रयासों में सहायता करने के लिए, भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
भारत सरकार अगस्त 2019 से राज्यों की भागीदारी से देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार हेतु पीने योग्य पानी का प्रावधान करने के लिए जल जीवन मिशन (जेजेएम) – हर घर जल कार्यान्वित कर रही है। मिशन का कुल अनुमानित परिव्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें से केंद्र का हिस्सा 2.08 लाख करोड़ रुपये था और लगभग पूरी बजटीय केंद्रीय राशि का उपयोग किया जा चुका है। मिशन के तहत 2024-25 तक की गई वित्तीय प्रगति का वर्ष-वार विवरण इस प्रकार है:
(राशि करोड़ रुपये में)
| वर्ष | बीई/आरई | आवंटन के विरूद्ध उपयोग की गई निधि | कुल व्यय (केंद्र + राज्य) |
| 2019-20 | 10,000.66 | 10,000.44 | 10,074.28 |
| 2020-21 | 11,000.00 | 10,999.94 | 20,449.96 |
| 2021-22 | 45,011.00 | 40,125.64 | 43,551.85 |
| 2022-23 | 55,000.00 | 54,839.79 | 90,815.55 |
| 2023-24 | 70,000.00 | 69,992.37 | 1,51,518.65 |
| 2024-25 | 22,670.00# | 22,638.44 | 90,009.00 |
| कुल | 2,13,705.66# | 2,08,596.62 | 4,06,419.29 |
#कुल उपयोग 2,08,652 करोड़ रुपये के स्वीकृत केंद्रीय परिव्यय तक सीमित है स्रोत: जेजेएम-आईएमआईएस
जल जीवन मिशन की घोषणा के समय, 3.23 करोड़ (16.71%) ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन होने की सूचना थी। अब तक, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, 08.12.2025 तक लगभग 12.52 करोड़ और ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इस प्रकार, आज की तारीख में, देश में 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.75 करोड़ (81.37%) से अधिक परिवारों के पास उनके घरों में नल जल आपूर्ति होने की सूचना है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण अनुबंध-I में दिया गया है।
सभी ग्रामीण परिवारों को शौचालयों तक पहुंच प्रदान करके देश के ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए, भारत सरकार ने 2014 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) शुरू किया था और सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र ने अक्टूबर, 2019 में स्वयं को ओडीएफ घोषित किया था। एसबीएम (जी) चरण-II अप्रैल, 2020 में शुरू किया गया था और इसे 2020-21 से 2025-26 तक कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें ओडीएफ स्थिति को बनाए रखने और सभी गांवों को ठोस तथा तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) से कवर करने पर ध्यान दिया जा रहा है, अर्थात्
2025-26 तक गांवों को ओडीएफ से ओडीएफ प्लस मॉडल में परिवर्तित करना है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II के तहत आवंटित और उपयोग की गई केंद्रीय निधियों का वर्ष-वार ब्यौरा निम्नानुसार है:
राशि करोड़ रुपये में
| वर्ष | बीई/आरई | आवंटन के विरूद्ध उपयोग की गई निधि | कुल व्यय (केंद्र + राज्य)* |
| 2020-21 | 6,000 | 4,947.92 | 11,064.78 |
| 2021-22 | 6,000 | 3,111.37 | 6,163.27 |
| 2022-23 | 5,000 | 4,925.16 | 6,691.28 |
| 2023-24 | 7,000 | 6,815.97 | 10,124.37 |
| 2024-25 | 7,192 | 3,622.00 | 7,904.44 |
| कुल | 31,192 | 23,422.42 | 41,948.14 |
*अप्रैल 2020 में 15,343 करोड़ रुपये (केंद्र + राज्य) की अव्ययित शेष राशि सहित
सूचित किए गए अनुसार, 08.12.2025 तक, निर्मित व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालयों (आईएचएचएल) और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (सीएससी) की कुल संख्या (2014 के बाद) क्रमशः 11.99 करोड़ और 2.66 लाख है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार निर्मित आईएचएचएल और सीएससी का ब्यौरा अनुबंध-II में दिया गया है।
