उत्तर प्रदेश

अंधभक्त, निहित स्वार्थी व दुराग्रही नहीं अपितु गुणग्राही, सतपथगामी व सनातनी बनने से होगा व्यक्ति, राष्ट्र व विश्व का कल्याण

देववाणी

अंधभक्त नहीं सनातनी बनो। जो भी जिसमें जनहित, न्याय व सत् होता है उसे ग्रहण किया जाता है। जिसमें जो अच्छा गुण है उसे ग्रहण करो और जो गलत है उसको त्याग दो। यही नीति भी सिखाती है।  हम शहीद भगत सिंह, नेताजी, चंद्रशेखर, गांधी, सहित सभी शहीदों की गुलामी से मुक्ति के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले गुण को आत्मसात करते है। वे किस जाति, धर्म लिंग, क्षेत्र, रंग, देश व नस्ल के है। वे आर्य समाजी थे या वामपंथी, वे किस जाति के है या पहनते थे, किस क्षेत्र के थे, ये सब मेरे लिए गौण है। मेरे लिए केवल उनकी अटूट राष्ट्रभक्ति श्रेष्ठ है। जिसमें जो विचार व कर्म, न्याय व जनहित की दृष्टि से हितकर हैं उनको आत्मसात करें और जो भी कर्म व विचार वर्तमान परिस्थितियों में न्याय व जनहित की दृष्टि से अनुचित है उसको त्याग दें यही हंस बुद्धि है। यही जीवन में सफलता व श्रेष्ठता की पहचान है। किसी भी व्यक्ति, जाति, धर्म का अंधानुशरण नहीं अपितु न्याय व जनहित की कसौटी में तोल कर ही ग्रहण व त्यागना चाहिए।
हर कोई भी व्यक्ति जो अपने देश समाज व निजी जीवन में हिंसा, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, राष्ट्रद्रोही, शोषण व अन्यायी प्रवृतियों पर से मुक्त रहना चाहता है। सरकारों का यह दायित्व होता है जिससे राष्ट्र का पतन हो उस पर तत्काल अंकुश लगाये। जो पथभ्रष्ट शासक समाज में अराजकता के गर्त में धकेलता है वह शासन व देश नष्ट हो जाता है। अगर हम हकीकत में इस संसार में व अपने निजी जीवन में अमन चैन यानी रामराज्य चाहते है तो हमें समझना चाहिए कि हमे कभी भी अंधभक्त, निहित स्वार्थी व दुराग्रही नहीं अपितु गुणग्राही, सतपथगामी व सनातनी बनना चाहिए। जीव को सत, न्याय व जनहित क्या है इसके लिए इंसान को कोई भी ऐसा काम व बात नहीं करना चाहिए जिसे कोई दूसरा उससे करे तो हमें खुद बुरा लगे। वह कार्य व बात  हमें सपने में भी नहीं करना चाहिए। हम समझना चाहिए कि जो कार्य न्याय व जनहित में न हो उसे किसी भी सूरत में समर्थन नहीं करना चाहिए। चाहे वह बात व काम उनका कोई कितना अपना सम्मानित, बडे पद या अपना करीबी क्यों न हो अगर उसकी बात व कार्य जनहित व न्याय के विरोध में है तो उसका समर्थन व आत्म सात न करके उसका प्रखर विरोध करना चाहिए। जो कार्य न्याय व जनहित में हो उसे चाहे उसका विरोधी भी करे या बोले तो उसका समर्थन करना चाहिए।  इसी से व्यक्ति, राष्ट्र व विश्व का कल्याण होगा। अंध समर्थन किसी व्यक्ति, धर्म, जाति, दल व राष्ट्र का करने से न मानवता का भला होता है व नहीं विश्व का। अगर समाज इस प्रवृति को मजबूती से आत्मसात करता है तो वहीं राम राज स्थापित हो सकता है। वही आदर्श राष्ट्र ,समाज व व्यक्ति होता है। जो व्यक्ति, समाज व राष्ट्र अन्याय व कुशासन का जाति, धर्म, रिश्ते, दल, नस्ल, लिंग, क्षेत्र व राष्ट्र के मोह में अंध समर्थन करता है वही अन्यायी, जनविरोधी  व हैवान होता है।

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