उत्तराखंड

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने कहा- उत्तराखण्ड में किसी भी स्लॉटर हाऊस को मंजूरी नहीं दी जायेगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने कहा- उत्तराखण्ड में किसी भी स्लॉटर हाऊस को मंजूरी नहीं दी जायेगी।

  1. 2016 में मंगलौर में स्लॉटर हाउस की अनुमति दी गई थी। जिलाधिकारी हरिद्वार को इस आदेश को निरस्त करने के निर्देश दिये गये हैं

( प्यारा उत्तराखण्ड डाट काम ) मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत  की उपस्थिति में मोथरोवाला में “राष्ट्रीय गोकुल मिशन” योजनान्तर्गत लिंग वर्गीकृत वीर्य (सेक्स सार्टेड सीमन) उत्पादन हेतु उत्तराखण्ड लाईव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड एवं इग्नुरान साँर्टिंग टैक्नोलाँजी एलएलपी के मध्य अनुबन्ध हस्ताक्षर किया गया। अनुबन्ध पर उत्तराखण्ड लाईव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड से डॉ० एम.एस.नयाल एवं इग्नुरान साँर्टिंग टैक्नोलाँजी एलएलपी से डॉ० प्रकाश क्लेरिकल ने हस्ताक्षर किये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि #Rishikesh में स्थापित की जा रही सेक्स सार्टेड सीमन प्रयोगशाला देश की प्रथम प्रयोगशाला है। इस प्रयोगशाला की स्थापना से पशुओं के जीवन में परिवर्तन आयेगा साथ ही पशुपालकों की आय में भी सुधार होगा। पशुपालन किसानों की आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पूर्व में जब राज्य में भाजपा सरकार थी, उस समय हम प्रदेश में गोवंश संरक्षण अधिनियम लाये थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है 2021 से पूर्व ऐसी व्यवस्था कर ली जाए, जिससे हमारे गोवंश सड़कों पर आवारा न घूमें बल्कि किसानों की आजीविका में भागीदार बनें। कुंभ से पूर्व गौ सदन बनाकर आवारा विचरण कर रहे गोवंशों के लिए रहने की व्यवस्था की जायेगी।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य में किसी भी स्लॉटर हाऊस को मंजूरी नहीं दी जायेगी। उन्होंने कहा कि 2016 में मंगलौर में स्लॉटर हाउस की अनुमति दी गई थी। जिलाधिकारी #Haridwar को इस आदेश को निरस्त करने के निर्देश दिये गये हैं। सीएम ने कहा कि राज्य में किसी को भी इस प्रकार के लाइसेंस नहीं दिये जायेंगे। जिनके पास पहले से लाईसेंस हैं, वे भी निरस्त किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में गोवंश के संरक्षण के लिए देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में स्पेशल स्कॉड बनाये गये हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग की ‘‘सुरभि कामधुक्’’ पुस्तक का विमोचन किया तथा उन्नतशील किसानों को सम्मानित भी किया।

पशुपालन, मत्स्य बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने कहा कि सेक्स सार्टेड सीमन प्रयोगशाला की शुरूआत जल्द ही की जायेगी। ऋषिकेश के श्यामपुर स्थित अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केन्द्र में इस प्रयोगशाला को बनाया जायेगा। ऋषिकेश के श्यामपुर स्थित अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केन्द्र से 15 राज्यों को सीमन सप्लाई किया जाता है। सेक्स सोर्टेड सीमन के बारे में किसानों को अधिक से अधिक जानकारी देना जरूरी है। किसानों की पशुपालन से आय बढ़ाने के लिए यह प्रयोगशाला कारगर साबित होगी।

क्या है परियोजना : ’’भारत सरकार द्वारा नेशनल मिशन ऑन बोवाईन प्रोडक्टिविटी के अंतर्गत परियोजना लाई गई है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य नर पशुओं की संख्या नियंत्रित कर मादा पशुओं की संख्या में वृद्धि करना है ताकि दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जा सके और देशी उच्च नस्ल के पशुओं का संरक्षण व संवर्धन किया जा सके। परियोजना में भारत सरकार द्वारा देश के 10 अग्रणी हिमीकृत वीर्य उत्पादन संस्थानों का चयन किया गया। जिसमें अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र, श्यामपुर ऋषिकेश भी शामिल था। इस परियोजना में प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने वाला उत्तराखण्ड प्रथम राज्य बना। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को उपयुक्त बताते हुए अपनी स्वीकृति दी। वर्तमान में #Uttarakhand ही एकमात्र राज्य है जिसको इस परियोजना की स्वीकृति मिली है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य देशी पशुओं के लिंग वर्गीकृत वीर्य का उत्पादन कर उसको गाय व भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग कर अधिक से अधिक मादा पशुओं को पैदा करना है, जिससे नर पशुओं की संख्या नियंत्रित किया जा सके व दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो सके। परियोजना की कुल लागत 47 करोड़ 50 लाख रूपए है जो 05 वर्षों के लिए संचालित की जानी है। इस परियोजना में 90 प्रतिशत केंद्रांश है जबकि 10 प्रतिशत राज्यांश है। इस परियोजना के पहले वर्ष में 2 लाख जबकि दूसरे, तीसरे, चौथे व पांचवे वर्ष में 3-3 लाख सैक्स सीमन डोज का उत्पादन किया जाएगा।

इस परियोजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड लाईवस्टाक डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका की कम्पनी इन्गुरान एल.एल.सी. सेक्सिंग टेक्नोलॉजी से अनुबंध किया जा रहा है। यह कम्पनी विश्व की एकमात्र ऐसी कम्पनी है जिसको सेक्स सोर्टिंग ऑफ सीमन के काम में तकनीकी दक्षता हासिल है। इस विधि के द्वारा ‘एक्स’ व ‘वाई’ गुणसूत्र युक्त शुक्राणुओं को मशीन द्वारा अलग-अलग करके वीर्य स्ट्रा में पैक कर दिया जाता है। यदि मादा संतति की आवश्यकता है तो ‘एक्स’ क्रोमोसोम वाले वीर्य स्ट्रा का कृत्रिम गर्भाधान हेतु उपयोग करके मादा संतति की प्राप्ति की जा सकती है।’’

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