इसके अलावा, गांवों में जल आपूर्ति और स्वच्छता सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए, 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी)/पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित 2,36,805 करोड़ रुपये के 60% के सशर्त अनुदान को पेयजल और स्वच्छता बुनियादी ढांचे के निर्माण तथा रखरखाव की दिशा में उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा, जेजेएम के तहत ग्राम स्तर पर अन्य योजनाओं जैसे कि मनरेगा, ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को 15वें वित्त आयोग से सशर्त अनुदान, एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी), राज्य योजनाओं, जिला खनिज विकास निधि, सीएसआर निधि, सामुदायिक योगदान आदि के सामंजस्य में स्थानीय और प्राचीन पेयजल स्रोतों के संवर्धन तथा सुदृढ़ीकरण के प्रावधानों की भी परिकल्पना की गई है।
इसके अलावा, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने सूचित किया है कि भारत सरकार जल आपूर्ति, सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन आदि के क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों में मूलभूत अवसंरचना के संवर्धन के लिए अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) और अमृत 2.0 कार्यान्वित कर रही है।
अमृत को वर्ष 2015 में चुनिंदा 500 शहरों में शुरू किया गया था। अमृत के तहत, 83,463.05 करोड़ रुपये की 6,008 परियोजनाओं की ज़मीनी स्तर पर शुरूआत की गई है। इन परियोजनाओं में 43,359.78 करोड़ रुपये की 1,403 जल आपूर्ति परियोजनाएं और 34,459.46 करोड़ रुपये की 890 सीवरेज/सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, अमृत 2.0 योजना को वर्ष 2021 में सभी शहरी स्थानीय निकायों/शहरों में शुरू किया गया था, जिससे शहरों को ‘आत्मनिर्भर’ और ‘जल सुरक्षित’ बनने में सक्षम बनाया गया था। 500 अमृत शहरों में सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन की सार्वभौमिक कवरेज प्रदान करना अमृत 2.0 के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल है। अमृत 2.0 के तहत, 1,18,226.61 करोड़ रुपये की 3,516 जलापूर्ति परियोजनाओं, 67,840.59 करोड़ रुपये की 588 सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाओं के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रस्ताव को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा अनुमोदित किया गया है।
अमृत और अमृत 2.0 के तहत निधियां राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को आवंटित/जारी/स्वीकृत की जाती हैं, न कि क्षेत्र-वार। अमृत और अमृत 2.0 के तहत जारी निधि का विवरण इस प्रकार है:
(राशि करोड़ रुपये में)
| ब्यौरा | अमृत | अमृत 2.0 |
| परियोजनाओं के लिए आवंटित कुल केंद्रीय सहायता | 36,035.79 | 66,750.00 |
| स्थापना के बाद से कुल जारी निधि (2024-25 तक) | 34,900.97 | 12,982.25 |
| 2022-23 | 961.17 | 5,462.00 |
| 2023-24 | 2,499.83 | 2,146.94 |
| 2024-25 | 281.74 | 4,917.53 |
अमृत के तहत नल जल कवरेज का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण अनुबंध-III में दिया गया है।
इसी तरह, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) को 2 अक्टूबर, 2014 को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) के उद्देश्य से और देश के शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) के वैज्ञानिक प्रसंस्करण के लिए शुरू किया गया था। एसबीएम-यू के तहत, पूरी मिशन अवधि के लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों का कुल वित्तीय परिव्यय 62,009 करोड़ रुपये था, जिसमें 14,623 करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध केंद्रीय सहायता भी शामिल थी, क्योंकि एसबीएम-यू के तहत धनराशि राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को पूरी मिशन अवधि के लिए आवंटित की गई, न कि वार्षिक आधार पर।
