उत्तराखंड

उतराखण्ड के 18 नवम्बर को हुए शहरी निकाय चुनाव में भारी मतदान होने से चुनाव से पहले अपनी अपनी पीठ ठोक रही राजनैतिक दल अंदर से आशंकित है

देहरादून (प्याउ)। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उतराखण्ड के 18 नवम्बर को हुए शहरी निकाय चुनाव में भारी मतदान होने से चुनाव से पहले अपनी अपनी पीठ ठोक रही राजनैतिक दल अंदर से आशंकित है। वहीं शासन प्रशासन इन चुनाव के शांतिपूर्ण सम्पन्न होने से राहत की सांस ले रही है। भले ही ये दल अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे है परन्तु अंदर से सब किसी अनहोनी की आशंका से सहमें हुए है। गौरतलब है कि शहरी निकाय चुनाव में 18 नवम्बर को हुए प्रायः शांतिपूर्ण मतदान में 2013 में हुए चुनाव के मुकाबले 3.54 प्रतिशत अधिक यानी 69.10 प्रतिशत मतदान होने से अभी तक अपनी जीत के बडे बडे दावे करने वाले दिग्गज भी सहमें हुए है।

इन निकाय चुनावों में जहां उधम सिंह नगर में 73.77 प्रतिशत सबसे अधिक मतदान हुआ उसके बाद चम्पावत -72.21, हरिद्वार में 72.05, पौडी-70.04, बागेश्वर में 70.02,देहरादून में 68.78, नैनीताल -67.14, उत्तरकाशी में 66.85, रूद्रप्रयाग-66.64, चमोली-65.79, टिहरी -66.01, पिथौरागढ़ में 63.86 व सबसे कम मतदान अल्मोडा जनपद में 58.82 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदाताओं का मतदान के प्रति उमडे भारी उत्साह का जहां सत्तारूढ भाजपा असहज महसूस कर रही है वहीं विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हुए सफाये से मृतप्रायः हुई कांग्रेस को नवजीवन मिलने की आश नजर आने लगी है। इसके बाबजूद हर कोई आशंकित है। सभी की नजर 20 नवम्बर पर होने वाली मतगणना पर टिकी हुई है। सभी राजनैतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी। यह चुनाव जहां सत्तारूढ भाजपा के लिए अपना बर्चस्व बचाने का प्रश्न है तो वहीं विपक्षी कांग्रेस ही नहीं उक्रांद सहित अन्य दलों को अपनी खोई हुई राजनैतिक जमीन फिर अर्जित करने का लोकसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण अवसर था।

प्रदेश के शहरी निकायों के लिए 23,53,923 मतदाता( 11,33,368 महिला और 12,20,555 पुरुष) 84 निकायों के 1148 पदों ( 7 नगर निगम महापौर -380 नगर निगम सदस्यो, 38 नगर पंचायत अध्यक्ष- 244नगर पंचायत सदस्य व 39 नगर पालिका अध्यक्ष -440नगर पालिका सदस्य) के लिए हो रहे चुनावीं दंगल में उतरे 4,978 प्रत्याशियों में से अपने जनप्रतिनिधी के चयन के लिए मतदान किया। प्रदेश में शहरी निकाय के चुनावों में सबसे प्रतिष्ठित चुनाव प्रदेश सरकार के नाक के नीचे देहरादून का महापौर के चुनाव पर सबकी नजर लगी है। जहां सत्ताधारी भाजपा से अधिक प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। यहा ंपर महापौर के लिए भाजपा ने सुनील उनियाल ‘गामा’ को प्रत्याशी बनाया हुआ है। वहीं कांग्रेस ने अपने पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल को उतारा। वहीं इस प्रतिष्ठित सीट पर गत चुनावों में स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चूकी किन्नर रजनी रावत को अपना प्रत्याशी बना कर केजरीवाल की आम आदमी पार्टी उतराखण्ड में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की जंग लड रही है। रजनी रावत के इस चुनावी दंगल में मजबूती से उतरने से देहरादून की राजनीति पर दशकों से काबिज भाजपा व कांग्रेस दोनों को अपने समीकरण बिखरने से आशंकित है।

वहीं दूसरा सबसे रोचक व प्रतिष्ठित चुनाव हल्द्वानी में हो रहा है। यहां पर परिवारवाद के लिए कुख्यात रही कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदेश के बेटे सुमित हृदेश का मुकाबला भाजपा के जोगिंदर रौतेला से हो रहा है। ऐसा ही रोचक चुनाव कोटद्वार में हो रहा है जहां पर भाजपा व कांग्रेस दोनों ने समर्पित महिला कार्यकत्र्ताओं को नजरांदाज करके नेताओं की पत्नी को प्रत्याशी बना कर जनता की नजर में खलनायक बन गयी है। कोटद्वार से जहां भाजपा ने विधायक दलीप रावत की पत्नी नीतू रावत व कांग्रेस ने कांग्रेसी दिग्गज पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी की पत्नी हेमलता नेगी को अपना प्रत्याशी बनाया। वहीं यहां पर भाजपा की विद्रोही श्रीमती चैहान को स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में जनता का भारी समर्थन मिलता देख कर दोनों दल आशंकित है। निकाय चुनाव में टिहरी के कभी दिग्गज नेता रहे शूरवीर सिंह सजवान की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी है। यहा ंपर कांग्रेस ने उनकी पत्नी अम्बिका सजवान को अपना प्रत्याशी बनाया ।

कांग्रेसी प्रत्याशी अम्बिका सजवान का मुकाबला भाजपा की बेबी असवाल से हो रहा है। वहीं यहां पर भी स्वतंत्र प्रत्याशी भी अच्छा दमखम दिखा रहे है। अन्य प्रतिष्ठित सीटों पर पिथोरागढ में भाजपा के राजेन्द्र रावत, कांग्रेस के जगत खाती, पौडी भाजपा के यशपाल बेनाम कांग्रेस सरिता नेगी, हरिद्वार भाजपा अन्नू ककड व कांग्रेस के अनिता शर्मा,रूद्रपुर भाजपा के रामपाल व कांग्रेस के नंद कुमार के बीच हो रहा है। प्रदेश की इन प्रतिष्ठित सीटों सहित सभी पदों के लिए हर स्थान पर रोचक मुकाबला हो रहा है। निकायों के महत्वपूर्ण पदों के लिए राजनैतिक दल ही नहीं कई दर्जन स्थानों पर स्वतंत्र प्रत्याशी भी मजबूत टक्कर दे रहे है। इन चुनावों में इन्हीं बातों को देख कर भारी उलट फेर होने के कायश लगाये जा रहे है।

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