अध्यात्म देश

श्रीराम जन्म भूमि मंदिर के निर्माण की राह तत्काल खोलने की मांग को लेकर रामलीला मैदान दिल्ली में उमडा अभूतपूर्व जनसैलाव

खचाखच भरे रामलीला मैदान के साथ राजघाट से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक भगवान श्रीराम की गगनभेदी नारों व केशरिया ध्वजों को लहराता हुए विशाल जनसमुद्र

साध्वी ऋतंभरा के अलावा उमा भारती, आचार्य धर्मेंद्र, डा तोगडिया व विनय कटियार जैसे रामजन्म भूमि आंदोलन में औजस्वी नेताओं को सुनना चाहते थे रामभक्त

नई दिल्ली, (प्याउ)।
शताब्दियों पहले आक्रांताओं द्वारा भारतीय अस्मिता को रौेंदने के लिए ध्वस्थ कर बलात कब्जा किये गये भगवान राम की जन्म भूमि अयोध्या में भव्य श्रीराम-मन्दिर का तत्काल निर्माण करने हेतु जुटेे साधू-संतोें सहित लाखों रामभक्तों ने 9दिसंबर को रामलीला मैदान दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सरपरस्ती में  विहिप ने दिल्ली के अब तक के इतिहास में सबसे बडी व अभूतपूर्व  विराट धर्मं सभा का आयोजन किया। राजघाट से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक केशरिया ध्वजों को लहराते हुए भगवान श्रीराम की गगनभेदी जयघोषों ंलगाते हुए लाखों रामभक्तों व देशभक्तों का विशाल जनसमुद्र अंग्रेजों से मुक्त होने के 72 सालों तक आक्रांताओं के शर्मनाक कलंक, अन्याय व कब्जे से भगवान श्रीराम की जन्म भूमि को मुक्त न करने के लिए धिक्कारते हुए मोदी सरकार को हर हाल में राममंदिर बनाने की दो टूक चेतावनी दे रहे थे। विराट धर्म सभा के विशाल मंच से जहां संत व आयोजक रामभक्तों से खचाखच भरे विशाल रामलीला मैदान से यही दो टूक चेतावनी दे रहे थे। वहीं यह विशाल जनसमुद्र रामजन्मभूमि पर बलात कब्जा करने वाले आक्रांताओं के कत्लेआम, दमन, भारतीय अस्मिता को रौंदने वाले हैवानियत से अंग्रेजों के जाने के 72 साल न्याय न देकर न्याय का गला घोंटने से बेहद आहत थे। ंभले ही मंच पर साध्वी ऋतंभरा के अलावा कोई ऐसे औजस्वी वक्ता नहीं था जो रामजन्मभूमि आंदोलन के ढाई तीन दशक पूर्व चले ऐतिहासिक आदंोलन के तेजतरार वक्ता रहे । रामजन्म भूमि आंदोलन से दशकों से जुडे लाखों भक्त साध्वी ऋतंभरा के अलावा उमा भारती, आचार्य धर्मेंद्र, डा तोगडिया व विनय कटियार जैसे रामजन्म भूमि आंदोलन में औजस्वी नेताओं को सुनना चाहता था। परन्तु विशाल अनुशासित जनसमुद्र को रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण को जोडने के लिए किसी नेता व दल से उपर उठ कर केवल रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण के लिए जय श्री राम, जय श्री राम के नारे लगा रहे थे। इस विराट रैली का आयोजन कर जहां संघ ने अपनी जमीनी ताकत का  अहसास सत्तामद में चूर राजनेताओं को करा दिया।
देशभर से आये देशभक्तों की इस विराट धर्मसभा के बारे में विहिप प्रचार प्रसार प्रमुख दिल्ली महेंद्र रावत द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि
इंद्रप्रस्थ विश्व हिन्दू परिषद दिल्ली द्वारा आयोजित देश के विशिष्ट संत-महात्माओं, प्रमुख धार्मिक-सामाजिक संगठनों तथा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों और लाखों राम भक्तों की विराट धर्म सभा में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए केन्द्र सरकार से कानून बनाने की पुरजोर मांग की गई। इस अवसर पर संघ के सरकार्यवाह सुरेश(भैया जी) जोशी ने कहा कि हम राम मंदिर की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि यह हमारा अधिकार तो है ही साथ ही संसद और सरकार का दायित्व भी है।

ऐतिहासिक रामलीला मैदान में हुई विराट धर्म सभा की अध्यक्षता करते हुए आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने कहा कि, राम मंदिर के लिए दिल्ली में उमड़े जनसैलाब ने इतिहास रच दिया। राम हिन्दू समाज के लिए मुक्ति मंत्र है, चेतना है। राम मंदिर के लिए एकजुट हुई इन भावनाओं को शासन और न्यायालय को समझ कर आदर करना होगा। उन्होंनें उपस्थित रामभक्तों को राम मंदिर निर्माण के लिए संकल्प भी दिलाया।

विराट धर्म सभा में महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद जी महाराज ने कहा कि हम किसी की चापलूसी नहीं करते. मोदी सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मंदिर नहीं बना तो राम भक्त चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा, कि अगर बीजेपी पर यह आरोप लगता है कि वो चुनाव के दौरान ही राम मंदिर का मुद्दा उठाती है, तो दूसरे दलों को मंदिर निर्माण में सहयोग कर इस मुद्दे को ही समाप्त कर देना चाहिए।

जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज ने कहा, कि राम मंदिर के लिए कानून या अध्यादेश से कम कुछ स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर राम मंदिर प्राथमिकता में नहीं है तो रामनवमी पर वे अवकाश क्यों लेते हैं?