शहरों को सहायता जारी रखने के लिए, स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम-यू) 2.0 को 1 अक्टूबर, 2021 को पांच साल की अवधि के लिए शुरू किया गया है, जिसमें वैज्ञानिक लैंडफिल में सुरक्षित निपटान, पुराने अपशिष्ट-स्थलों के निदान सहित कचरे के सभी मात्राओं का सुरक्षित स्वच्छ और वैज्ञानिक प्रबंधन प्राप्त करने का विज़न शामिल है। एसबीएम-यू 2.0 के तहत, पूरी मिशन अवधि के लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों का कुल वित्तीय परिव्यय 1,41,600 करोड़ रुपये है, जिसमें 36,465 करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध केंद्रीय सहायता शामिल है।
जेजेएम के तहत, मिशन के कुशल और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बिखरे हुए/अलग-थलग/आदिवासी गांवों के लिए सौर ऊर्जा आधारित स्टैंड-अलोन जल आपूर्ति प्रणाली, भूजल संदूषित क्षेत्रों, ठंडे रेगिस्तानों/कठोर चट्टानी/पहाड़ी/तटीय क्षेत्रों आदि में आर्सेनिक, फ्लोराइड, लौह और अन्य संदूषित पदार्थों को हटाने वाली यूनिटों पर आधारित सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (सीडब्ल्यूपीपी) जैसे प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेप किए गए हैं।
इसके अलावा, विभिन्न नवाचारों और जल तथा स्वच्छता से संबंधित नई प्रौद्योगिकियों की जांच और सिफारिश करने के लिए एक तकनीकी समिति का गठन किया गया है, जिनका उपयोग बेहतर जल तथा स्वच्छता सेवा सुपुर्दुगी सुनिश्चित करने में किया जा सकता है। अब तक, समिति ने 241 नवीन प्रौद्योगिकियों और 187 अनुसंधान एवं विकास प्रस्तावों पर विचार किया है तथा 32 नवीन प्रौद्योगिकियों को स्वीकार और संस्तुत किया गया है।
एसबीएम (जी) के तहत, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को एसबीएम(जी) चरण-II के तहत विभिन्न घटकों के लिए विभिन्न प्रौद्योगिकियों तथा सेवा सुपुर्दगी मॉडलों को अपनाने के लिए लचीलापन प्रदान किया गया है जिसमें स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल शोधन प्रणालियाँ, भू-उपलब्धता, भौगौलिक स्थितियां आदि शामिल हैं। एसबीएम(जी) चरण-II के दिशानिर्देश-https://swachhbharatmission.ddws.gov.in/sites/default/files/Guidelines/SBMG%20Phase-II%20Operational%20Guidelines.pdf पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
दिनांक 08.12.2025 तक, एसबीएम(जी) आईएमआईएस पोर्टल पर राज्य/संघ राज्य क्षेत्र द्वारा रिकार्ड किए गए डाटा के अनुसार, एसबीएम(जी) चरण-II के तहत 5.40 लाख से अधिक गांवों को तरल अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था से कवर किया गया है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार ब्यौरा अनुबंध-IV में दिया गया है।
अमृत के तहत, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों (यूटी) को परियोजनाओं का चयन, मूल्यांकन, प्रस्ताव और कार्यान्वयन करने का अधिकार है। अमृत 2.0 के तहत एक उप-योजना “जल ही अमृत” का उद्देश्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने के लिए पुनर्चक्रण योग्य शोधित जल के लिए सीवेज शोधन संयंत्रों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस उप योजना का फोकस क्षमता निर्माण और शोधित निर्वहन अपशिष्ट में गुणवत्ता परक सुधार को प्रोत्साहित करना है। अब तक, मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से 860 सीवेज शोधन संयंत्रों को नामांकित (प्रस्तुत जानकारी ) किया गया है।
एसबीएम-यू 2.0 के शौचालय निर्माण के घटक के तहत, वर्ष 2022-23 के लिए 132.78 करोड़ रुपये, 2023-24 के लिए 104.85 करोड़ रुपये और 2024-25 के लिए 52.65 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। एसबीएम-यू के तहत निर्मित व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय (आईएचएचएल) और सामुदायिक तथा सार्वजनिक शौचालय सीटों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण अनुबंध-V में दिया गया है।
