अध्यात्म

न्याय व जनहित के लिए लिया गया एक संकल्प भी व्यर्थ नहीं जाता है

जय श्रीकृष्ण, प्रकाश भाई जी,

आपने कुरूक्षेत्र व सुदर्शन चक्र का स्मरण कराया।

आपने जिन पापात्माओं के कृत्यों से व्यथित इस जगत को उबारने की मंशा जाहिर की। मै श्री हरि का दिव्य वचन का पुन्न आपको स्मरण कर रहा हॅू कि न्याय, जनहित के लिए लिया गया एक संकल्प भी व्यर्थ नहीं जाता है। इसी के लिए कुरूक्षेत्र में ही है समर्पित है यह जीवन, भगवान श्री हरि के सुदर्शन चक्र के साथ। इन लोकशाही को लूटशाही बनाने वाले लूटेरों की कोई औकात नहीं जो महाकाल का राह रोक सके। इन निहित स्वार्थ में डूबे पदलोलुपु दलीय बंधुआ मजदूर मूर्दो की क्या औकात की अपनी इच्छा से एक सांस भी ले पाये।

मै आप जैसे सतपथ के राही को सादर नमन् करता हॅू। आप निश्चिंत रहें। यही अटल है जहां सत् है वहीं श्रीकृष्ण हैं और वहीं जय है। आप जैसे जनहित व न्यायार्थ समर्पित पुरोधाओं से यह धरती सदैव धन्य होती है। सतपथ का पहचानने व उसमें रत रहने का अवसर केवल श्रीहरि की कृपा से ही मिलता है। देखो नहीं तो इस संसार में अरबों अरब जीव केवल उदरपूर्ति व निहित स्वार्थ में धृतराष्ट्र की तरह अंधे हो कर महाकाल की गर्त में समा जाते है।

इन लोकशाही के तथाकथित अभागे जनसेवक बने लूटेरों का दुर्भाग्य देखों कैसे ये सतपथ पर समर्पित होने के बजाय दलीय, जाति, अधर्म व क्षेत्र की संकीर्ण गर्त में आकंठ डूब कर अपना व जनजीवन कलुषित करते है।
आपको पुन्न सादर नमन्, सतपथ में समर्पित रहने के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं

(जनसंघर्षों के लिए समर्पित पुरोधा प्रकाश थपलियाल द्वारा श्रीकृष्ण प्रिय देव सिंह रावत से आज 30दिसम्बर के तडके किया गया –Prakash Thapliyaउठाओ सुदर्शन।करो आंदोलन।महाभारत की तर्ज में आर पार’ खुले आवाहन के जवाब में लिखा यह संदेश)

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