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि संत चाहते हैं कि इसी दिसंबर में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो। उदासीन आश्रम आराम बाग के महा मण्डलेश्वर पूज्य स्वामी राघवानंद जी महाराज ने कहा कि अगर कानून नहीं बना तो राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष ही एक मात्र उपाय रह जाएगा। अगर देश की सबसे बड़ी अदालत जन-भावनाओं को नहीं समझती, तो यह हिन्दू समुदाय के प्रति अन्याय है।

इस अवसर पर साध्वी ऋतंभरा ने हुंकार भरते हुए कहा कि इस देश का हिन्दू जाग गया है, अब राम मंदिर बनना ही चाहिए ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि हम राम मंदिर की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि यह हमारा अधिकार तो है ही साथ ही संसद और सरकार का दायित्व भी है। न्याय व्यवस्था और न्यायालय की प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए तथा न्याय व्यवस्था और राज सत्ता दोनों को अपने पूरे सामर्थ्य का उपयोग करते हुए जन भावना की उपेक्षा के स्थान पर उसका सम्मान करना चाहिए जिससे जन विश्वास भी बना रहे। मंदिर वहीं बनाएंगे ये सत्तारुढ दल का संकल्प भी है।

विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि राम मंदिर चुनाव का मुद्दा न हो कर आत्मसम्मान का मुद्दा है। न्यायालय की प्रतीक्षा अनंत काल तक नहीं की जा सकती। संसद जनता की आकांक्षाओं के अनुसार कानून बना कर मंदिर निर्माण की राह खोले।

विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय अपने कर्तव्यों की अवहेलना करने की बजाए जन आकांक्षाओं का सम्मान करे। सभी राजनीतिक दल राम मंदिर का समर्थन करें तथा संसद के शीतकालीन सत्र में ही कानून बनाएँ अन्यथा आगामी चुनावों में जनता का आक्रोश सामने आएगा।

विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि हमें जन्मभूमि का एक एक इंच चाहिए, इसका बंटवारा स्वीकार्य नहीं है। जब उच्च न्यायालय के फैसले में सिद्ध हो गया कि वहां राम मंदिर था तो वादे के अनुसार न सिर्फ मुस्लिम पक्षकारों को मुकद्दमा वापस ले लेना चाहिए बल्कि केंद्र सरकार को भी सर्वोच्च न्यायालय में दिए अपने हलफनामे के अनुसार जन्मभूमि रामलला को अविलंब सौंपनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर वहीं बनेगा, उसी मॉडल का बनेगा और वही बनाएंगे जो पूर्व निर्धारित हैं. यह टाइटल की भी लड़ाई नहीं है.

धर्म सभा में स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे – यह आवाज एक जाति, धर्म या सम्प्रदाय की नहीं है वरन पूरे देश की है। सुप्रीम कोर्ट को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। महामंडलेश्वर नवल किशोर दास जी महाराज ने कहा कि राम मंदिर निर्माण पर यदि सरकार कोई निर्णय नहीं लेती है, तो संत स्वयं निर्णय लेंगे।

स्वामी अनुभूतानंद जी महाराज ने कहा कि श्शर्म की बात है कि राम लला टाट में बैठे हैं और हमारे नेता ठाठ में बैठे हैं। अगर सरकार या न्यायालय रास्ता नहीं निकालती है तो जिस तरह ढांचा ढहाया गया था उसी तरह भव्य राम मंदिर का निर्माण भी किया जाएगा। संत नारायण गिरी जी महाराज ने कहा कि हम यहां से यह संकल्प लेकर जाएंगे कि मंदिर वहीं बनाएंगे। संत समिति के महासचिव जितेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि राम मंदिर सर्वोच्च न्यायालय की प्राथमिकता में नहीं है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के महा मंत्री विनय आर्य ने कहा कि यह समय राम मंदिर का श्रेय लेने का है। मंदिर तो बन के ही रहेगा. आर्य समाज का भी यह संकल्प है किन्तु चाहे संसद हो या सांसद, न्यायालय हो या सरकार किसी को इसके श्रेय लेने में चूक नहीं करनी चाहिए।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी शाश्वतानंद जी महाराज, विवेकानंद सरस्वती जी महाराज, नामधारी सदगुरु दिलीप सिंह जी महाराज , जैन मुनि लोकेश मुनि जी महाराज जी तथा आचार्य दीपांकर ने भी रामलीला मैदान में उमड़े जनसैलाब को राम मंदिर निर्माण के लिए तैयार रहने को कहा

विराट धर्म सभा के लिए राम भक्त सुबह 4 बजे से ही जुटने प्रारंभ हो चुके थे। सभा प्रारम्भ होने के पहले ही घंटे में रामलीला मैदान समेत पूरी दिल्ली में लगभग पांच लाख राम भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। दिल्ली एनसीआर से पहुंचे रामभक्तों की एक ही मांग है कि केंद्र सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में ही कानून बनाए।

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