परिकल्पित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, अन्य बातों के साथ-साथ, जेजेएम से संबंधित परियोजनाओं सहित कई परियोजनाओं को राज्यों में विभिन्न स्तरों पर समवर्ती रूप से कार्यान्वित किया जाता है। जल राज्य का विषय होने के कारण, ग्रामीण जल आपूर्ति परियोजनाओं की अलग-अलग परियोजनाओं/स्कीमों का परियोजना-वार ब्यौरा भारत सरकार के स्तर पर नहीं रखा जाता है।
इसके अलावा, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (जेएसए: सीटीआर) अभियान 2019 में देश के 256 जल संकट वाले जिलों में लोगों की भागीदारी से जमीनी स्तर पर जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। 2025 में, जेएसए को “जल संरक्षण के लिए जन कार्रवाई – गहन सामुदायिक संपर्क की ओर” विषय के साथ कार्यान्वित किया जा रहा है, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में समुदाय, विशेष रूप से महिलाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देता है।
इसके अलावा, सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पानी की हर बूंद का संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, संपूर्ण समाज और संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण का अनुपालन करते हुए, “जल संचय जन भागीदारी” (जेएसजेबी) पहल भी जेएसए: सीटीआर अभियान के भाग के रूप में शुरू की गई है।
यह सूचना केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल द्वारा लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।
***
एएमके/एनडी
अनुबंध -I
जेजेएम के तहत हुई प्रगति का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण
(08.12.2025 की स्थिति के अनुसार)
(संख्या लाख में)
| क्र.सं. | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र | कुल ग्रामीण परिवार | 15/08/2019 तक नल जल कनेक्शन वाले ग्रामीण परिवार | ग्रामीण परिवार जिनको अगस्त, 2019 से नल जल आपूर्ति प्रदान की गई | आज की तारीख में नल जल आपूर्ति वाले ग्रामीण परिवार | |||
| संख्या | % में | संख्या | % में | संख्या | % में | |||
| 1. | अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 0.62 | 0.29 | 46.02 | 0.33 | 53.98 | 0.62 | 100.00 |
| 2. | अरुणाचल प्रदेश | 2.29 | 0.23 | 9.97 | 2.06 | 90.03 | 2.29 | 100.00 |
| 3. | दादरा एवं नगर हवेली तथा दमण एवं दीव | 0.85 | – | – | 0.85 | 100.00 | 0.85 | 100.00 |
| 4. | गोवा | 2.64 | 1.99 | 75.44 | 0.65 | 24.56 | 2.64 | 100.00 |
| 5. | गुजरात | 91.18 | 65.16 | 71.46 | 26.02 | 28.54 | 91.18 | 100.00 |
| 6. | हरियाणा | 30.41 | 17.66 | 58.08 | 12.75 | 41.92 | 30.41 | 100.00 |
| 7. | हिमाचल प्रदेश | 17.09 | 7.63 | 44.64 | 9.46 | 55.36 | 17.09 | 100.00 |
| 8. | मिजोरम | 1.33 | 0.09 | 6.91 | 1.24 | 93.09 | 1.33 | 100.00 |
| 9. | पुदुचेरी | 1.15 | 0.94 | 81.33 | 0.21 | 18.67 | 1.15 | 100.00 |
| 10. | पंजाब | 34.27 | 16.79 | 48.98 | 17.48 | 51.02 | 34.27 | 100.00 |
| 11. | तेलंगाना | 53.98 | 15.68 | 29.05 | 38.30 | 70.95 | 53.98 | 100.00 |
| 12. | उत्तराखंड | 14.49 | 1.30 | 9.00 | 12.86 | 88.75 | 14.16 | 97.75 |
| 13. | लद्दाख | 0.41 | 0.01 | 3.48 | 0.38 | 94.10 | 0.40 | 97.58 |
| 14. | बिहार | 167.55 | 3.16 | 1.89 | 157.20 | 93.82 | 160.36 | 95.71 |
| 15. | नागालैंड | 3.64 | 0.14 | 3.82 | 3.28 | 90.13 | 3.42 | 93.94 |
| 16. | सिक्किम | 1.33 | 0.70 | 52.97 | 0.52 | 39.12 | 1.22 | 92.09 |
| 17. | लक्षद्वीप | 0.13 | – | – | 0.12 | 91.45 | 0.12 | 91.45 |
| 18. | उत्तर प्रदेश | 267.21 | 5.16 | 1.93 | 237.58 | 88.91 | 242.74 | 90.84 |
| 19. | महाराष्ट्र | 146.78 | 48.44 | 33.00 | 83.96 | 57.20 | 132.40 | 90.20 |
| 20. | तमिलनाडु | 125.26 | 21.76 | 17.37 | 90.20 | 72.01 | 111.96 | 89.38 |
| 21. | कर्नाटक | 101.31 | 24.51 | 24.20 | 63.03 | 62.22 | 87.54 | 86.41 |
| 22. | त्रिपुरा | 7.51 | 0.25 | 3.26 | 6.23 | 82.96 | 6.47 | 86.23 |
| 23. | मेघालय | 6.51 | 0.05 | 0.70 | 5.37 | 82.57 | 5.42 | 83.26 |
| 24. | असम | 72.24 | 1.11 | 1.54 | 57.87 | 80.11 | 58.99 | 81.65 |
| 25. | छत्तीसगढ़ | 49.98 | 3.20 | 6.40 | 37.61 | 75.26 | 40.81 | 81.65 |
| 26. | जम्मू एवं कश्मीर | 19.26 | 5.75 | 29.89 | 9.89 | 51.34 | 15.64 | 81.22 |
| 27. | मणिपुर | 4.52 | 0.26 | 5.74 | 3.34 | 73.86 | 3.59 | 79.60 |
| 28. | ओडिशा | 88.65 | 3.11 | 3.51 | 65.28 | 73.63 | 68.38 | 77.14 |
| 29. | आंध्र प्रदेश | 95.53 | 30.74 | 32.18 | 40.32 | 42.21 | 71.07 | 74.39 |
| 30. | मध्य प्रदेश | 111.49 | 13.53 | 12.14 | 67.45 | 60.50 | 80.98 | 72.63 |
| 31. | राजस्थान | 107.74 | 11.74 | 10.90 | 50.31 | 46.69 | 62.05 | 57.59 |
| 32. | पश्चिम बंगाल | 175.52 | 2.15 | 1.22 | 96.94 | 55.23 | 99.09 | 56.45 |
| 33. | झारखंड | 62.53 | 3.45 | 5.52 | 31.00 | 49.57 | 34.45 | 55.09 |
| 34. | केरल | 70.77 | 16.64 | 23.51 | 22.12 | 31.26 | 38.76 | 54.77 |
| कुल | 19,36.17 | 3,23.63 | 16.71 | 12,52.22 | 64.67 | 15,75.84 | 81.39 | |
दिल्ली और चंडीगढ़ में ग्रामीण आबादी नहीं है। एचएच: परिवार स्रोत: जेजेएमआईएमआईएस
अनुबंध-II
एसबीएम (जी) के तहत 08.12.2025 तक निर्मित आईएचएचएल और सीएससी की संख्या
| क्र.सं. | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र | निर्मित आईएचएचएल | निर्मित सीएससी |
| 1 | अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 23,337 | 320 |
| 2 | आंध्र प्रदेश | 44,41,712 | 15,485 |
| 3 | अरुणाचल प्रदेश | 1,55,214 | 3,090 |
| 4 | असम | 42,26,728 | 4,801 |
| 5 | बिहार | 1,40,33,575 | 9,435 |
| 6 | छत्तीसगढ | 36,12,640 | 14,572 |
| 7 | दादरा एवं नगर हवेली तथा दमण एवं दीव | 21,928 | 69 |
| 8 | गोवा | 30,361 | 589 |
| 9 | गुजरात | 44,28,651 | 8,194 |
| 10 | हरियाणा | 7,32,772 | 5,946 |
| 11 | हिमाचल प्रदेश | 2,29,603 | 6,349 |
| 12 | जम्मू एवं कश्मीर | 14,29,056 | 6,131 |
| 13 | झारखंड | 42,05,213 | 1,255 |
| 14 | कर्नाटक | 50,74,942 | 2,897 |
| 15 | केरल | 2,72,484 | 2,087 |
| 16 | लद्दाख | 22,879 | 433 |
| 17 | लक्षद्वीप | 10 | 22 |
| 18 | मध्य प्रदेश | 77,80,144 | 19,793 |
| 19 | महाराष्ट्र | 72,03,359 | 30,313 |
| 20 | मणिपुर | 2,77,553 | 1,152 |
| 21 | मेघालय | 3,16,537 | 1,309 |
| 22 | मिजोरम | 50,898 | 672 |
| 23 | नागालैंड | 1,50,192 | 1,454 |
| 24 | ओडिशा | 75,40,708 | 3,721 |
| 25 | पुदुचेरी | 29,846 | 11 |
| 26 | पंजाब | 5,72,697 | 6,800 |
| 27 | राजस्थान | 85,74,156 | 27,205 |
| 28 | सिक्किम | 25,775 | 734 |
| क्र.सं. | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र | निर्मित आईएचएचएल | निर्मित सीएससी |
| 29 | तमिलनाडु | 60,92,561 | 9,163 |
| 30 | तेलंगाना | 31,46,533 | 6,071 |
| 31 | त्रिपुरा | 5,03,691 | 721 |
| 32 | उत्तर प्रदेश | 2,56,72,422 | 62,416 |
| 33 | उत्तराखंड | 5,47,597 | 3,028 |
| 34 | पश्चिम बंगाल | 85,41,835 | 10,682 |
| कुल | 11,99,67,609 | 2,66,920 | |
स्रोत: एसबीएम (जी) – आईएमआईएस
अनुबंध -III
शहरी क्षेत्रों में राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार नल कवरेज
| क्र.सं. | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र | शहरी परिवारों की संख्या |
पारिवारिक नल कनेक्शन वाले शहरी परिवारों की संख्या | शहरी परिवारों का कवरेज (% में) |
|
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अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 48,154 | 48,154 | 100.00 |
|
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आंध्र प्रदेश | 4380,256 | 32,81,008 | 74.90 |
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अरुणाचल प्रदेश | 1,35,050 | 50,967 | 37.74 |
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असम | 10,22,270 | 1,74,960 | 17.11 |
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बिहार | 28,11,338 | 23,94,741 | 85.18 |
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चंडीगढ़ | 3,13,580 | 3,03,083 | 96.65 |
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छत्तीसगढ | 16,41,191 | 10,95,889 | 66.77 |
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दादरा एवं नगर हवेली तथा दमण एवं दीव | 44373 | 44,373 | 100.00 |
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दिल्ली | 40,09,814 | 36,21,384 | 90.31 |
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गोवा | 1,20,844 | 1,20,844 | 100.00 |
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गुजरात | 75,93,306 | 70,76,618 | 93.20 |
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हरियाणा | 30,99,882 | 24,70,268 | 79.69 |
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हिमाचल प्रदेश | 2,48,537 | 2,02,566 | 81.50 |
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जम्मू एवं कश्मीर | 9,80,232 | 7,53,187 | 76.84 |
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झारखंड | 17,69,039 | 6,64,692 | 37.57 |
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कर्नाटक | 70,80,680 | 53,73,766 | 75.89 |
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केरल | 23,18,753 | 16,29,847 | 70.29 |
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लद्दाख | 12,850 | 1,472 | 11.46 |
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लक्षद्वीप | 0 | 0 | 0 |
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मध्य प्रदेश | 39,00,000 | 33,22,776 | 85.20 |
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महाराष्ट्र | 1,64,12,457 | 1,45,15,167 | 88.44 |
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मणिपुर | 1,83,116 | 73,143 | 39.94 |
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मेघालय | 1,72,129 | 1,01,789 | 59.14 |
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मिजोरम | 1,71,884 | 1,13,825 | 66.22 |
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नागालैंड | 1,80,354 | 32,031 | 17.76 |
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ओडिशा | 13,24,738 | 13,24,738 | 100.00 |
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पुदुचेरी | 2,53,291 | 2,53,291 | 100.00 |
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पंजाब | 26,76,537 | 24,60,673 | 91.93 |
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राजस्थान | 39,93,009 | 32,21,084 | 80.67 |
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सिक्किम | 44,127 | 17,339 | 39.29 |
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तमिलनाडु | 86,59,292 | 56,46,589 | 65.21 |
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तेलंगाना | 40,22,960 | 38,10,003 | 94.71 |
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त्रिपुरा | 1,81,177 | 1,40,454 | 77.52 |
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उत्तर प्रदेश | 1,31,70,455 | 61,02,652 | 46.34 |
|
|
उत्तराखंड | 10,36,818 | 9,22,902 | 89.01 |
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पश्चिम बंगाल | 62,55,544 | 62,55,544 | 100.00 |
| कुल | 10,02,71,358 | 7,78,09,616 | 77.60 |
अनुबंध -IV
दिनांक 08.12.2025 तक तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एलडब्ल्यूएम) व्यवस्था से
कवर किए गए गांवों की संख्या
| क्र.सं. | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र | एलडब्ल्यूएम से कवर किए गए गांवों की संख्या |
| 1 | अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 233 |
| 2 | आंध्र प्रदेश | 10,562 |
| 3 | अरुणाचल प्रदेश | 3,832 |
| 4 | असम | 25,102 |
| 5 | बिहार | 35,331 |
| 6 | छत्तीसगढ | 18,738 |
| 7 | दादरा एवं नगर हवेली तथा दमण एवं दीव | 98 |
| 8 | गोवा | 343 |
| 9 | गुजरात | 17,004 |
| 10 | हरियाणा | 6,233 |
| 11 | हिमाचल प्रदेश | 15,965 |
| 12 | जम्मू एवं कश्मीर | 6,182 |
| 13 | झारखंड | 26,665 |
| 14 | कर्नाटक | 10,142 |
| 15 | केरल | 1,377 |
| 16 | लद्दाख | 240 |
| 17 | लक्षद्वीप | 10 |
| 18 | मध्य प्रदेश | 50,777 |
| 19 | महाराष्ट्र | 38,259 |
| 20 | मणिपुर | 122 |
| 21 | मेघालय | 5,405 |
| 22 | मिजोरम | 624 |
| 23 | नागालैंड | 1,164 |
| 24 | ओडिशा | 45,235 |
| 25 | पुदुचेरी | 37 |
| 26 | पंजाब | 10,016 |
| 27 | राजस्थान | 42,819 |
| 28 | सिक्किम | 400 |
| 29 | तमिलनाडु | 11,603 |
| 30 | तेलंगाना | 9,569 |
| 31 | त्रिपुरा | 765 |
| 32 | उत्तर प्रदेश | 94,679 |
| 33 | उत्तराखंड | 14,898 |
| 34 | पश्चिम बंगाल | 36,490 |
| कुल | 5,40,919 | |
स्रोत: एसबीएम (जी) – आईएमआईएस
अनुबंध-V
एसबीएम-यू के तहत निर्मित व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय (आईएचएचएल) और सामुदायिक तथा सार्वजनिक शौचालय सीटों का राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार विवरण
| क्र.सं. | संघ राज्य क्षेत्र | व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालयों की संख्या (आईएचएचएल) | सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय सीटों की संख्या |
| 1 | आंध्र प्रदेश | 2,43,764 | 17,799 |
| 2 | अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 336 | 609 |
| 3 | अरुणाचल प्रदेश | 11,606 | 89 |
| 4 | असम | 78,788 | 3,356 |
| 5 | बिहार | 4,04,537 | 28,677 |
| 6 | चंडीगढ़ | 6,117 | 2,512 |
| 7 | छत्तीसगढ | 3,26,435 | 18,832 |
| 8 | दादरा एवं नगर हवेली तथा दमण एवं दीव | 2,378 | 615 |
| 9 | दिल्ली | 779 | 28,256 |
| 10 | गोवा | 3,801 | 1,270 |
| 11 | गुजरात | 5,60,046 | 24,149 |
| 12 | हरियाणा | 66,751 | 11,374 |
| 13 | हिमाचल प्रदेश | 6,743 | 1,700 |
| 14 | जम्मू एवं कश्मीर | 51,246 | 3,451 |
| 15 | झारखंड | 2,18,700 | 9,643 |
| 16 | कर्नाटक | 3,93,278 | 36,556 |
| 17 | केरल | 37,207 | 2,872 |
| 18 | लद्दाख | 434 | 194 |
| 19 | मध्य प्रदेश | 5,79,642 | 29,867 |
| 20 | महाराष्ट्र | 7,23,892 | 1,66,465 |
| 21 | मणिपुर | 40,708 | 581 |
| 22 | मेघालय | 1,604 | 152 |
| 23 | मिजोरम | 15,607 | 1,324 |
| 24 | नागालैंड | 21,471 | 238 |
| 25 | ओडिशा | 1,67,800 | 12,211 |
| 26 | पुदुचेरी | 5,189 | 836 |
| 27 | पंजाब | 1,03,683 | 11,522 |
| 28 | राजस्थान | 3,68,515 | 31,300 |
| 29 | सिक्किम | 1,559 | 268 |
| 30 | तमिलनाडु | 5,46,299 | 92,744 |
| 31 | तेलंगाना | 1,57,165 | 15,465 |
| 32 | त्रिपुरा | 24,858 | 1,089 |
| 33 | उत्तर प्रदेश | 9,00,438 | 70,370 |
| 34 | उत्तराखंड | 29,111 | 4,694 |
| 35 | पश्चिम बंगाल | 2,82,542 | 5,746 |
